जमुई मामले पर मांझी के पोस्ट पर रोहिणी आचार्य का पलटवार: 'अपराधी की पहचान जाति से नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव की बहन रोहिणी आचार्य ने 22 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के उस सोशल मीडिया पोस्ट पर कड़ा पलटवार किया, जिसमें मांझी ने जमुई छेड़छाड़ मामले को लेकर तेजस्वी यादव पर निशाना साधा था। आचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी अपराधी की पहचान उसकी जाति या धर्म से नहीं की जानी चाहिए। यह विवाद बिहार की राजनीति में नया तनाव लेकर आया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
जमुई जिले में एक नाबालिग लड़की से जुड़े छेड़छाड़ मामले के मुख्य आरोपी नंदन यादव के पैर में मंगलवार को हुई पुलिस मुठभेड़ में गोली लगी। इसी कार्रवाई में एक अन्य आरोपी हरे राम यादव भी घायल हो गया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज़ हो गई।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में तेजस्वी यादव के उन पुराने बयानों का उल्लेख किया, जिनमें उन्होंने यादव समुदाय को अपना भाई बताया था। मांझी ने कहा कि तेजस्वी अब यह दावा कर सकते हैं कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनके 'भाई' पर कार्रवाई की। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं में लिप्त लोगों को कदापि नहीं बख्शेगी।
रोहिणी आचार्य की तीखी प्रतिक्रिया
रोहिणी आचार्य ने मांझी के पोस्ट को 'सस्ती और भद्दी बयानबाजी' करार देते हुए सवाल किया कि एक केंद्रीय मंत्री को दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग करने या पीड़िता के प्रति संवेदना प्रकट करने के बजाय ऐसे बयान देने की ज़रूरत क्यों महसूस होती है। उन्होंने कहा कि मांझी की बातों से उनके मानसिक संतुलन और राजनीतिक समझ की स्थिति का पता चलता है।
आचार्य ने यह भी रेखांकित किया कि मांझी एक व्यक्ति के कथित अपराध को पूरे यादव समुदाय से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जो सर्वथा अनुचित है। उन्होंने तर्क दिया कि यादव समुदाय के लोग भाजपा, जदयू, हम और अन्य दलों सहित बिहार एवं देशभर में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हैं।
जाति और अपराध का सवाल
आचार्य ने पूछा कि क्या किसी एक व्यक्ति के कृत्यों के लिए पूरी जाति, उसके नेताओं या किसी राजनीतिक पार्टी को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। उनका कहना था कि किसी अपराध के आरोपी को किसी पूरे समुदाय का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में जाति-आधारित राजनीतिक ध्रुवीकरण की बहस पहले से ही गर्म है। गौरतलब है कि चुनावी माहौल में अपराध की घटनाओं को जाति-विमर्श से जोड़ने की प्रवृत्ति बिहार में नई नहीं है, और आलोचकों का कहना है कि इससे न्याय की माँग कमज़ोर पड़ती है।
न्याय बनाम जाति-राजनीति
रोहिणी आचार्य ने अपनी बात को इन शब्दों में समेटा: न्याय का असली अर्थ अपराधियों को दंड देना है, न कि किसी जाति विशेष को बदनाम करना या उसे निशाना बनाना। उनका यह बयान जमुई मामले को एक व्यापक सामाजिक प्रश्न की ओर ले जाता है।
आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार विधानसभा की राजनीति में और गहरा हो सकता है, क्योंकि विपक्ष इस मुद्दे को सत्तारूढ़ गठबंधन की जाति-आधारित बयानबाजी के विरुद्ध हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की स्थिति में है।