भारत-EU साझेदारी अब रणनीतिक रिश्ते में बदल रही है: साइप्रस राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स
सारांश
मुख्य बातें
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स ने 22 मई 2025 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद स्पष्ट किया कि भारत-यूरोपीय संघ (EU) साझेदारी अब महज़ व्यापार और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह तेज़ी से एक व्यापक रणनीतिक रिश्ते का रूप ले रही है। बढ़ती वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के संदर्भ में उन्होंने दोनों पक्षों के बीच गहरे जुड़ाव की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
साझेदारी का नया स्वरूप
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने कहा, "यूरोपीय संघ और भारत के बीच साझेदारी और मज़बूत होनी चाहिए। यह रिश्ता अब सिर्फ अर्थव्यवस्था से नहीं चल रहा। यह तेज़ी से एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी बन रहा है, जो साझा हितों, साझा ज़िम्मेदारियों और स्थिरता, मज़बूती तथा समृद्धि के लिए एक समान प्रतिबद्धता पर आधारित है।"
उन्होंने रेखांकित किया कि यूरोप और भारत के पास सुरक्षा, व्यापार, तकनीक, नवाचार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के पर्याप्त कारण मौजूद हैं।
साइप्रस-भारत के ऐतिहासिक संबंध
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों को याद करते हुए कहा कि साइप्रस और भारत के रिश्ते साझा मूल्यों और ऐतिहासिक अनुभवों पर टिके हैं, और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क सदियों पुराना है। उन्होंने कहा कि ये संबंध स्वतंत्रता और लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए किए गए साझा संघर्षों से निर्मित हुए हैं।
उन्होंने आगे जोड़ा कि जैसे-जैसे दुनिया और अधिक बंटी हुई और जटिल होती जा रही है, इस साझेदारी को नए नज़रिए से देखने की ज़रूरत है, क्योंकि दोनों देशों को मिलकर बदलती दुनिया की चुनौतियों का सामना करना है।
EU अध्यक्षता में साइप्रस की प्राथमिकता
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ की अध्यक्षता के दौरान EU-भारत साझेदारी को मज़बूत करना साइप्रस की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि साइप्रस एक भरोसेमंद, स्थिर और विश्वसनीय सेतु की भूमिका निभाने में सक्षम है — जो EU, पूर्वी भूमध्यसागर और मध्य पूर्व के बड़े क्षेत्र के बीच एक पुल का काम कर सके।
IMEC को 'दूरदर्शी पहल' बताया
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का ज़िक्र करते हुए राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स ने इसे एक 'दूरदर्शी पहल' करार दिया। उन्होंने कहा, "मैं इसे एक बहुत ही दूरदर्शी पहल मानता हूँ, जो दिखाती है कि इंडो-पैसिफिक, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच भरोसेमंद कनेक्शन कितना ज़रूरी होता जा रहा है। और साइप्रस, जो तीन महाद्वीपों के चौराहे पर स्थित है और यूरोप का प्रवेश द्वार भी है, इस साझा विजन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच IMEC परियोजना की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। आने वाले महीनों में इस दिशा में ठोस कदमों की उम्मीद की जा रही है।