25 जुलाई 2026
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केरल: वायनाड पुनर्वास परियोजना में मंत्री का दौरा, नए घरों में दरारें उठी चिंताएँ

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केरल: वायनाड पुनर्वास परियोजना में मंत्री का दौरा, नए घरों में दरारें उठी चिंताएँ

सारांश

वायनाड में पुनर्वास परियोजना के दौरान मंत्री के दौरे ने निर्माण की गुणवत्ता और देरी से संबंधित सवाल उठाए हैं। भूस्खलन पीड़ितों के लिए यह परियोजना कब पूरी होगी? जानिए मंत्री का क्या कहना है।

मुख्य बातें

वायनाड पुनर्वास परियोजना में निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
मंत्री का दौरा संभावित समस्याओं के प्रति संकेत करता है।
भूस्खलन पीड़ितों के लिए आवास का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है।
स्थानीय लोगों की चिंताएँ बढ़ रही हैं।
यूथ कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।

कलपेट्टा, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल के वायनाड में भूस्खलन पीड़ितों के पुनर्वास को लेकर चिंताएँ और भी बढ़ गई हैं। राज्य के राजस्व मंत्री के. राजन ने शनिवार को एल्स्टन एस्टेट स्थित टाउनशिप परियोजना का दौरा किया, जिसके बाद निर्माण गुणवत्ता, देरी और जवाबदेही को लेकर नई बहस छिड़ गई।

मंत्री ने मुंडक्कई–चूरलमाला पुनर्वास टाउनशिप में एक घर का निरीक्षण किया, जहाँ दरारें होने की खबरें सामने आई थीं। उनके साथ सत्तारूढ़ वामपंथी दल के स्थानीय नेता भी मौजूद रहे। संभावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया।

निरीक्षण के दौरान छत पर सीपेज (पानी के रिसाव) के निशान दिखे, हालाँकि मंत्री राजन ने संरचनात्मक दरारों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल पानी के दाग हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक घर लाभार्थियों को औपचारिक रूप से सौंपे नहीं गए हैं और फिलहाल केवल भूमि के पट्टे वितरित किए गए हैं।

उन्होंने कहा, “यदि हैंडओवर के बाद कोई समस्या आती है तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा और ठेकेदार को अनुबंध के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाएगा।” साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएगी।

करीब 410 घरों वाली यह परियोजना अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है। तय समय सीमा में काम पूरा न होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है।

इस बीच, यूथ कांग्रेस ने परियोजना स्थल पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

गौरतलब है कि जुलाई 2024 में आए विनाशकारी भूस्खलन के बाद सैकड़ों लोग बेघर हो गए थे। अब भी कई पीड़ित स्थायी आवास का इंतजार कर रहे हैं।

शुरुआत में 1,000 से अधिक परिवारों को पुनर्वास के लिए चिन्हित किया गया था, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 451 रह गई है, जिससे पारदर्शिता और पात्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। करीब 30 लाख रुपये की लागत से बने इन घरों में बसने से पहले ही नुकसान के संकेत मिलने की खबरें हैं। आधिकारिक दावों के अनुसार 170 से अधिक घर पूरे हो चुके हैं, लेकिन जमीनी रिपोर्ट्स बताती हैं कि इनमें से बहुत कम ही रहने लायक हैं और कई में बुनियादी काम भी अधूरा है।

इसके अलावा, आपदा के बाद मिले करोड़ों रुपये के फंड के उपयोग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्पष्ट हिसाब-किताब के अभाव में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं, जिसका सबूत अधूरी आधारभूत सुविधाएँ और खराब निर्माण गुणवत्ता है।

सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और बागान श्रमिकों जैसे अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित लोगों की आजीविका का मुद्दा भी अब तक अनदेखा है।

राज्य सरकार जहाँ अपनी स्थिति का बचाव करते हुए सुधार के आश्वासन दे रही है, वहीं जमीन पर दिख रही खामियाँ पीड़ितों की चिंताओं को और बढ़ा रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मंत्री ने परियोजना के निर्माण की गुणवत्ता की समीक्षा की?
हाँ, मंत्री ने निर्माण की गुणवत्ता की समीक्षा की और दरारों के आरोपों को खारिज किया।
परियोजना में कितने घरों का निर्माण किया गया है?
करीब 410 घरों का निर्माण किया गया है।
क्या परियोजना में समय सीमा का पालन किया जाएगा?
मंत्री ने कहा कि यदि समय सीमा का पालन नहीं किया गया तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों की चिंताएँ क्या हैं?
स्थानीय लोग निर्माण गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर चिंतित हैं।
क्या इस परियोजना पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं?
हाँ, यूथ कांग्रेस ने परियोजना स्थल पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
राष्ट्र प्रेस
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