6 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शिशु सुरक्षा दिवस 7 नवंबर: टीकाकरण और सही पोषण से घटेगी शिशु मृत्यु दर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शिशु सुरक्षा दिवस 7 नवंबर: टीकाकरण और सही पोषण से घटेगी शिशु मृत्यु दर

सारांश

हर वर्ष 7 नवंबर को मनाया जाने वाला शिशु सुरक्षा दिवस याद दिलाता है कि भारत में प्रतिदिन 63,000 से 72,000 शिशु जन्म लेते हैं — और उनका भविष्य टीकाकरण, सही पोषण और परिवार की जागरूकता पर टिका है।

मुख्य बातें

शिशु सुरक्षा दिवस हर वर्ष 7 नवंबर को विश्वभर में मनाया जाता है।
दिवस का मूल लक्ष्य समय पर टीकाकरण , विटामिन 'ए' और संतुलित पोषण से शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 0–6 वर्ष आयु के बच्चे कुल जनसंख्या का 13% से अधिक थे।
भारत में प्रतिवर्ष 2.3 करोड़ से 2.5 करोड़ और प्रतिदिन 63,000 से 72,000 शिशु जन्म लेते हैं।
इस दिवस की शुरुआत 1990 के दशक में यूरोपीय देशों ने की थी; अब यह वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है।

शिशु सुरक्षा दिवस हर वर्ष 7 नवंबर को मनाया जाता है, जिसका मूल उद्देश्य नवजात शिशुओं की देखभाल, समय पर टीकाकरण और संतुलित पोषण के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना है। भारत के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आज भी शिशु स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की गंभीर कमी है, जिसे दूर करना इस दिवस की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

शिशु सुरक्षा दिवस का उद्देश्य और इतिहास

इस दिवस की शुरुआत 1990 के दशक में यूरोपीय देशों द्वारा की गई थी, जिसके बाद से यह वैश्विक स्तर पर मनाया जा रहा है। यह दिन इस विचार पर बल देता है कि शिशुओं की सुरक्षा केवल चिकित्सकों या सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और पूरे समाज की सामूहिक जवाबदेही है।

इस अवसर पर देशभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम और समारोह आयोजित किए जाते हैं, जिनमें माता-पिता को शिशु जन्म के साथ आने वाली स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियों के बारे में शिक्षित किया जाता है।

टीकाकरण और पोषण की भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार, शिशु मृत्यु दर को कम करने में समय पर टीकाकरण, विटामिन 'ए' की खुराक और संतुलित पोषण की निर्णायक भूमिका होती है। इस दिवस पर विशेष रूप से इन तीन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण और टीकाकरण की कमी शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब भारत में प्रतिवर्ष 2.3 करोड़ से 2.5 करोड़ के बीच बच्चे जन्म लेते हैं।

भारत में शिशु जनसांख्यिकी

2011 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या में 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत से अधिक थी। वहीं, 0 से 14 वर्ष के बच्चे देश की कुल आबादी का 30.76 प्रतिशत हिस्सा थे।

रिपोर्टों के अनुसार, देश में प्रतिदिन लगभग 63,000 से 72,000 शिशु जन्म लेते हैं, जबकि हर घंटे यह संख्या करीब 2,630 से 2,650 के बीच रहती है। इतनी बड़ी जन्म दर को देखते हुए शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

आम जनता और परिवारों पर असर

शिशु सुरक्षा दिवस माता-पिता को यह स्मरण कराता है कि नवजात के प्रथम कुछ महीने और वर्ष उसके सम्पूर्ण जीवन की नींव होते हैं। उचित स्तनपान, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जाँच और टीकाकरण का अनुपालन न केवल शिशु की जान बचाता है, बल्कि उसकी दीर्घकालिक प्रतिरोधक क्षमता भी सुनिश्चित करता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जागरूकता अभियानों का प्रभाव तब अधिक होता है जब स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और परिवार के बुजुर्ग सदस्य मिलकर नई माताओं का मार्गदर्शन करते हैं।

आगे की राह

शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए सरकारी योजनाओं और सामुदायिक प्रयासों के बीच समन्वय ज़रूरी है। 7 नवंबर का यह दिन एक अनुस्मारक है कि राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा है, और इस दिशा में प्रत्येक परिवार की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु असली प्रश्न यह है कि जागरूकता अभियान ग्रामीण भारत में ज़मीनी बदलाव कितना ला पा रहे हैं। भारत में प्रतिदिन 63,000 से अधिक शिशु जन्म लेते हैं, फिर भी दूरदराज के इलाकों में टीकाकरण कवरेज और पोषण तक पहुँच की खाई बनी हुई है। मुख्यधारा की कवरेज इस दिवस को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत करती है, लेकिन आँगनवाड़ी नेटवर्क की क्षमता, कोल्ड चेन की कमी और लैंगिक पूर्वाग्रह जैसे संरचनात्मक अवरोधों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। जब तक इन मूलभूत समस्याओं को नीतिगत प्राथमिकता नहीं मिलती, तब तक हर नवंबर का यह दिन महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिशु सुरक्षा दिवस क्या है और कब मनाया जाता है?
शिशु सुरक्षा दिवस प्रत्येक वर्ष 7 नवंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य नवजात शिशुओं की देखभाल, टीकाकरण और पोषण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में यूरोपीय देशों ने की थी।
शिशु सुरक्षा दिवस क्यों मनाया जाता है?
यह दिवस शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए मनाया जाता है, क्योंकि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में नवजात देखभाल को लेकर जागरूकता की गंभीर कमी है। समय पर टीकाकरण और संतुलित पोषण को बढ़ावा देना इस दिन का केंद्रीय संदेश है।
बच्चों के लिए टीकाकरण क्यों ज़रूरी है?
टीकाकरण शिशु को जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखता है और उसकी दीर्घकालिक प्रतिरोधक क्षमता बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर टीके और विटामिन 'ए' की खुराक शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी ला सकती है।
भारत में हर वर्ष कितने शिशु जन्म लेते हैं?
रिपोर्टों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष लगभग 2.3 करोड़ से 2.5 करोड़ शिशु जन्म लेते हैं। प्रतिदिन 63,000 से 72,000 और हर घंटे लगभग 2,630 से 2,650 बच्चे जन्म लेते हैं।
शिशु की देखभाल में परिवार की क्या भूमिका है?
शिशु सुरक्षा दिवस इस बात पर जोर देता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल डॉक्टरों या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। उचित स्तनपान, स्वच्छता, नियमित जाँच और टीकाकरण में परिवार की सक्रिय भागीदारी निर्णायक होती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले