कोलकाता गोदाम हादसा: तारातला में 3 मजदूरों की मौत, 18 अभी भी मलबे में फंसे
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार, 24 जून 2026 की दोपहर एक निर्माणाधीन गोदाम के अचानक ढह जाने से 3 मजदूरों की मौत हो गई और 18 से अधिक लोग अभी भी मलबे में दबे हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), कोलकाता पुलिस और भारतीय सेना की संयुक्त टीमें अभियान में जुटी हैं।
हादसे का घटनाक्रम
यह गोदाम बुधवार दोपहर अचानक भरभराकर गिर गया, जिसके नीचे काम कर रहे दर्जनों मजदूर दब गए। सूचना मिलते ही कोलकाता पुलिस डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप और SDRF की टीमें मौके पर पहुँची। बाद में NDRF और सेना को भी बुलाया गया। अब तक बचाव दल 21 मजदूरों को मलबे से बाहर निकालने में सफल रहे हैं, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है और शेष का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बचाव अभियान की स्थिति
NDRF के एक अधिकारी के अनुसार, 'हम मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभी भी काम कर रहे हैं। हमें सावधानी से आगे बढ़ना होगा क्योंकि मलबे के नीचे फंसे लोगों को नुकसान पहुँच सकता है।' 18 लोग अभी भी मलबे के भीतर हैं, हालाँकि बचाव कर्मियों ने उनसे संपर्क स्थापित कर लिया है, जो राहत की बात है।
सेना की ईस्टर्न कमांड ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि गोदाम ढहने की सूचना मिलते ही सेना की चार टुकड़ियाँ तत्काल तैनात की गईं। इनमें बचाव कर्मियों के साथ विशेष इंजीनियर और मेडिकल स्टाफ भी शामिल हैं, जो भारी कंक्रीट के मलबे में फंसे लोगों को खोजने में लगे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी कैबिनेट के कुछ मंत्रियों के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने मीडिया को बताया, 'सभी एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं। हमने 21 लोगों को बचाया है, जिनमें से 3 की मौत हो गई है। लगभग 18 लोग अभी भी अंदर फंसे हुए हैं और बचाव कर्मियों का उनसे संपर्क हो गया है।'
आम जनता और मजदूरों पर असर
यह हादसा उन मजदूरों के साथ हुआ जो निर्माणाधीन गोदाम में काम कर रहे थे। गौरतलब है कि शहरी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में मानसून की शुरुआत के साथ निर्माण स्थलों पर जोखिम बढ़ जाता है।
आगे क्या होगा
बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। अधिकारियों के अनुसार, जब तक मलबे में फंसे सभी लोगों का पता नहीं चल जाता, अभियान रुकेगा नहीं। हादसे के कारणों की जाँच और निर्माण कार्य में लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने के लिए आगे की कार्रवाई अपेक्षित है।