10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोलकाता तारातला गोदाम हादसा: मलबे में दबे मजदूरों की चीखें, 13 बचाए गए — बचाव अभियान जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोलकाता तारातला गोदाम हादसा: मलबे में दबे मजदूरों की चीखें, 13 बचाए गए — बचाव अभियान जारी

सारांश

कोलकाता के तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढहने से 50-60 मजदूर मलबे में दब गए। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि मलबे के नीचे से अब भी चीखने की आवाजें आ रही हैं। सेना, NDRF और फायर ब्रिगेड का बचाव अभियान जारी है; 13 मजदूर निकाले गए, 5 की हालत नाजुक।

मुख्य बातें

कोलकाता के तारातला में 24 जून, बुधवार दोपहर निर्माणाधीन गोदाम की छत ढह गई।
हादसे के समय गोदाम में 50 से 60 मजदूर काम कर रहे थे।
अब तक 13 मजदूरों को बचाया गया; 5 की हालत गंभीर , सभी एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती।
भारतीय सेना , NDRF , फायर ब्रिगेड और कोलकाता पुलिस युद्धस्तर पर बचाव अभियान में जुटी हैं।
मंत्री अग्निमित्रा पॉल घटनास्थल पर मौजूद; मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का दौरा बाद में अपेक्षित।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वेल्डिंग के दौरान तकनीकी खामी या भारी बारिश से कमजोर हुई निर्माण सामग्री संभावित कारण।

कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार, 24 जून की दोपहर निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह गई, जिससे अंदर काम कर रहे 50 से 60 मजदूर मलबे में दब गए। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 13 मजदूरों को जीवित बचाया जा चुका है, जिनमें से 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

स्थानीय लोगों के अनुसार, बुधवार दोपहर निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक भरभराकर गिर गई। उस समय गोदाम के भीतर बड़ी संख्या में मजदूर वेल्डिंग और अन्य निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वेल्डिंग के दौरान किसी तकनीकी खामी के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। कुछ स्थानीय निवासियों का मानना है कि मंगलवार को हुई भारी बारिश ने निर्माण सामग्री को कमजोर कर दिया था, जिसके चलते छत का यह हिस्सा अचानक ढह गया। हालांकि, हादसे का सटीक कारण अभी जाँच का विषय है।

मलबे में दबे लोगों की पुकार

उसी गोदाम में काम करने वाली सोनी देवी ने बताया, 'हमें सुबह 11 बजे एक फोन आया कि पूरी कंपनी गिर गई है, कृपया हमें बचाने आएं। मैं दूर से आई, अपने बच्चे को स्कूल भी नहीं छोड़ा। अंदर 13 लोग हैं। वे मदद के लिए चिल्ला रहे हैं। उनके मोबाइल बंद हो गए हैं।'

घटनास्थल पर मौजूद एक अन्य मजदूर ने बताया, 'लोग अभी भी फंसे हुए हैं। हम मलबे के नीचे से उनकी चीखें सुन सकते हैं। यहाँ हर समय 30 से 40 लोग काम करते थे।' एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि गोदाम में 40 से 50 मजदूर नियमित रूप से काम करते थे।

बचाव अभियान

हादसे की सूचना मिलते ही भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), फायर ब्रिगेड और कोलकाता पुलिस के जवान युद्धस्तर पर घटनास्थल पर पहुँच गए। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए क्रेन और गैस कटर की मदद ली जा रही है। स्थानीय निवासियों ने पहले स्वयं बचाव कार्य शुरू किया और बाद में प्रशासन की टीमें पहुँचीं।

सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य की नगरपालिका मामलों और शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल घटनास्थल पर पहुँच चुकी हैं और बचाव कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रही हैं। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, जिन्होंने स्थिति का जायजा लिया, बुधवार को बाद में घटनास्थल का दौरा करने वाले हैं।

आगे क्या होगा

बचाव अभियान अभी भी जारी है और मलबे में अभी भी कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। गंभीर रूप से घायल 5 मजदूरों का एसएसकेएम अस्पताल में उपचार चल रहा है। हादसे के कारणों की जाँच के लिए प्रशासनिक टीम भी सक्रिय है। यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जवाबदेही तभी तय होगी जब ठेकेदार और साइट मालिक की जिम्मेदारी सार्वजनिक रूप से स्थापित की जाए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता तारातला गोदाम हादसा क्या है?
24 जून, बुधवार दोपहर कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह गई, जिससे उस समय वहाँ काम कर रहे 50 से 60 मजदूर मलबे में दब गए। अब तक 13 मजदूरों को बचाया गया है और बचाव अभियान जारी है।
हादसे में कितने मजदूर फंसे हैं और कितने बचाए गए?
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 50 से 60 मजदूर गोदाम में काम कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 13 मजदूरों को जीवित बचाया गया है, जिनमें से 5 की हालत गंभीर है और उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
तारातला गोदाम की छत क्यों गिरी?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वेल्डिंग के दौरान किसी तकनीकी खामी के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। कुछ स्थानीय निवासियों का मानना है कि मंगलवार को हुई भारी बारिश ने निर्माण सामग्री को कमजोर कर दिया था। हादसे का सटीक कारण अभी जाँच का विषय है।
बचाव अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), फायर ब्रिगेड और कोलकाता पुलिस युद्धस्तर पर बचाव कार्य में जुटी हैं। मलबा हटाने के लिए क्रेन और गैस कटर का उपयोग किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने इस हादसे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
नगरपालिका मामलों और शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल घटनास्थल पर पहुँचकर बचाव कार्यों की निगरानी कर रही हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्थिति का जायजा लिया है और बुधवार को बाद में घटनास्थल का दौरा करने वाले हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले