आईएमईसी की अहमियत साबित हुई: मध्य पूर्व तनाव से लॉजिस्टिक्स लागत 30% घटाने का रास्ता खुला
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) की रणनीतिक ज़रूरत को हॉर्मुज़ स्ट्रेट में बढ़े मध्य पूर्व तनाव ने एक बार फिर रेखांकित कर दिया है। हाल ही में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, पर्शियन गल्फ और रेड सी में समुद्री व्यापार में आई रुकावटों ने इस कॉरिडोर की आवश्यकता को सभी संबंधित पक्षों के लिए और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
आईएमईसी क्या है और इसकी परिकल्पना कैसी है
जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की पहल पर प्रस्तावित आईएमईसी को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के भारतीय विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इस कॉरिडोर की परिकल्पना बंदरगाहों, रेलवे, ऊर्जा अवसंरचना, फाइबर-ऑप्टिक केबल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के एक समन्वित तंत्र के रूप में की गई है, जो खाड़ी देशों और इज़रायल के माध्यम से भारत को यूरोप से जोड़ेगा।
इस मार्ग के तहत माल भारत से अरब प्रायद्वीप होते हुए, सऊदी अरब और जॉर्डन से गुज़रकर इज़रायल और फिर हाइफा बंदरगाह के रास्ते यूरोप तक पहुँचेगा। इस वैकल्पिक मार्ग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे इराक, सीरिया और लेबनान जैसे अस्थिर क्षेत्रों तथा संकरे और जोखिमपूर्ण समुद्री रास्तों से बचा जा सकता है।
मध्य पूर्व तनाव ने क्यों बढ़ाई आईएमईसी की प्रासंगिकता
रिपोर्टों के अनुसार, भले ही मध्य पूर्व के चल रहे संघर्ष के कारण आईएमईसी परियोजना फिलहाल ठहराव की स्थिति में है, लेकिन इसी तनाव ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि पारंपरिक समुद्री मार्गों पर निर्भरता कितनी जोखिमभरी है। हॉर्मुज़ स्ट्रेट में व्यवधान ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है और वैकल्पिक भू-समुद्री मार्गों की माँग को तेज़ किया है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार जगत पहले से ही लाल सागर में हूती हमलों के कारण शिपिंग मार्गों के पुनर्गठन पर विचार कर रहा है। गौरतलब है कि यह स्थिति आईएमईसी जैसे स्थल-आधारित कॉरिडोर के पक्ष में एक मज़बूत आर्थिक तर्क प्रस्तुत करती है।
लॉजिस्टिक्स लागत और समय में कितनी बचत संभव
हाल के अध्ययनों के हवाले से बताया गया है कि यदि यह कॉरिडोर पूरी तरह क्रियाशील हो जाता है, तो भारत और यूरोप के बीच परिवहन का समय 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत में करीब 30 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है।
व्यावहारिक दृष्टि से देखें तो एक मानक कंटेनर की शिपिंग लागत लगभग 6,000 डॉलर से घटकर 4,200 डॉलर के आसपास आ सकती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मात्र 15 लाख कंटेनर के सालाना मामूली ट्रैफिक पर भी केवल ढुलाई लागत में लगभग 2.7 अरब डॉलर की वार्षिक बचत संभव है।
इज़रायल और तकनीकी सहयोग की भूमिका
विश्लेषण के अनुसार, यदि इज़रायल को केंद्र में रखते हुए आईएमईसी सफलतापूर्वक क्रियान्वित होता है, तो हाइफा बंदरगाह पूर्वी भूमध्य सागर का प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र बन सकता है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, डिसेलिनेशन और ऊर्जा प्रौद्योगिकी में इज़रायल की विशेषज्ञता बेंगलुरु से बर्लिन तक फैली आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा बन सकती है।
यह न केवल व्यापार को गति देगा, बल्कि नए व्यावसायिक अवसरों के लिए एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र भी तैयार करेगा।
आगे की राह
आईएमईसी परियोजना की सफलता मध्य पूर्व में राजनीतिक स्थिरता और संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक सहमति पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने इस परियोजना को अस्थायी रूप से धीमा ज़रूर किया है, लेकिन इसकी आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट रूप से रेखांकित भी किया है।