भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि: यूएन रिपोर्ट में बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी, पीएम मोदी की खुशी
सारांश
Key Takeaways
- बाल मृत्यु दर में 70%25 की कमी आई है।
- भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
- दक्षिण एशिया में बच्चों की मृत्यु दर में सबसे तेज कमी हुई है।
- नवजात और पाँच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावी रहे हैं।
- यूएन ने भारत की सराहना की है।
नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में भारत में बाल मृत्यु दर में महत्वपूर्ण कमी देखने को मिली है। इस रिपोर्ट में भारत की उपलब्धियों की सराहना की गई है। वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पर अपनी खुशी जाहिर की है। पीएम मोदी ने लिखा कि यूएन की रिपोर्ट में बच्चों की मृत्यु में होने वाली कमी के लिए भारत की प्रशंसा की गई है।
संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्युदर अनुमान अंतर-एजेंसी समूह (यूएनआईजीएमई) की हालिया रिपोर्ट 2025 के अनुसार, बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में भारत ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस रिपोर्ट में नवजात और पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने के लिए देश की निरंतर प्रयासों पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इन प्रयासों ने एक मजबूत, केंद्र और राज्यों द्वारा संचालित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया है। भारत ने राष्ट्रीय दृष्टिकोण को मापने योग्य परिणामों में बदलने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।
नवजात शिशु मृत्यु दर में 70 फीसदी की गिरावट आई है, जो 1990 में 57 से घटकर 2024 में 17 हो गई है। वहीं, पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79 फीसदी की कमी देखी गई, जो 1990 में 127 से घटकर 2024 में 27 हो गई है।
पिछले दो दशकों में भारत ने दक्षिण एशिया में बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 1990 से पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में 76 फीसदी की कमी आई है। यह महत्वपूर्ण कमी मुख्यत: भारत जैसे देशों के कारण आई है, जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप, बेहतर डिलीवरी व्यवस्था और टीकाकरण में वृद्धि देखने को मिली है।
2000 में हर 1,000 जीवित जन्मों पर 92 मौतों की तुलना में 2024 में यह संख्या लगभग 32 हो गई है, जो बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार को दर्शाता है।
भारत की विशेष पहल ने निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्मजात समस्याओं जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करने में मदद की है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश बच्चों की मौतें रोकी या उनका इलाज किया जा सकता है। भारत में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम, संस्थान-आधारित नवजात देखभाल और नवजात व बचपन की बीमारियों के एकीकृत प्रबंधन के विस्तार से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल (एनआईसीयू) में सुधार ने भी सकारात्मक प्रभाव डाला है। दक्षिण एशिया में, 2000 से एनआईसीयू वाले बच्चों में मृत्यु दर में लगभग 60 फीसदी की कमी आई है।
हालांकि, दक्षिण एशिया में अभी भी पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 25 फीसदी मौतें होती हैं, लेकिन इस क्षेत्र ने विश्व स्तर पर सबसे तेज कमी दर्ज की है।