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भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता लागू: निवेशकों को मिलेगा मजबूत संरक्षण, $80 करोड़ के निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

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भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता लागू: निवेशकों को मिलेगा मजबूत संरक्षण, $80 करोड़ के निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

सारांश

भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता महज एक कागज़ी दस्तावेज़ नहीं — यह दोनों देशों के $80 करोड़ डॉलर के निवेश संबंधों को नई कानूनी बुनियाद देने का प्रयास है। स्वतंत्र मध्यस्थता, पारदर्शिता और संप्रभु नीतिगत स्वायत्तता के बीच संतुलन इसे आधुनिक BIA का मॉडल बनाता है।

मुख्य बातें

भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) 5 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया।
समझौते पर 8 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इजरायली वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने हस्ताक्षर किए थे।
वर्तमान में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय निवेश लगभग $80 करोड़ डॉलर है।
समझौते में निवेशकों के लिए स्वतंत्र मध्यस्थता तंत्र , अधिग्रहण से सुरक्षा और उचित मुआवज़े की व्यवस्था शामिल।
फिनटेक, डिजिटल भुगतान, आधारभूत ढाँचा और वित्तीय नियमन में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

भारत और इजरायल के बीच 8 सितंबर 2025 को हस्ताक्षरित ऐतिहासिक द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) 5 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गया। नई दिल्ली में हुए इस समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मज़बूती देने और निवेशकों के लिए पारदर्शी, सुरक्षित तथा भरोसेमंद निवेश वातावरण तैयार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

समझौते में क्या है खास

वित्त मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह समझौता निवेश और निवेशकों को व्यापक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ सरकारों को सार्वजनिक हित में नीतिगत निर्णय लेने का पर्याप्त अधिकार और लचीलापन भी देता है। मंत्रालय के अनुसार, इसे अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के आधुनिक सिद्धांतों और विकसित हो रहे न्यायिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

समझौते में निवेश के अधिग्रहण से सुरक्षा, पारदर्शिता सुनिश्चित करना, निवेश से जुड़े धन का सुचारु हस्तांतरण और नुकसान की स्थिति में उचित मुआवजे की व्यवस्था शामिल है। इसके अतिरिक्त, विवादों के समाधान के लिए स्वतंत्र मध्यस्थता तंत्र और न्यूनतम स्तर का निवेश संरक्षण भी सुनिश्चित किया गया है।

दोनों देशों के वित्त मंत्रियों की प्रतिक्रिया

समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि दोनों देशों के उद्योग जगत को निवेश के नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए आपसी कारोबारी संपर्क बढ़ाने चाहिए। इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने कहा था कि सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बावजूद दोनों देशों ने मजबूत आर्थिक विकास हासिल किया है और यही समानता दोनों देशों को और करीब लाती है।

दोनों मंत्रियों ने फिनटेक नवाचार, आधारभूत ढाँचे के विकास, वित्तीय नियमन और डिजिटल भुगतान कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई थी।

आर्थिक असर और निवेश की संभावनाएँ

वर्तमान में भारत और इजरायल के बीच कुल द्विपक्षीय निवेश लगभग $80 करोड़ डॉलर का है। सरकार का अनुमान है कि इस समझौते के लागू होने से सीमा-पार निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय तेज़ी आएगी और आने वाले वर्षों में यह आँकड़ा और बढ़ेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और इजरायल तकनीक व रक्षा क्षेत्र में भारत का प्रमुख साझेदार बना हुआ है।

नियामकीय संतुलन और संप्रभु अधिकार

गौरतलब है कि इस समझौते में निवेशकों के हितों की रक्षा और सरकारों के नियामकीय अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि संप्रभु नीतिगत निर्णय प्रभावित न हों। यह आधुनिक BIA संरचना की एक विशेषता है, जो पुराने द्विपक्षीय निवेश संधियों (BIT) से अलग है — जिनमें अक्सर सरकारों की नीतिगत स्वायत्तता पर अंकुश लगने की आलोचना होती थी। आगे दोनों देशों की कंपनियों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए निवेश द्वार खुलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब विवाद मध्यस्थता की नौबत आएगी — और यह देखना होगा कि 'संप्रभु नीतिगत स्वायत्तता' की सुरक्षा कितनी व्यावहारिक साबित होती है। भारत के पुराने BIT अनुभव — जहाँ कई मामलों में भारत को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में भारी जुर्माना भरना पड़ा — इस नए ढाँचे की परिपक्वता को रेखांकित करते हैं। $80 करोड़ डॉलर का मौजूदा निवेश दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार को देखते हुए अभी बहुत सीमित है, और BIA के बाद इसमें वास्तविक वृद्धि तभी होगी जब ज़मीनी स्तर पर व्यापार सुगमता और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) क्या है?
यह भारत और इजरायल के बीच 8 सितंबर 2025 को हस्ताक्षरित और 5 जुलाई 2026 से लागू हुआ निवेश संरक्षण समझौता है, जो दोनों देशों के निवेशकों को कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता और विवाद समाधान के लिए स्वतंत्र मध्यस्थता की सुविधा देता है।
इस समझौते से निवेशकों को क्या फायदा होगा?
निवेशकों को अधिग्रहण से सुरक्षा, निवेश से जुड़े धन के सुचारु हस्तांतरण, नुकसान की स्थिति में उचित मुआवज़ा और विवाद समाधान के लिए स्वतंत्र मध्यस्थता का अधिकार मिलेगा। साथ ही, न्यूनतम स्तर का निवेश संरक्षण भी सुनिश्चित किया गया है।
भारत और इजरायल के बीच अभी कितना द्विपक्षीय निवेश है?
वर्तमान में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय निवेश लगभग $80 करोड़ डॉलर है। सरकार का अनुमान है कि BIA लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में यह आँकड़ा उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगा।
समझौते पर हस्ताक्षर किसने और कब किए?
8 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच की उपस्थिति में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
BIA में सरकारों के नीतिगत अधिकारों की क्या व्यवस्था है?
समझौते में निवेशकों के हितों और सरकारों के नियामकीय अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने का विशेष प्रावधान है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक हित में लिए गए संप्रभु नीतिगत निर्णय प्रभावित न हों।
राष्ट्र प्रेस
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