तेजस्वी यादव का आरोप: CM सम्राट ने जमुई पीड़िता की पहचान उजागर कर तोड़ा पॉक्सो एक्ट
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 25 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए — उनका कहना है कि सीएम ने जमुई यौन उत्पीड़न मामले की नाबालिग पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया पर उजागर करके पॉक्सो अधिनियम-2012 का उल्लंघन किया है। तेजस्वी ने माँग की है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
विवाद की जड़ — वह पोस्ट जो हटानी पड़ी
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। उस तस्वीर में सीएम सम्राट पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों के साथ खड़े नज़र आ रहे थे। हालाँकि, मुख्यमंत्री की पोस्ट में सभी चेहरे ब्लर किए गए थे, फिर भी पोस्ट को बाद में हटा दिया गया — लेकिन उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था।
तेजस्वी यादव के अनुसार, यह घटना तब हुई जब नाबालिग लड़की और उसका परिवार मुख्यमंत्री से उनके पटना स्थित सरकारी आवास पर मिलने गया था। यह मुलाकात जमुई में एक नाबालिग लड़की और एक किशोर लड़के के साथ कथित उत्पीड़न और मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के कुछ दिनों बाद हुई।
तेजस्वी का कानूनी तर्क — पॉक्सो की धारा 23
तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा, 'पॉक्सो अधिनियम-2012 की धारा 23 के अनुसार, किसी भी मीडिया — प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया — या अन्य माध्यम से पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर नहीं की जा सकती। इसमें बच्चे का नाम, पता, फोटो, स्कूल या परिवार से जुड़ी कोई भी जानकारी शामिल है जिससे उसकी पहचान का खुलासा हो सके।'
उन्होंने आगे बताया कि कानून के इस प्रावधान के उल्लंघन पर 6 महीने से 1 वर्ष तक की जेल या जुर्माना, अथवा दोनों का प्रावधान है। तेजस्वी ने तीखे शब्दों में पूछा, 'बिहार के मुख्यमंत्री को इस जुर्म के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, अन्यथा फिर पॉक्सो एक्ट को मानेगा कौन?'
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब जमुई का यौन उत्पीड़न मामला बिहार की राजनीति में पहले से ही गर्म मुद्दा बना हुआ है। गौरतलब है कि पॉक्सो मामलों में पीड़ित की पहचान उजागर करना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के भी विरुद्ध है। विपक्ष के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति पर पॉक्सो पीड़ित की पहचान उजागर करने का आरोप लगा हो — लेकिन एक मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह का आरोप राज्य की राजनीति में असाधारण है।
आगे क्या होगा
तेजस्वी यादव की माँग है कि बिहार पुलिस और संबंधित न्यायिक अधिकारी मुख्यमंत्री के खिलाफ पॉक्सो की धारा 23 के तहत स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करें। मामले के राजनीतिक और कानूनी दोनों आयामों पर आने वाले दिनों में घटनाक्रम और तेज़ होने की संभावना है।