क्या ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आकर ईयू अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर विचार कर रहा है?

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क्या ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आकर ईयू अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर विचार कर रहा है?

सारांश

क्या ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स ने ईयू को अमेरिका से अपनी तकनीकी निर्भरता कम करने पर मजबूर किया है? जानिए इस मुद्दे की गहराई में जाकर।

Key Takeaways

  • डोनाल्ड ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स ने कई देश प्रभावित किए हैं।
  • यूरोपीय यूनियन अपनी तकनीकी निर्भरता कम करने पर विचार कर रहा है।
  • अमेरिका की क्लाउड सर्विसेज पर यूरोप की निर्भरता चिंताजनक है।
  • इसके परिणामस्वरूप नई तकनीकी रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है।
  • आगामी दशक में यूरोस्टैक के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी।

नई दिल्ली, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी शर्तों पर व्यापार करने के लिए टैरिफ के माध्यम से दबाव बना रहे हैं। ट्रंप लगातार विभिन्न देशों को टैरिफ की धमकियां दे रहे हैं। इस स्थिति के चलते यूरोपीय यूनियन सहित कई देशों ने अमेरिका से अपनी निर्भरता कम करने की योजनाओं पर विचार करना शुरू कर दिया है।

वर्तमान में, डिजिटल फ्रेमवर्क हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। डिजिटल क्षेत्र की अधिकांश कंपनियां अमेरिका की हैं। यदि यह फ्रेमवर्क क्षतिग्रस्त होता है, तो कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही वैश्विक राजनीति में तनाव उत्पन्न कर दिया है। कई देश राजनीति, व्यापार, और तकनीक के क्षेत्र में डायनेमिक्स चेंज करने पर विचार कर रहे हैं। ग्रीनलैंड के लिए ट्रंप की बार-बार की मांगों और टैरिफ की धमकियों ने ईयू को अपने पुराने साथियों के साथ संबंधों पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है।

यूरोप का अधिकांश डेटा अमेरिकी क्लाउड सर्विसेज पर संग्रहित होता है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों के पास यूरोप के दो-तिहाई से अधिक बाजार हिस्सेदारी है, जबकि ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी अमेरिकी एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अग्रणी हैं।

यूरोपीय संसद की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईयू 80 प्रतिशत से अधिक डिजिटल उत्पादों, सेवाओं, बुनियादी ढांचे और बौद्धिक संपत्ति के लिए गैर-ईयू देशों पर निर्भर है।

ईयू के कानून बनाने वाले अमेरिका के अलावा अन्य तकनीकी विकल्पों पर जोर दे रहे हैं। गूगल, ओपन एआई, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के स्थान पर अन्य स्रोतों या स्थानीय विकल्पों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

स्वीडन के राइज रिसर्च इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ शोधकर्ता और लुंड यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर जोहान लिनाकर के अनुसार, यूरोप की लापरवाही ने इसे इस स्तर पर पहुंचा दिया है कि इसका अधिकांश हिस्सा अमेरिका के बड़े टेक कंपनियों द्वारा प्रदान किए गए क्लाउड पर निर्भर हो गया है।

उन्होंने कहा, "सार्वजनिक क्षेत्र और सरकारें दशकों से एक कम्फर्ट सिंड्रोम से जूझ रही हैं। यहाँ पर कंजर्वेटिव प्रोक्योरमेंट कल्चर, जोखिम से बचने की आदत और स्थिर रहने की प्रवृत्ति रही है। अब स्थिति यह है कि भूराजनीतिक माहौल जोखिम का एक नया पहलू प्रस्तुत करता है, इनवोवेशन की कमी और बढ़ती लाइसेंस लागत से भी आगे।"

थिंक-टैंक बर्टेल्समैन स्टिफ्टंग का अनुमान है कि यूरोस्टैक को अपने लक्ष्य हासिल करने में लगभग एक दशक और 300 अरब यूरो की आवश्यकता होगी। अमेरिकी व्यापार समूह चैंबर ऑफ प्रोग्रेस (जिसमें अमेरिका की कई प्रमुख टेक कंपनियाँ शामिल हैं) के एक कम कंजर्वेटिव अनुमान के अनुसार, कुल लागत 5 ट्रिलियन यूरो से कहीं अधिक होगी।

Point of View

जब डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता वैश्विक राजनीति में दबाव बना रहे हैं, तो यह आवश्यक हो गया है कि यूरोपीय यूनियन अपनी निर्भरता को कम करे। यह निर्णय केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि तकनीकी स्वतंत्रता के लिए भी अहम है।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

यूरोपीय यूनियन अमेरिका से क्यों अपनी निर्भरता कम करना चाहता है?
यूरोपीय यूनियन अमेरिका के टैरिफ के दबाव से मुक्त होना चाहता है और अपनी तकनीकी स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना चाहता है।
क्या अमेरिका की क्लाउड सर्विसेज पर यूरोप की निर्भरता अधिक है?
जी हाँ, यूरोप का अधिकांश डेटा अमेरिका की क्लाउड सर्विसेज पर संग्रहित होता है, जो इसे कमजोर बनाता है।
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