भारत-इजरायल संबंध: राजदूत रूवेन अजार ने गिनाए छह साझा मूल्य, बताया रिश्ते को असाधारण क्यों
सारांश
मुख्य बातें
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने 21 अगस्त 2026 को एक वीडियो संदेश में भारत-इजरायल संबंधों को परिभाषित करने वाले छह मूलभूत साझा मूल्यों का विस्तार से उल्लेख किया। यह बयान उस अवसर पर आया जब उन्होंने ग्रीस में नवनियुक्त इजरायली राजदूत पनिनत यानाय और भारतीय समकक्ष रवि शंकर के बीच हुई शिष्टाचार मुलाकात की पोस्ट को री-शेयर किया। अजार के अनुसार, दोनों देशों के बीच केवल साझा हित नहीं, बल्कि गहरे साझा मूल्य भी हैं — जो इस द्विपक्षीय संबंध को अन्य देशों के साथ इजरायल के रिश्तों से अलग और विशेष बनाते हैं।
पहला मूल्य: सभ्यतागत दृढ़ता और राष्ट्रीय पुनर्जागरण
राजदूत अजार ने कहा, 'सदियों तक हमारी सभ्यताओं को विदेशी शक्तियों के हमलों का सामना करना पड़ा। हमारी पहचान को निशाना बनाया गया और इतिहास के विभिन्न दौर में हमें हमारी पहचान से वंचित करने के प्रयास किए गए। लेकिन हजारों वर्षों में झेली गई तमाम कठिनाइयों के बावजूद हम जीवित रहे और हमारी पहचान भी कायम रही।' उन्होंने इसे भारत और इजरायल को एक-दूसरे से जोड़ने वाला सबसे बुनियादी सूत्र बताया — दोनों आधुनिक राष्ट्र हैं जो अपनी व्यक्तिगत और राष्ट्रीय पहचान को पुनर्जीवित और सुदृढ़ कर रहे हैं।
दूसरा और तीसरा मूल्य: आतंकवाद-विरोध और लोकतंत्र
अजार ने कहा कि दुनिया भर में उग्रवाद की लहर, विशेष रूप से कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद, दोनों देशों के लिए गंभीर खतरा है। उनके अनुसार, दशकों से इजरायल और भारत ने इस खतरे से निपटने के लिए आवश्यक क्षमताओं और साधनों को मिलकर विकसित किया है। तीसरे मूल्य के रूप में उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, उद्यमिता की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्र सोच की भावना हमारे दोनों देशों की व्यवस्थाओं में गहराई से समाहित है।'
चौथा मूल्य: नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता
अजार के अनुसार, इजरायल और भारत दोनों ही नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम सभी समझते हैं कि जिस जीवन स्तर को हम हासिल करना चाहते हैं, उसके लिए केवल स्वतंत्रता ही पर्याप्त नहीं है। हमें नवाचार करने और दुनिया को बेहतर बनाने की क्षमता भी चाहिए।' दोनों देश मिलकर अधिक प्रतिस्पर्धी वातावरण तैयार करने के लिए कार्यरत हैं।
पाँचवाँ और छठा मूल्य: सहिष्णुता और समावेशी विकास
अजार ने पाँचवें मूल्य के रूप में सहिष्णुता और आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यहूदी समुदाय सदियों से भारत में शांतिपूर्वक रह रहा है और इस देश में कभी यहूदी-विरोधी भावना नहीं रही। यह साझा विरासत केवल समुदायों के सह-अस्तित्व तक सीमित नहीं, बल्कि दोनों देशों में धार्मिक स्वतंत्रता और दूसरे धर्मों को स्वीकार करने की गहरी परंपरा का प्रतिबिंब है। छठे और अंतिम मूल्य — निरंतर और समावेशी विकास — के अंतर्गत उन्होंने कहा कि दोनों देश यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं कि अवसरों की कमी, अलगाव या शारीरिक-मानसिक अक्षमता के कारण पीछे रह गए लोगों को भी अर्थव्यवस्था और समाज में समान भागीदारी मिले।
राजदूत का निष्कर्ष: साझा मूल्यों को ठोस पहलों में बदलने की जरूरत
अपने संदेश के अंत में रूवेन अजार ने कहा, 'कई अन्य देशों के साथ हमारे साझा हित हो सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि हमारे साझा मूल्य भी हों। भारत के साथ इजरायल इन मूलभूत मूल्यों को साझा करता है।' उन्होंने इन साझा मूल्यों को केवल विचार-विमर्श तक सीमित न रखते हुए ठोस पहलों और सार्थक परिणामों में बदलने के लिए निवेश की आवश्यकता पर बल दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-इजरायल रक्षा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्रों में सहयोग लगातार गहरा हो रहा है।