आईएमईसी कॉरिडोर से भारत बनेगा वैश्विक ट्रांसशिपमेंट हब, निर्यात में 20% की उछाल: विशेषज्ञ
सारांश
मुख्य बातें
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईसी) और आधुनिक बंदरगाह अवसंरचना के दम पर भारत वैश्विक व्यापार एवं लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 24 अगस्त को उद्योग जगत, नीति विशेषज्ञों और व्यापार संगठनों ने एकमत से कहा कि बेहतर सड़क, रेल और जलमार्ग नेटवर्क के साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हो रहे सुधार देश के निर्यात को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँगे।
बुनियादी ढाँचे में बदलाव की तस्वीर
राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हाई-वे, रोड-वे, वॉटर-वे और अन्य बुनियादी ढाँचे का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उनके अनुसार, बंदरगाह अब व्यापार और लॉजिस्टिक्स की रीढ़ बन चुके हैं — माल की आवाजाही का समय घटा है और वेयरहाउसिंग सुविधाओं के ज़रिए सामान तेज़ी से व्यापारियों तक पहुँच रहा है।
सिंघी ने कहा, 'आने वाले समय में लॉजिस्टिक्स का समय और कम होगा क्योंकि सरकार लगातार सुधार लागू कर रही है। व्यापारियों के लिए 40,000 से अधिक अनुपालन समाप्त किए गए हैं और 'जन विश्वास विधेयक' के ज़रिए लगभग 1,000 ऐसे प्रावधान खत्म किए गए हैं, जिनके चलते कारोबारियों को अनावश्यक उत्पीड़न या जेल जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता था।'
आईएमईसी: ट्रांसशिपमेंट हब की नींव
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नेशनल प्रोग्राम डायरेक्टर और एनएचईवी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि आईएमईसी कॉरिडोर भारत को ट्रांसशिपमेंट हब बनाने की प्रधानमंत्री मोदी की दीर्घकालिक रणनीति का केंद्रीय स्तंभ है।
उन्होंने कहा, 'दुनिया की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है और भारत के पूर्वी तथा पश्चिमी तट इसमें निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं। जब यह कॉरिडोर दुबई के रास्ते यूरोप तक पहुँचेगा और कांडला, जेएनपीए तथा मुंद्रा जैसे प्रमुख भारतीय बंदरगाह जेबेल अली और अबू धाबी पोर्ट से जुड़ेंगे, तब भारत की ट्रांसशिपमेंट क्षमता और रणनीतिक महत्व काफी बढ़ जाएगा।'
अभिजीत सिंह ने यह भी स्वीकार किया कि भारत-मध्य पूर्व क्षेत्र में कुछ भू-राजनीतिक चुनौतियाँ हैं, जिनका समाधान कूटनीतिक स्तर पर किया जाना ज़रूरी है। उन्होंने सुझाया कि आईएमईसी का जो हिस्सा पहले से विकसित हो चुका है, उसे शीघ्र संचालित कर और मज़बूत बनाया जाए। गौरतलब है कि अब तक ट्रांसशिपमेंट का बड़ा हिस्सा श्रीलंका के पास रहा है, लेकिन भारत तेज़ी से अपनी स्थिति सुदृढ़ कर रहा है।
निर्यात में 20% की वृद्धि, विशेषज्ञ उत्साहित
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) की प्रोफेसर डॉ. सौमेन रॉय ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के निर्यात प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
उन्होंने कहा, 'पिछले छह महीनों के आँकड़ों पर नज़र डालें तो भारत के निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत अब चीन जैसे बाज़ारों में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात कर रहा है, जबकि सिंगापुर और अन्य देशों में भी भारतीय उत्पादों की माँग बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।'
डॉ. रॉय ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चुनौतियों, बढ़ते टैरिफ और वैश्विक व्यापारिक बाधाओं के बावजूद भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है — जो देश की आर्थिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को रेखांकित करता है।
डीप-टेक स्टार्टअप्स: विकास की अगली कहानी
नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने कहा कि भारत की भविष्य की वृद्धि का सबसे बड़ा आधार डीप-टेक स्टार्टअप्स बनने वाले हैं।
उन्होंने कहा, 'पिछले कई दशकों से हम छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए ऋण उपलब्धता की चर्चा करते आ रहे हैं। लेकिन भविष्य की असली कुंजी डीप-टेक स्टार्टअप्स में है। यही कंपनियाँ भविष्य में भारत को वैश्विक नवाचार शक्ति बना सकती हैं।' विरमानी ने स्पष्ट किया कि भारत के विकास की अगली कहानी केवल परंपरागत उद्योगों से नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और उन्नत स्टार्टअप्स से लिखी जाएगी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन के विकल्प के रूप में उभर रहा है और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। आईएमईसी के पूर्ण संचालन और बंदरगाह अवसंरचना के विस्तार के साथ, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अगले दशक में वैश्विक व्यापार मानचित्र पर अपनी स्थिति और मज़बूत करेगा।