भारत-इजरायल FTA से व्यापार और हाई-टेक सहयोग को बड़ी उम्मीद: राजदूत रुवेन अजार
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने कहा है कि पिछले दो वर्षों में भारत-इजरायल संबंधों में असाधारण गति से विस्तार हुआ है और प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और निवेश सहयोग को नई ऊँचाई मिलने की उम्मीद है। नई दिल्ली में दिए एक विशेष साक्षात्कार में अजार ने रक्षा, कृषि, हाई-टेक और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी का ब्यौरा दिया।
व्यापार और एफटीए की संभावनाएँ
राजदूत अजार ने कहा, 'इजरायल ने अपने बाज़ार को पहले ही काफी हद तक खोल दिया है और दोनों देशों के बाज़ारों के आकार में बड़ा अंतर है। ऐसे में हाई-टेक क्षेत्र में सहयोग की काफी संभावनाएँ हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर और एफटीए का समापन इजरायली कंपनियों को भारत में निवेश के लिए सकारात्मक संकेत देगा। प्रस्तावित एफटीए केवल पारंपरिक व्यापार मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी सहयोग और निवेश को भी नया आयाम देगा।
रक्षा, कृषि और बुनियादी ढाँचे में साझेदारी
अजार ने बताया, 'रक्षा और कृषि में हमारा सहयोग बढ़ रहा है। हमने इजरायल में भारतीय कामगारों की संख्या दोगुनी कर दी है।' उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय कंपनियों को इजरायल की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं से जोड़ने और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर काम जारी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व शैली पर टिप्पणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए अजार ने कहा कि उन्होंने भारत के विकास में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। उन्होंने बुनियादी ढाँचे के विकास, आर्थिक वृद्धि, सुधारों और युवा पीढ़ी के सशक्तीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अब दुनिया के लिए पहले से अधिक खुला है। अजार के अनुसार, इजरायली संसद नेसेट में मोदी का भाषण उल्लेखनीय था और इजरायल के लोग उनका उतना ही सम्मान करते हैं जितना दुनिया के कई अन्य देशों में होता है।
पश्चिम एशिया संकट और ईरान पर इजरायल का रुख
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अजार ने ईरानी रणनीति की आलोचना की। उनके अनुसार, ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है, जो उनके शब्दों में 'बहुत अविवेकपूर्ण' कदम है। उन्होंने कहा कि कई देश अब होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक पाइपलाइन परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं — जिनमें इराक से तुर्की और सीरिया होते हुए भूमध्यसागर तक प्रस्तावित पाइपलाइन, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और इराक से यूएई तक प्रस्तावित पाइपलाइन शामिल हैं।
ईरान की सैन्य क्षमताओं के बारे में अजार ने दावा किया कि इजरायल ने ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुँचाया है और सैन्य उत्पादन क्षमता को भारी क्षति हुई है, हालाँकि उन्होंने माना कि भूमिगत सुरंगों में कुछ क्षमता अब भी मौजूद हो सकती है। उल्लेखनीय है कि ये दावे इजरायल के आधिकारिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
गाजा शांति और 'मुस्लिम नाटो' पर अजार का आकलन
गाजा शांति योजना पर अजार ने कहा कि इजरायल ने शांति प्रस्ताव को खारिज नहीं किया है और ट्रंप के पीस बोर्ड की योजना पर बातचीत जारी रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण के बिना इजरायल अपनी 'येलो लाइन' से पीछे नहीं हटेगा। अजार ने कहा कि इजरायल गाजा के लिए ऐसा भविष्य चाहता है जहाँ आतंकवाद का खतरा न हो और नई पीढ़ी को शांति के लिए तैयार करने वाली सरकार हो।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बढ़ते सहयोग को 'मुस्लिम नाटो' के रूप में देखे जाने पर अजार ने कहा कि यह आकलन फिलहाल बढ़ा-चढ़ाकर किया जा रहा है। उन्होंने सऊदी अरब और तुर्की के बीच पुराने मतभेदों का उल्लेख किया और कहा कि ईरान से बढ़ता खतरा इन दोनों देशों के सहयोग का प्रमुख कारण हो सकता है। उनके अनुसार, पिछले कई दशकों में क्षेत्र में कई संगठन बने हैं, परंतु अभी तक कोई भी नाटो जैसी क्षमता वाले संगठन में नहीं बदल सका। इजरायल की मौजूदा घरेलू स्थिति के बारे में अजार ने कहा कि देश इस समय स्थिर है और बेन गुरियन हवाईअड्डे से बड़ी संख्या में आवाजाही जारी है।