महिला आरक्षण पर रजनी तिवारी का आह्वान: 'आधी आबादी को पूरा हक मिले', UP विधानसभा विशेष सत्र में उठाई आवाज़
सारांश
Key Takeaways
उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने 30 अप्रैल 2026 को लखनऊ में 18वीं विधानसभा के द्वितीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण के पक्ष में मुखर होते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को राजनीतिक भागीदारी में पूरा हक मिलना चाहिए। 'महिला सशक्तिकरण पर अनवरत चर्चा' विषय पर बोलते हुए उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया।
विशेष सत्र में मंत्री का वक्तव्य
रजनी तिवारी ने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं और अब संसद एवं विधानसभाओं में भी उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक आरक्षण महिला सशक्तिकरण की दिशा में अनिवार्य कदम है। उनके अनुसार, महिलाएं आज अपने अधिकारों के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक हैं।
सरकारी योजनाओं का उल्लेख
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कन्या सुमंगला योजना, स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण, शौचालय निर्माण और आवास योजनाओं का विशेष उल्लेख किया। रजनी तिवारी के अनुसार इन पहलों से महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकारात्मक बदलाव आया है।
सांस्कृतिक संदर्भ और नारी सम्मान
मंत्री ने भारतीय संस्कृति में नारी सम्मान की परंपरा को रेखांकित करते हुए संस्कृत श्लोक 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता' का उद्धरण दिया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा को आगे बढ़ाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस जारी है।
महिला आरक्षण विधेयक पर निराशा
रजनी तिवारी ने महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने पर अपनी पीड़ा साझा की। यह विधेयक संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण प्रदान करने का प्रावधान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि डबल इंजन सरकार की योजनाओं ने महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाया है, फिर भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अभी और प्रगति की आवश्यकता है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, पंचायत स्तर पर महिला आरक्षण की सफलता यह संकेत देती है कि संसदीय स्तर पर भी ऐसा प्रयोग सफल हो सकता है। रजनी तिवारी के इस वक्तव्य से उत्तर प्रदेश में महिला राजनीतिक भागीदारी की माँग एक बार फिर केंद्र में आ गई है और आने वाले समय में यह मुद्दा विधायी एजेंडे पर और अधिक प्रमुखता से उभरने की संभावना है।