24 जुलाई 2026
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आईएमईसी को अमेरिकी कांग्रेस का द्विदलीय समर्थन, विशेषज्ञों ने बताया चीन के BRI का सबसे बड़ा विकल्प

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आईएमईसी को अमेरिकी कांग्रेस का द्विदलीय समर्थन, विशेषज्ञों ने बताया चीन के BRI का सबसे बड़ा विकल्प

सारांश

अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में आईएमईसी को BRI के सबसे ठोस जवाब के रूप में पेश किया गया — भारत-यूरोप ट्रांजिट में 51% की कटौती और पश्चिम एशिया में नई आर्थिक धुरी बनाने का दावा। लेकिन सऊदी-इज़रायल की खाई और इज़रायल को बाहर करने की कोशिशें इस महत्वाकांक्षी परियोजना की राह में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

मुख्य बातें

अमेरिकी कांग्रेस की प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की उपसमिति ने 24 जुलाई को आईएमईसी पर द्विदलीय समर्थन व्यक्त किया।
विशेषज्ञ आशेर फ्रेडमैन ने कहा कि आईएमईसी भारत-यूरोप ट्रांजिट समय 51% तक घटा सकता है।
पूर्व राजदूत डैनियल शापिरो ने होर्मुज स्ट्रेट में बार-बार की रुकावटों को वैकल्पिक मार्गों की ज़रूरत का प्रमाण बताया।
चेयरमैन माइक लॉलर ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर इज़रायल को आईएमईसी में बनाए रखने की माँग की।
फ्रेडमैन ने माना कि सऊदी अरब अभी भी इज़रायल से जुड़े सामान को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं देता।
भारत के लिए आईएमईसी यूरोपीय बाज़ार तक पहुँच और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख स्तंभ माना जा रहा है।

अमेरिकी कांग्रेस की प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की उपसमिति (मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका) ने 24 जुलाई को अब्राहम समझौतों के भविष्य पर आयोजित सुनवाई में प्रस्तावित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) को दोनों प्रमुख दलों का ज़ोरदार समर्थन मिला। विशेषज्ञों और नीति विश्लेषकों ने इस गलियारे को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के सबसे प्रभावी रणनीतिक विकल्प के रूप में रेखांकित किया। यह परियोजना भारत और यूरोप के बीच पारगमन समय को 51 प्रतिशत तक कम करने की क्षमता रखती है।

सुनवाई में क्या उभरा

सुनवाई में गवाही देने वाले विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि आईएमईसी को केवल एक अवधारणा तक सीमित रखने के बजाय अमेरिका को इसे ज़मीन पर उतारने के लिए कहीं अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। मिसगाव इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी के कार्यकारी निदेशक और द हेरिटेज फाउंडेशन में विजिटिंग फेलो आशेर फ्रेडमैन ने इस परियोजना को “इस पीढ़ी की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक” करार दिया।

फ्रेडमैन ने सांसदों से कहा, “आईएमईसी इस पीढ़ी की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक बन सकता है। इससे भारत और यूरोप के बीच ट्रांजिट समय लगभग 51 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह पूर्व-पश्चिम रणनीतिक प्राकृतिक गैस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देगा तथा अमेरिका समर्थित आर्थिक विकास क्षेत्र तैयार करेगा, जो चीन की BRI का एक प्रभावी विकल्प बन सकता है।”

अमेरिका से ठोस कदमों की माँग

फ्रेडमैन ने अमेरिकी कांग्रेस से आग्रह किया कि वह अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोग और वाणिज्य विभाग को आईएमईसी के आर्थिक प्रभाव का अध्ययन करने और एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने का निर्देश दे। उन्होंने निवेश के अवसरों, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं और भारत से यूरोप तक सामान की निर्बाध आवाजाही के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के सामंजस्य की भी वकालत की।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिका आईएमईसी नेताओं का एक मंच (लीडर्स फोरम) आयोजित करे और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी सचिवालय की स्थापना करे।

होर्मुज संकट ने बढ़ाई प्रासंगिकता

इज़रायल में अमेरिका के पूर्व राजदूत डैनियल शापिरो ने कहा कि आईएमईसी अब्राहम समझौतों के बाद उभरी प्रमुख क्षेत्रीय पहलों में से एक है और पश्चिम एशिया में हालिया अस्थिरता के बावजूद इसका रणनीतिक महत्व बना हुआ है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में मार्च से बार-बार आ रही रुकावटों का हवाला देते हुए कहा कि ये घटनाएँ वैकल्पिक ऊर्जा और व्यापार मार्गों की ज़रूरत को और स्पष्ट कर देती हैं।

शापिरो ने कहा, “मार्च से होर्मुज स्ट्रेट के बार-बार बंद होने की घटनाएँ वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों और विस्तारित बुनियादी ढाँचे की अहमियत को रेखांकित करती हैं। यह आईएमईसी और इसी तरह की पहलों का प्रमुख आधार है और इससे इस गलियारे के बुनियादी ढाँचे में निकट भविष्य में निवेश और उस पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता और बढ़ जाती है।”

इज़रायल की भूमिका पर विवाद

उपसमिति के चेयरमैन माइक लॉलर ने उन प्रस्तावों के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी जो इज़रायल को इस परियोजना से बाहर कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “हाल की रिपोर्टिंग से पता चलता है कि कुछ अधिकारी भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे को विकसित करने के मौजूदा योजना से इज़रायल को हटाने का प्रस्ताव दे रहे हैं।” लॉलर ने यह भी बताया कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि इज़रायल आईएमईसी पहल का हिस्सा बना रहे।

इज़रायल में अमेरिका के पूर्व राजदूत डेविड फ्राइडमैन ने कहा कि आईएमईसी जैसी संपर्क परियोजनाएँ एक अधिक शांतिपूर्ण और सहयोगी मध्य पूर्व के निर्माण के लिए बेहद ज़रूरी हैं। उन्होंने कहा, “अधिकांश मामलों में शांति की नींव आर्थिक समृद्धि से ही पड़ती है।”

राजनीतिक बाधाएँ और भारत की हिस्सेदारी

आशेर फ्रेडमैन ने स्वीकार किया कि आईएमईसी के पूरी तरह क्रियान्वित होने से पहले कई राजनीतिक अड़चनें दूर करनी होंगी। उन्होंने कहा, “आज भी सऊदी अरब इज़रायल से आने वाले या इज़रायल जाने वाले सामान को अपने इलाके से गुजरने नहीं देगा।” हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब का ‘ग्लोबल लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन हब’ बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य आखिरकार इन रुकावटों को दूर करने में सहायक हो सकता है।

भारत के लिए, आईएमईसी एक प्रमुख रणनीतिक संपर्क परियोजना मानी जाती है जो यूरोपीय बाज़ार तक शिपिंग समय में उल्लेखनीय कटौती कर सकती है, आपूर्ति श्रृंखला को विविध बना सकती है और पश्चिम एशिया तथा यूरोप के साथ आर्थिक संबंधों को मज़बूत कर सकती है। यह बढ़ती भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का एक अहम स्तंभ भी बन चुकी है और इसे चीन की BRI के नियम-आधारित विकल्प के रूप में व्यापक रूप से देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गाज़ा संघर्ष के बाद से व्यावहारिक प्रगति लगभग ठहरी हुई है। सुनवाई में जो सबसे अहम तथ्य उभरा वह यह है कि सऊदी अरब आज भी इज़रायली सामान को अपनी ज़मीन से गुजरने नहीं देता — यानी गलियारे की सबसे ज़रूरी कड़ी अभी भी टूटी हुई है। द्विदलीय समर्थन और विशेषज्ञ गवाहियाँ प्रभावशाली हैं, पर जब तक सऊदी-इज़रायल सामान्यीकरण की कोई ठोस समयसीमा नहीं बनती, तब तक आईएमईसी एक महत्वाकांक्षी नक्शे से आगे नहीं बढ़ सकता।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएमईसी (IMEC) क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
आईएमईसी यानी भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा एक बहुदेशीय बुनियादी ढाँचा परियोजना है जो भारत को पश्चिम एशिया के रास्ते यूरोप से जोड़ेगी। यह परियोजना भारत-यूरोप ट्रांजिट समय को 51% तक घटाने, आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने और चीन की BRI के विकल्प के रूप में भारत की रणनीतिक स्थिति मज़बूत करने का लक्ष्य रखती है।
अमेरिकी कांग्रेस की सुनवाई में आईएमईसी पर क्या कहा गया?
24 जुलाई को हुई सुनवाई में विशेषज्ञों और सांसदों ने आईएमईसी को इस पीढ़ी की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना बताया। विशेषज्ञ आशेर फ्रेडमैन ने अमेरिका से आग्रह किया कि वह इसके आर्थिक प्रभाव का अध्ययन कराए, एक लीडर्स फोरम बुलाए और स्थायी सचिवालय स्थापित करे।
होर्मुज स्ट्रेट की रुकावटों का आईएमईसी से क्या संबंध है?
पूर्व राजदूत डैनियल शापिरो ने कहा कि मार्च से होर्मुज स्ट्रेट में बार-बार हुई रुकावटों ने वैकल्पिक ऊर्जा और व्यापार मार्गों की ज़रूरत को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। यही आईएमईसी जैसी परियोजनाओं की सबसे बड़ी रणनीतिक प्रासंगिकता है।
क्या इज़रायल को आईएमईसी से बाहर किया जा सकता है?
उपसमिति के चेयरमैन माइक लॉलर ने ऐसी किसी भी कोशिश का विरोध किया है और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर इज़रायल को परियोजना में बनाए रखने की माँग की है। हालाँकि, विशेषज्ञ आशेर फ्रेडमैन ने स्वीकार किया कि सऊदी अरब अभी भी इज़रायल से जुड़े सामान को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं देता।
आईएमईसी को ज़मीन पर उतारने में सबसे बड़ी बाधाएँ कौन-सी हैं?
सबसे बड़ी बाधा सऊदी अरब और इज़रायल के बीच अभी भी मौजूद व्यापारिक प्रतिबंध हैं। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता, निवेश के लिए व्यावहारिक रोडमैप की कमी और एक स्थायी समन्वय तंत्र का अभाव भी प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
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