7 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-साइप्रस शिखर वार्ता: IMEC की वैश्विक व्यापार क्षमता पर मोदी और क्रिस्टोडौलिडेस की सहमति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-साइप्रस शिखर वार्ता: IMEC की वैश्विक व्यापार क्षमता पर मोदी और क्रिस्टोडौलिडेस की सहमति

सारांश

नई दिल्ली में मोदी-क्रिस्टोडौलिडेस वार्ता सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं थी — IMEC को लेकर द्विपक्षीय कनेक्टिविटी डायलॉग की शुरुआत और संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत करना यह संकेत देता है कि भारत पूर्वी भूमध्यसागर को अपनी वैश्विक व्यापार रणनीति की धुरी बना रहा है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस ने 22 मई 2026 को नई दिल्ली में IMEC की वैश्विक व्यापार क्षमता पर चर्चा की।
दोनों देशों ने एक द्विपक्षीय कनेक्टिविटी डायलॉग की शुरुआत की।
भारत-साइप्रस संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया; कई MOU और समझौतों पर हस्ताक्षर।
IMEC में ईस्ट कॉरिडोर (भारत से खाड़ी) और नॉर्दर्न कॉरिडोर (खाड़ी से यूरोप) शामिल हैं।
2027 में भारत-साइप्रस कूटनीतिक संबंधों के 65 वर्ष पूरे होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस ने 22 मई 2026 को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता में भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की रणनीतिक संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। दोनों नेताओं ने माना कि IMEC में वैश्विक व्यापार, कनेक्टिविटी और समृद्धि को नया आकार देने की असाधारण क्षमता है।

मुख्य घटनाक्रम

राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित एक विशेष ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कनेक्टिविटी को यूरोपीय संघ (EU) और साइप्रस के साथ भारत के जुड़ाव का एक 'अनिवार्य पहलू' बताया। उन्होंने पुष्टि की कि दोनों देशों ने एक द्विपक्षीय कनेक्टिविटी डायलॉग की शुरुआत की है।

सिबी जॉर्ज ने कहा, 'आईएमईसी हमारे लिए एक बहुत ज़रूरी परियोजना है। दोनों नेताओं ने माना कि इसमें वैश्विक व्यापार, कनेक्टिविटी और खुशहाली को नया आकार देने और बढ़ावा देने की काबिलियत है। उन्होंने पूर्वी भूमध्यसागर और व्यापक मध्य-पूर्व में स्थिरता को बढ़ावा देने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।'

IMEC की संरचना और उद्देश्य

IMEC में दो प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं — ईस्ट कॉरिडोर जो भारत को खाड़ी देशों से जोड़ेगा, और नॉर्दर्न कॉरिडोर जो खाड़ी को यूरोप से जोड़ेगा। इस गलियारे का उद्देश्य कनेक्टिविटी बढ़ाना, दक्षता में सुधार करना, लागत घटाना, क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना, व्यापार पहुँच बढ़ाना और रोज़गार सृजन करना है। यह एशिया, यूरोप और मध्य-पूर्व के बीच एक परिवर्तनकारी एकीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा।

गौरतलब है कि सितंबर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित जी20 लीडर्स समिट के दौरान भारत, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इटली, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका ने IMEC को विकसित करने के लिए एक संयुक्त समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे। साइप्रस की भौगोलिक स्थिति — पूर्वी भूमध्यसागर में — इसे इस गलियारे के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाती है।

द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय

सिबी जॉर्ज ने राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस की इस यात्रा को भारत-साइप्रस संबंधों में 'एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर' करार दिया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत करने का निर्णय लिया। इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने कई सरकारी समझौता ज्ञापनों और अनुबंधों का आदान-प्रदान किया।

उल्लेखनीय है कि 2027 में भारत और साइप्रस के बीच कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के 65 वर्ष पूरे होंगे, जिसे दोनों देश विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाने की योजना बना रहे हैं।

आगे की राह

द्विपक्षीय कनेक्टिविटी डायलॉग की शुरुआत के साथ, भारत और साइप्रस के बीच IMEC के संदर्भ में बातचीत जारी रहने की उम्मीद है। सिबी जॉर्ज ने स्पष्ट किया कि यह संवाद न केवल साइप्रस, बल्कि EU और पूरे क्षेत्र के देशों के साथ भारत की व्यापक कनेक्टिविटी रणनीति का हिस्सा है। IMEC को लेकर बहुपक्षीय समन्वय की गति आने वाले महीनों में और तेज़ होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती ज़मीन पर क्रियान्वयन की है — 2023 के जी20 MOU के बाद से इस गलियारे पर ठोस प्रगति सीमित रही है और मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता ने इसकी गति को प्रभावित किया है। साइप्रस को इस वार्ता में शामिल करना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूर्वी भूमध्यसागर में उसकी स्थिति IMEC के यूरोपीय छोर के लिए अहम है। द्विपक्षीय कनेक्टिविटी डायलॉग एक सकारात्मक कदम है, परंतु इसके परिणाम तभी मापे जा सकेंगे जब ठोस बुनियादी ढाँचा निवेश और समयसीमा सामने आए।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IMEC क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?
IMEC यानी भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारा एक बहुपक्षीय कनेक्टिविटी परियोजना है, जिसे सितंबर 2023 के जी20 शिखर सम्मेलन में भारत, EU, अमेरिका और खाड़ी देशों ने मिलकर प्रस्तावित किया था। इसमें भारत को खाड़ी और यूरोप से जोड़ने वाले दो कॉरिडोर शामिल हैं।
मोदी और क्रिस्टोडौलिडेस की वार्ता में क्या निर्णय हुए?
दोनों नेताओं ने भारत-साइप्रस संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत करने का निर्णय लिया और एक द्विपक्षीय कनेक्टिविटी डायलॉग की शुरुआत की। इस यात्रा के दौरान कई सरकारी MOU और समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
साइप्रस IMEC के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
साइप्रस पूर्वी भूमध्यसागर में स्थित है, जो IMEC के नॉर्दर्न कॉरिडोर — खाड़ी से यूरोप तक — के मार्ग पर एक रणनीतिक पड़ाव है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, कनेक्टिविटी EU और इस क्षेत्र के देशों के साथ भारत के जुड़ाव का अनिवार्य पहलू है।
भारत और साइप्रस के कूटनीतिक संबंध कब से हैं?
भारत और साइप्रस के बीच कूटनीतिक संबंध 1960 के दशक में स्थापित हुए थे और 2027 में इनके 65 वर्ष पूरे होंगे। इस अवसर को दोनों देश विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाने की योजना बना रहे हैं।
IMEC से आम जनता और व्यापार को क्या फायदा होगा?
IMEC का उद्देश्य व्यापार लागत घटाना, आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना, रोज़गार सृजन करना और एशिया, मध्य-पूर्व व यूरोप के बीच व्यापार पहुँच बढ़ाना है। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाज़ारों तक तेज़ और सस्ती पहुँच मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 3 महीने पहले