तारातला हादसा: मलबे से 2 और शव बरामद, मृतकों की संख्या 7 हुई; गोदाम मालिक गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के तारातला इलाके में हुई भीषण इमारत ढहने की दुर्घटना में गुरुवार, 25 जून की सुबह मलबे से दो और शव निकाले गए, जिससे मृतकों की कुल संख्या 7 हो गई है। हादसे के 20 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) का बचाव अभियान पूरी ताकत से जारी है।
मृतकों की संख्या में इज़ाफा
बुधवार रात तक इस दुर्घटना में 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी। गुरुवार सुबह मलबे की गहरी परतों से 2 और शव बरामद होने के बाद यह आँकड़ा 7 पर पहुँच गया। अधिकारियों के अनुसार अभी भी 3 से 4 लोग मलबे में दबे हुए हैं और बचाव दल उन तक पहुँचने का प्रयास कर रहा है।
गोदाम मालिक समेत तीन गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गोदाम के मालिक शंभूनाथ बहरा को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही इस हादसे से जुड़े मामले में अब तक कुल 3 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस पूरे प्रकरण की गहन जाँच कर रही है।
एनडीआरएफ का बचाव अभियान
एनडीआरएफ की दूसरी बटालियन के कमांडेंट मनीष रंजन ने बताया कि अब तक 16 लोगों को सुरक्षित जीवित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि ढही हुई संरचना से 5 लोगों को अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया है। बचाव दल ने मलबे में दबे एक व्यक्ति तक पहुँचने का रास्ता बना लिया है और अगले आधे घंटे के भीतर उसे निकालने की उम्मीद जताई गई।
कमांडेंट रंजन ने बताया कि बचाव अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ढही हुई संरचना में कंक्रीट की कई परतें, लोहे की सरियाँ, गर्डर और टिन की चादरें शामिल हैं। फंसे हुए लोगों के आसपास नालियाँ, अस्थिर मलबा और भारी संरचनात्मक अवरोध होने के कारण टीम अत्यंत सावधानी से काम कर रही है।
विशेष तकनीक का उपयोग
एनडीआरएफ की टीमें विशेष सर्च उपकरणों और लाइफ डिटेक्शन डिवाइस की सहायता से पूरे क्षेत्र की लगातार स्कैनिंग कर रही हैं। कमांडेंट ने स्पष्ट किया कि इस अभियान में वॉटर-प्रेशर रेस्क्यू तकनीक का उपयोग संभव नहीं है। फिलहाल स्थिरीकरण, कटिंग ऑपरेशन और आधुनिक उपकरणों के ज़रिये बचाव कार्य जारी है। जहाँ संभव हो रहा है, वहाँ फंसे लोगों को ऑक्सीजन और अन्य ज़रूरी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल पहले से उठते रहे हैं। गौरतलब है कि गोदाम की संरचनात्मक स्थिति और उसमें लोगों की मौजूदगी के कारण जाँच एजेंसियाँ लापरवाही के पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। बचाव अभियान के पूरा होने के बाद मृतकों की संख्या में और बदलाव संभव है।