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भारत-साइप्रस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप घोषित, अगले 5 वर्षों में निवेश दोगुना करने का लक्ष्य

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भारत-साइप्रस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप घोषित, अगले 5 वर्षों में निवेश दोगुना करने का लक्ष्य

सारांश

भारत और साइप्रस ने 22 मई को अपने संबंधों को 'स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' तक उन्नत किया। एक दशक में निवेश पहले ही दोगुना हो चुका है — अब लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में इसे फिर दोगुना करने का है। भारत-EU FTA की पृष्ठभूमि में यह साझेदारी भारत की यूरोप-केंद्रित कूटनीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स ने 22 मई 2025 को हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की।
दोनों देशों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से 'स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया।
पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में निवेश लगभग दोगुना हो चुका है; अगले 5 वर्षों में इसे पुनः दोगुना करने का लक्ष्य।
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते को नई साझेदारी के लिए अनुकूल अवसर के रूप में रेखांकित किया गया।
दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों के समर्थन पर सहमति जताई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स ने 22 मई 2025 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की, जिसके बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से 'स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा दिया। इस ऐतिहासिक कदम के साथ दोनों पक्षों ने अगले पाँच वर्षों में द्विपक्षीय निवेश को दोगुना करने का संकल्प लिया।

बैठक का मुख्य घटनाक्रम

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स और उनके शिष्टमंडल का हैदराबाद हाउस में स्वागत किया। मोदी ने कहा, 'राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।' उन्होंने पिछले वर्ष साइप्रस दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ उन्हें साइप्रस के 'सर्वोच्च सम्मान' से नवाज़ा गया था, जो भारत के प्रति साइप्रस की गहरी आत्मीयता का प्रतीक है।

निवेश और आर्थिक साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में निवेश लगभग दोगुना हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपियन यूनियन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से नई संभावनाओं का द्वार खुला है, और इस अनुकूल माहौल का लाभ उठाते हुए दोनों देश अगले पाँच वर्षों में इस निवेश को पुनः दोगुना करने के लक्ष्य पर सहमत हुए हैं। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।

साझा मूल्य और वैश्विक मुद्दे

दोनों नेताओं ने लोकतंत्र, कानून के शासन और सभी देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई। मोदी ने कहा कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों की शीघ्र समाप्ति और शांति प्रयासों के लिए दोनों देश मिलकर काम करते रहेंगे। इसके अलावा दोनों पक्ष इस बात पर भी एकमत रहे कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में तत्काल सुधार आवश्यक है।

स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का महत्व

गौरतलब है कि भारत ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ इस स्तर की द्विपक्षीय साझेदारी सीमित संख्या में ही स्थापित की है। साइप्रस भूमध्य सागर में यूरोप और एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है, और यह साझेदारी भारत की यूरोप-केंद्रित कूटनीतिक पहुँच को और व्यापक बनाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस साझेदारी से दोनों देशों के संबंधों को 'नया एम्बिशन और नई स्पीड' मिलेगी।

आगे की राह

स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के ढाँचे के तहत व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क को प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है। भारत-EU FTA वार्ता की प्रगति के साथ यह साझेदारी और अधिक व्यावहारिक रूप लेती दिखेगी। दोनों देशों के बीच यह नया अध्याय द्विपक्षीय संबंधों को संस्थागत मज़बूती देने की दिशा में एक ठोस कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किस ढाँचे के तहत और किस सत्यापन तंत्र के साथ हासिल किया जाएगा — इसका विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। भारत-EU FTA अभी भी वार्ता के दौर में है, इसलिए उस पर आधारित संभावनाओं को साकार होने में समय लगेगा। यह साझेदारी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, पर इसकी व्यावहारिक सफलता क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-साइप्रस स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप क्या है?
यह 22 मई 2025 को नई दिल्ली में घोषित एक द्विपक्षीय ढाँचा है, जिसके तहत भारत और साइप्रस ने अपने संबंधों को 'स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक उन्नत किया है। इसमें व्यापार, निवेश, वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और लोगों के बीच संपर्क को प्राथमिकता दी गई है।
भारत और साइप्रस के बीच निवेश दोगुना करने का लक्ष्य क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में निवेश पहले ही लगभग दोगुना हो चुका है। अब दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में इस निवेश को फिर से दोगुना करने का लक्ष्य रखा है, जिसे भारत-EU FTA की संभावनाओं का लाभ उठाकर हासिल करने की योजना है।
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या था?
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिड्स की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम देने के लिए थी। इस दौरान दोनों देशों ने स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की, निवेश बढ़ाने पर सहमति बनाई और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण साझा किया।
भारत-साइप्रस संबंधों में यूक्रेन और पश्चिम एशिया का संदर्भ क्यों आया?
दोनों नेताओं ने वैश्विक संघर्षों पर अपना साझा रुख स्पष्ट किया। PM मोदी ने कहा कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति प्रयासों का दोनों देश समर्थन करते हैं। यह भारत की संतुलित विदेश नीति के अनुरूप है।
भारत-EU FTA का इस साझेदारी से क्या संबंध है?
साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य देश है। PM मोदी ने कहा कि भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते से बनी नई संभावनाओं का लाभ उठाते हुए दोनों देश निवेश दोगुना करने का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। FTA के लागू होने पर यह साझेदारी और अधिक व्यावहारिक रूप लेगी।
राष्ट्र प्रेस
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