कोलकाता गोदाम हादसा: तारातला में छत गिरने से 5 की मौत, 12-15 मज़दूर अभी भी मलबे में दबे
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के तारातला इलाके में 24 जून 2026 को दोपहर 12.07 बजे निर्माणाधीन वेयरहाउस की छत गिरने से 5 मज़दूरों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। पुलिस और फायर ब्रिगेड के अनुसार, अभी भी 12 से 15 लोग मलबे के नीचे दबे हैं, जिन्हें जीवित बताया जा रहा है।
हादसे का घटनाक्रम
बुधवार दोपहर तारातला में बेहरा ब्रदर्स के स्वामित्व वाले निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह गई, जिसमें उस समय काम कर रहे दर्जनों मज़दूर दब गए। घटना की सूचना मिलते ही कोलकाता पुलिस, फायर डिपार्टमेंट, सिविल डिफेंस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और भारतीय सेना के जवान मौके पर पहुँचे और बचाव अभियान शुरू किया।
अब तक 25 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा चुका है। 20 घायलों को एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 2 की हालत गंभीर बताई जा रही है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और निरीक्षण
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हादसे के बाद कई मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के साथ दुर्घटना स्थल का दौरा किया और बचाव कार्य की निगरानी की। इसके बाद उन्होंने राज्य सचिवालय नबन्ना में मीडिया को संबोधित किया।
अधिकारी ने कहा, 'दुर्घटना दोपहर 12.07 बजे हुई। मैं सिविल डिफेंस, फायर डिपार्टमेंट और कोलकाता पुलिस को उनके शुरुआती बचाव अभियान के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिससे कई लोगों की जान बची। NDRF कर्मियों और भारतीय सेना के जवान भी वहाँ काम कर रहे हैं।'
शाम को मुख्यमंत्री ने एसएसकेएम अस्पताल पहुँचकर घायल मज़दूरों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।
गलत बिल्डिंग प्लान पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह हादसा निर्माणाधीन गोदाम के त्रुटिपूर्ण बिल्डिंग प्लान के कारण हुआ। उन्होंने बताया कि इस बिल्डिंग प्लान को 17 जनवरी 2026 को मंजूरी दी गई थी। कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (KMC) के इंजीनियरों ने प्रारंभिक जाँच में बिल्डिंग प्लान में गड़बड़ी की पुष्टि की है और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया है।
इमारत के मालिकों की पहचान बेहरा ब्रदर्स के रूप में हुई है, और मुख्यमंत्री ने उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है।
निर्माण कार्य पर रोक का आदेश
इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने KMC को निर्देश दिया है कि कोलकाता में निर्माणाधीन सभी व्यावसायिक संपत्तियों पर काम 31 जुलाई 2026 तक बंद रखा जाए। इस दौरान सभी परियोजनाओं के बिल्डिंग प्लान, साइट प्लान और स्थल की भौतिक जाँच की जाएगी। जिन परियोजनाओं के दस्तावेज़ सही पाए जाएंगे, उन्हें 1 अगस्त 2026 से काम पुनः शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
बचाव अभियान की स्थिति
पुलिस और फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार, मलबे में अभी भी 12 से 15 मज़दूर फँसे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन लोगों से संपर्क स्थापित हो चुका है और वे जीवित हैं। बचाव दल रात भर ऑपरेशन जारी रखने की तैयारी में है। यह हादसा ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में निर्माण क्षेत्र की सुरक्षा मानकों पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।