क्या भारत 2035 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात कर सकता है?
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने 2035 तक निर्यात को 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
- सरकार ने 15 प्राथमिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर चुने हैं।
- उद्योगों का विश्वास बढ़ा है, 91 प्रतिशत कंपनियों ने उत्पादन स्थिति को बेहतर बताया है।
- रिपोर्ट में 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक वार्षिक कारोबार का उल्लेख है।
- औसत ब्याज दर 8.9 प्रतिशत रही है।
नई दिल्ली, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2035 तक अपने निर्यात को लगभग तीन गुना बढ़ाकर 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाने की योजना बना रहा है। इसके लिए सरकार ने संरचनात्मक सुधारों और नियमों को सरल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। सरकार अब भारी सरकारी खर्च पर निर्भर रहने के बजाय मैन्युफैक्चरिंग आधारित विकास को प्राथमिकता दे रही है।
यह रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने का तीसरा महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिससे देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने 15 प्राथमिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को चुना है, जिसमें हाई-एंड सेमीकंडक्टर, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स और लेदर जैसे श्रम आधारित उद्योग शामिल हैं।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि नियमों को सरल करने, कागजी काम को कम करने और व्यापार का माहौल बेहतर बनाने से कंपनियाँ अधिक उत्पादन कर सकेंगी, जिससे निवेश आएगा और भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।
यह नया प्रयास ऐसे समय में किया जा रहा है जब विश्व में अनिश्चितता बढ़ी है, फिर भी भारत को एक स्थिर विकास इंजन के रूप में देखा जा रहा है।
दुनियाभर में सप्लाई चेन पर दबाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत खुद को एक भरोसेमंद वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग देश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
हाल के आँकड़े दर्शाते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सरकार की नीतियों और सुधारों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसी) के नए सर्वे के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत के मैन्युफैक्चरिंग प्रदर्शन ने अब तक का सबसे ऊँचा स्तर छू लिया है और उद्योगों का विश्वास और भी मजबूत हुआ है।
फिक्की की तिमाही मैन्युफैक्चरिंग सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, 91 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनकी उत्पादन स्थिति बेहतर या स्थिर रही, जो पिछली तिमाही में 87 प्रतिशत थी।
उद्योगों का विश्वास भी बढ़ा है। 86 प्रतिशत कंपनियों को उम्मीद है कि उनके ऑर्डर पहले जैसे या उससे बेहतर रहेंगे। इसमें हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती का भी योगदान है।
इस सर्वे में शामिल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का वार्षिक कारोबार 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनियों की वित्तीय स्थिति सहायक बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए औसत ब्याज दर 8.9 प्रतिशत रही। लगभग 87 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उन्हें कामकाज और दीर्घकालिक जरूरतों के लिए बैंकों से पर्याप्त फंडिंग मिल रही है।