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नेशनल वैक्सीनेशन डे: बच्चों के लिए समय पर टीकाकरण, स्वास्थ्य की सुरक्षा का महत्वपूर्ण उपाय

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नेशनल वैक्सीनेशन डे: बच्चों के लिए समय पर टीकाकरण, स्वास्थ्य की सुरक्षा का महत्वपूर्ण उपाय

सारांश

हर साल १६ मार्च को मनाया जाने वाला नेशनल वैक्सीनेशन डे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए टीकाकरण के महत्व को दर्शाता है। सही उम्र और खुराक में टीका लगवाना बच्चों को कई घातक बीमारियों से बचाने में मदद करता है। जानें, बच्चों के लिए वैक्सीनेशन शेड्यूल।

मुख्य बातें

नेशनल वैक्सीनेशन डे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा का प्रतीक है।
सही उम्र में टीकाकरण कई घातक बीमारियों से बचाता है।
यूनिसेफ के अनुसार, समय पर वैक्सीनेशन अधिक प्रभावी होता है।
टीकाकरण के दुष्प्रभाव सामान्यतः हल्के होते हैं।
बच्चों के लिए नियमित टीकाकरण शेड्यूल का पालन आवश्यक है।

नई दिल्ली, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत में हर वर्ष १६ मार्च को नेशनल वैक्सीनेशन डे मनाया जाता है। यह दिन बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में टीकाकरण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। टीकों ने विश्वभर में लाखों बच्चों की जानें बचाई हैं और कई खतरनाक बीमारियों को खत्म या नियंत्रित किया है। वर्तमान में भी नई-नई बीमारियाँ सामने आ रही हैं, इसलिए बच्चों को सही समय पर और उचित खुराक में टीका लगवाना अत्यंत आवश्यक है।

यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेंस फंड (यूनिसेफ) के अनुसार, वैक्सीनेशन तब सबसे प्रभावी होते हैं जब उन्हें बच्चे की उम्र के अनुसार समय पर दिया जाए। कुछ बीमारियाँ विशेष आयु में अधिक घातक होती हैं। उदाहरण के लिए, पोलियो मुख्य रूप से ५ वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है, इसलिए पोलियो का टीका इसी आयु में दिया जाता है। यदि टीका समय पर न लगे या बिलकुल न लगे, तो बच्चा गंभीर बीमारी का शिकार हो सकता है।

जन्म के समय दिए जाने वाले टीकों में बीसीजी का टीका शामिल है, जो तपेदिक (टीबी) से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके संभावित दुष्प्रभावों में इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, सूजन, स्राव, हल्का बुखार या सिरदर्द हो सकता है। दूसरा है ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी), जो मुंह से दी जाने वाली पहली खुराक है और पोलियो वायरस से बचाव करती है। इसका कोई सामान्य दुष्प्रभाव नहीं होता। तीसरा है हेपेटाइटिस बी, जो लीवर के वायरल संक्रमण से बचाने में सहायक है। इंजेक्शन वाली जगह पर लालिमा और हल्का दर्द हो सकता है।

६ सप्ताह के बच्चे के टीके में ओपीवी – १, पेंटावेलेंट – १, रोटावायरस वैक्सीन – १, पीसीवी – १ शामिल हैं। ये टीके डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी, हिब, रोटावायरस (गंभीर दस्त), निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और पोलियो से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन-दर्द, हल्का बुखार, चिड़चिड़ापन, थकान या भूख कम लगना।

१० सप्ताह के बच्चे के टीके में पेंटावेलेंट – २, ओपीवी – २, रोटावायरस वैक्सीन – २ शामिल है। इनके दुष्प्रभाव भी इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन-दर्द, हल्का बुखार, चिड़चिड़ापन, थकान या भूख कम लगना हो सकते हैं। हालांकि, ये सभी कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। वहीं, १४ सप्ताह के बच्चे के टीके में पेंटावेलेंट – ३, ओपीवी – ३, रोटावायरस वैक्सीन – ३, पीसीवी – २ शामिल हैं। ये खुराक कई बीमारियों से लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती हैं।

९-१२ महीने के बच्चे के टीके में खसरा-रूबेला (एमआर) – १, जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई-१), पीसीवी बूस्टर शामिल हैं, जो खसरा-रूबेला से बुखार, दाने और जटिलताओं से बचाते हैं। जेई एक मच्छर से फैलने वाली गंभीर मस्तिष्क की बीमारी को रोकता है। वहीं, १६-२४ महीने के बच्चे के टीके में एमआर – २, जेई-२, डीपीटी बूस्टर-१, ओपीवी बूस्टर होते हैं। ये बूस्टर टीके पहले दिए गए टीकों की सुरक्षा को और मजबूत करते हैं।

५-६ साल के बच्चे के टीके में डीपीटी बूस्टर-२ शामिल है, जो स्कूल जाने से पहले आवश्यक है। इसके अलावा, १० साल और १६ साल के बच्चों के लिए टिटनेस और डिप्थीरिया (टीडी) की एक-एक खुराक देना महत्वपूर्ण है। यह टेटनस और डिप्थीरिया से सुरक्षा करता है, जो घाव से हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह जरूरी है कि हम बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझें। समय पर टीकाकरण से न केवल बच्चों की जानें बचाई जा सकती हैं, बल्कि विभिन्न संक्रामक बीमारियों से भी सुरक्षा मिलती है। यह दिन हमें टीकाकरण के महत्व को समझने और इसे अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल वैक्सीनेशन डे क्यों मनाया जाता है?
यह दिन बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में टीकाकरण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने के लिए मनाया जाता है।
बच्चों को टीके कब लगवाने चाहिए?
बच्चों को सही उम्र और सही खुराक में टीके लगवाना आवश्यक है, जिससे वे कई घातक बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।
टीकाकरण के संभावित दुष्प्रभाव क्या हैं?
टीकाकरण के दुष्प्रभावों में दर्द, सूजन, हल्का बुखार और चिड़चिड़ापन शामिल हो सकते हैं, जो आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं।
पोलियो का टीका कब लगवाना चाहिए?
पोलियो का टीका ५ साल से कम उम्र के बच्चों को समय पर लगवाना चाहिए, ताकि वे इस घातक बीमारी से सुरक्षित रहें।
बच्चों के टीकाकरण के लिए कौन-कौन से टीके आवश्यक हैं?
बच्चों के लिए बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटावायरस, और खसरा-रूबेला जैसे टीके आवश्यक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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