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साइप्रस राष्ट्रपति की भारत यात्रा संपन्न, दोनों देशों के बीच 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' की ऐतिहासिक घोषणा

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साइप्रस राष्ट्रपति की भारत यात्रा संपन्न, दोनों देशों के बीच 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' की ऐतिहासिक घोषणा

सारांश

चार दिनों की यात्रा में भारत और साइप्रस ने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' तक उठाया — आतंकवाद-निरोध समूह, UPI का साइप्रस में विस्तार, और IMEC पर सहयोग। यह भूमध्यसागर में भारत की बढ़ती कूटनीतिक पहुँच का संकेत है।

मुख्य बातें

साइप्रस राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स की 20-23 मई 2026 की भारत यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
भारत और साइप्रस ने द्विपक्षीय संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक उन्नत किया।
आतंकवाद-निरोध पर संयुक्त कार्यकारी समूह (जेडब्ल्यूजी) बनाने पर सहमति बनी।
भारत का UPI अगले वर्ष से साइप्रस में चालू होगा — यूरोप में डिजिटल भुगतान का नया विस्तार।
अगले पाँच वर्षों में दोनों देशों के बीच निवेश को दोगुना करने का लक्ष्य।
IMEC के तहत द्विपक्षीय कनेक्टिविटी डायलॉग शुरू करने पर भी सहमति।

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स की 20 से 23 मई 2026 तक की भारत यात्रा शनिवार को संपन्न हुई, जिसके दौरान नई दिल्ली और निकोसिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक उन्नत करने की घोषणा की। कूटनीति, व्यापार, शिक्षा और सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

यात्रा का समापन और विदाई

यात्रा के समापन पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'एक सफल और सार्थक यात्रा का समापन हुआ। राजकीय यात्रा के बाद राष्ट्रपति नई दिल्ली से रवाना हुए।' राष्ट्रपति क्रिस्टोडुलाइड्स को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने विदाई दी।

यात्रा के दौरान एक यादगार पल भी देखने को मिला, जब राष्ट्रपति क्रिस्टोडुलाइड्स और प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद हाउस में एक साथ सेल्फी ली। इस तस्वीर को साझा करते हुए क्रिस्टोडुलाइड्स ने प्रधानमंत्री मोदी को 'प्रिय मित्र नरेंद्र' कहते हुए भारत की आतिथ्य-भावना के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

मुख्य समझौते और उपलब्धियाँ

नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों को देखते हुए संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' में बदलने का निर्णय लिया गया है। मोदी ने भारत-साइप्रस साझेदारी को मजबूत और भविष्य-उन्मुख बताया, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता से निकले प्रमुख परिणामों में आतंकवाद-निरोध (काउंटर-टेररिज्म) पर एक संयुक्त कार्यकारी समूह (जेडब्ल्यूजी) की स्थापना पर सहमति, सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस और साइप्रस की डिप्लोमैटिक एकेडमी के बीच सहयोग, तथा उच्च शिक्षा और अनुसंधान में द्विपक्षीय सहयोग शामिल हैं। इसके अलावा, दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में आपसी निवेश को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

आईएमईसी और कनेक्टिविटी पर जोर

वार्ता में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEС) की वैश्विक व्यापार और कनेक्टिविटी को नया आकार देने की क्षमता पर विस्तृत चर्चा हुई। आईएमईसी में दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं — ईस्ट कॉरिडोर भारत को खाड़ी देशों से जोड़ेगा, जबकि नॉर्दर्न कॉरिडोर खाड़ी को यूरोप से जोड़ेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वी भूमध्यसागर और व्यापक मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देने और एशिया, यूरोप एवं मध्य-पूर्व के बीच परिवर्तनकारी एकीकरण की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई। इस संदर्भ में द्विपक्षीय कनेक्टिविटी डायलॉग शुरू करने पर भी सहमति बनी।

डिजिटल भुगतान का विस्तार

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अगले वर्ष से साइप्रस में परिचालन शुरू कर देगा। यह यूरोप में भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र का एक और महत्वपूर्ण विस्तार होगा। गौरतलब है कि भारत पहले से ही कई देशों में UPI की पहुँच बढ़ा चुका है, और साइप्रस इस सूची में शामिल होने वाला नया यूरोपीय देश बनेगा।

आगे क्या

स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की यह घोषणा भारत-साइप्रस संबंधों को संस्थागत ढाँचा देने की दिशा में एक ठोस कदम है। आतंकवाद-निरोध जेडब्ल्यूजी के गठन, UPI के साइप्रस में विस्तार और निवेश दोगुना करने के लक्ष्य के साथ, दोनों देशों के बीच सहयोग का एजेंडा अब पहले से कहीं अधिक विस्तृत और ठोस है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन घोषणाओं को किस गति से क्रियान्वित किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी इसके क्रियान्वयन की गति होगी। IMEC अभी भी मुख्यतः एक अवधारणा है जिसे पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक जटिलताओं के बीच ठोस आकार देना बाकी है। UPI का साइप्रस में विस्तार एक मूर्त उपलब्धि है, परंतु निवेश दोगुना करने जैसे लक्ष्यों के लिए कोई सत्यापन-योग्य समयसीमा या तंत्र सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया गया। भारत की भूमध्यसागरीय कूटनीति में साइप्रस एक महत्वपूर्ण प्रवेश-द्वार हो सकता है, बशर्ते इन घोषणाओं को संस्थागत ढाँचे में बदला जाए।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और साइप्रस के बीच 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का क्या अर्थ है?
स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का अर्थ है कि दोनों देश अब केवल व्यापारिक संबंधों से आगे बढ़कर कूटनीति, सुरक्षा, शिक्षा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में संरचनात्मक सहयोग करेंगे। इसमें आतंकवाद-निरोध पर संयुक्त कार्यकारी समूह और IMEC पर द्विपक्षीय संवाद जैसे ठोस तंत्र शामिल हैं।
साइप्रस में UPI कब से शुरू होगा?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत का UPI अगले वर्ष से साइप्रस में चालू होने की उम्मीद है। यह यूरोप में भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र का एक और महत्वपूर्ण विस्तार होगा।
IMEC में साइप्रस की क्या भूमिका होगी?
साइप्रस पूर्वी भूमध्यसागर में स्थित होने के कारण IMEC के नॉर्दर्न कॉरिडोर — जो खाड़ी देशों को यूरोप से जोड़ेगा — में एक रणनीतिक कड़ी बन सकता है। दोनों देशों ने इस संदर्भ में द्विपक्षीय कनेक्टिविटी डायलॉग शुरू करने पर सहमति जताई है।
राष्ट्रपति क्रिस्टोडुलाइड्स की यात्रा के दौरान कौन-से प्रमुख समझौते हुए?
यात्रा के दौरान आतंकवाद-निरोध पर संयुक्त कार्यकारी समूह (जेडब्ल्यूजी) बनाने पर सहमति, सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस और साइप्रस की डिप्लोमैटिक एकेडमी के बीच सहयोग, उच्च शिक्षा-अनुसंधान में सहयोग, और UPI के साइप्रस विस्तार की घोषणा प्रमुख परिणाम रहे।
भारत-साइप्रस के बीच निवेश का क्या लक्ष्य रखा गया है?
दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में आपसी निवेश को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालाँकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोई विस्तृत रोडमैप या सत्यापन तंत्र अभी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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