वायनाड भूस्खलन: कल्लाडी सुरंग स्थल पर 4 प्रवासी मजदूरों की मौत, 6 लापता; CM 8 जुलाई को पहुँचेंगे
सारांश
मुख्य बातें
केरल के वायनाड जिले के कल्लाडी स्थित मीनाक्षी ब्रिज के निकट एक सुरंग निर्माण परियोजना स्थल पर 7 जुलाई को हुए भीषण भूस्खलन में चार प्रवासी मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। छह लोग अभी भी लापता हैं और नौ घायल अस्पताल में उपचाराधीन हैं। प्रशासन को आशंका है कि मलबे में और लोग दबे हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
हादसे का घटनाक्रम
सुरंग खुदाई के दौरान निकाली गई भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा अचानक ढह गया, जिसकी चपेट में वहाँ काम कर रहे मजदूर आ गए। राहत एवं बचाव दल तत्काल मौके पर पहुँचे और मलबे से शव तथा घायलों को निकालने का कार्य शुरू किया। रात के समय बचाव अभियान अस्थायी रूप से रोका गया, लेकिन एम्बुलेंस और मेडिकल टीमें स्थल पर मौजूद रहीं।
स्वास्थ्य व्यवस्था और घायलों की स्थिति
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बताया कि मलबे से निकाले गए तीन प्रवासी मजदूरों का पोस्टमार्टम वैथिरी तालुक अस्पताल में पूरा कर लिया गया है। प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए सुल्तान बथेरी तालुक अस्पताल से भी सर्जन को बुलाया गया था।
मेप्पाडी स्थित डब्ल्यूआईएमएस अस्पताल में भर्ती नौ घायलों में से दो को छुट्टी दे दी गई है। शेष सात में एक एर्नाकुलम निवासी साइट इंजीनियर भी शामिल है, जिसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। दो घायल आईसीयू में हैं — एक के सिर और दोनों पैरों में गंभीर फ्रैक्चर है, जबकि दूसरे के दोनों पैर टूटे हैं।
राहत शिविर और समन्वय
भूस्खलन से विस्थापित 42 परिवारों के 142 लोगों को मेप्पाडी पॉलिटेक्निक में स्थापित राहत शिविर में ठहराया गया है। यहाँ चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम चौबीसों घंटे तैनात है। मेप्पाडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो राहत एवं स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय का कार्य संभाल रहा है। स्वास्थ्य विभाग और 108 एम्बुलेंस सेवा की टीमें मौके पर तैनात रहीं।
मुख्यमंत्री का दौरा
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन 8 जुलाई को कल्लाडी स्थित भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगे। वे तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सुबह 11:30 बजे हेलीकॉप्टर से रवाना होंगे और दोपहर करीब एक बजे मीनाक्षी ब्रिज के पास आपदा स्थल पर पहुँचकर अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करेंगे।
आगे की स्थिति
यह हादसा ऐसे समय में आया है जब केरल मानसून के चरम मौसम में है और वायनाड जैसे पहाड़ी जिले भूस्खलन के लिहाज़ से संवेदनशील माने जाते हैं। गौरतलब है कि जुलाई 2024 में वायनाड में हुए विनाशकारी भूस्खलन में 200 से अधिक लोगों की जान गई थी। बचाव दल का अभियान जारी है और लापता छह लोगों की तलाश में मलबा हटाने का काम प्राथमिकता पर है।