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भारत-इजरायल साझेदारी छह साझा मूल्यों पर टिकी है: राजदूत रियूवेन अजार

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भारत-इजरायल साझेदारी छह साझा मूल्यों पर टिकी है: राजदूत रियूवेन अजार

सारांश

इजरायली राजदूत रियूवेन अजार ने एक्स पर साझा वीडियो में कहा कि भारत-इजरायल साझेदारी छह मूल्यों — सभ्यतागत लचीलापन, आतंकवाद-विरोध, लोकतंत्र, नवाचार, धार्मिक सहिष्णुता और समावेशी विकास — पर टिकी है। उनके अनुसार ये मूल्य इजरायल केवल भारत के साथ साझा करता है।

मुख्य बातें

इजरायली राजदूत रियूवेन अजार ने 26 मई को एक्स पर वीडियो संदेश में भारत-इजरायल संबंधों को छह साझा मूल्यों पर आधारित बताया।
पहला मूल्य: सभ्यतागत लचीलापन और राष्ट्रीय पुनरुत्थान — दोनों देशों ने ऐतिहासिक हमलों के बावजूद अपनी पहचान बचाई।
दूसरा मूल्य: आतंकवाद-विरोध — दोनों देश दशकों से कट्टरपंथ के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं।
तीसरा से छठा मूल्य: लोकतांत्रिक शासन, नवाचार, धार्मिक सहिष्णुता और समावेशी विकास ।
अजार ने कहा कि भारत में कभी यहूदी-विरोधी भावना नहीं रही और इजरायल ये मूल्य विशेष रूप से भारत के साथ साझा करता है।

भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने मंगलवार, 26 मई को कहा कि भारत-इजरायल द्विपक्षीय साझेदारी छह बुनियादी साझा मूल्यों पर आधारित है — सभ्यतागत लचीलापन, आतंकवाद-विरोध, लोकतांत्रिक आदर्श, नवाचार, धार्मिक सहिष्णुता और समावेशी विकास। अजार ने यह विचार एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में व्यक्त किए।

सभ्यतागत पहचान और राष्ट्रीय पुनरुत्थान

अजार ने कहा, 'इजरायल और भारत के बीच का संबंध बहुत खास और अनोखा है। जब मैंने इसके बारे में सोचा, तो मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि हमारे इतने शानदार संबंध का कारण छह मुख्य मूल्य हैं।' उन्होंने पहले मूल्य के रूप में सभ्यतागत मजबूती और राष्ट्रीय पुनरुत्थान को रेखांकित किया। उनके अनुसार, 'सदियों से हमारी सभ्यताओं पर विदेशी ताकतों ने हमला किया, हमारी पहचान को निशाना बनाया गया — लेकिन एक हजार साल से भी ज्यादा की मुश्किलों के बावजूद हम बचे रहे। हम दोनों आधुनिक देश हैं जो अपनी व्यक्तिगत और राष्ट्रीय पहचान को फिर से जीवंत कर रहे हैं।'

आतंकवाद-विरोध और सुरक्षा सहयोग

दूसरे मूल्य के रूप में अजार ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई को बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश दुनिया भर में कट्टरपंथ की बढ़ती लहर का सामना कर रहे हैं और इस खतरे से निपटने के लिए दशकों से मिलकर काम कर रहे हैं। तीसरे मूल्य के रूप में उन्होंने लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का उल्लेख किया। भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि बोलने की आजादी और उद्यमशीलता की स्वतंत्रता दोनों देशों की साझी विरासत है।

नवाचार, सहिष्णुता और समावेशी विकास

चौथे मूल्य — नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता — पर अजार ने कहा, 'इजरायल और भारत नवाचार के स्रोत रहे हैं। हम मिलकर एक अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल बनाने के लिए काम कर रहे हैं।' पाँचवें मूल्य के तहत उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता और आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत में यहूदी-विरोध (एंटी-सेमिटिज्म) का कोई इतिहास नहीं रहा है और कहा, 'यहूदियों ने हजारों सालों से भारत में बहुत आराम महसूस किया है।' छठे और अंतिम मूल्य के रूप में अजार ने समावेशी और सतत विकास का उल्लेख किया, जिसमें वंचित वर्गों, दिव्यांगजनों और अवसर से वंचित लोगों को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में शामिल करने पर जोर दिया।

साझेदारी में निवेश की जरूरत

अजार ने जोर देकर कहा कि इजरायल ये छह मूल्य विशेष रूप से भारत के साथ साझा करता है। उन्होंने कहा कि अब जब दोनों देश साथ काम करते हैं, तो इन मूल्यों को बढ़ावा देने पर ध्यान देना जरूरी है और इसके लिए केवल विचार-विमर्श नहीं, बल्कि ठोस निवेश भी आवश्यक है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-इजरायल संबंध रक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में लगातार गहरे हो रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी समय-सीमा पर ध्यान देना जरूरी है — यह वक्तव्य तब आया है जब गाजा संघर्ष को लेकर भारत की बहुपक्षीय स्थिति अंतरराष्ट्रीय दबाव में है। 'छह मूल्यों' की यह रूपरेखा एक सुविचारित कूटनीतिक आख्यान है जो भारत-इजरायल संबंधों को केवल हथियार व्यापार या रणनीतिक हित से परे एक सभ्यतागत गठजोड़ के रूप में प्रस्तुत करती है। आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि 'कट्टरपंथी इस्लाम' जैसे पदों का उपयोग द्विपक्षीय वार्ता में कितना उचित है। साझेदारी की गहराई असली है, लेकिन उसकी भाषा और फ्रेमिंग पर बहस स्वाभाविक है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इजरायली राजदूत रियूवेन अजार ने भारत-इजरायल साझेदारी के बारे में क्या कहा?
अजार ने कहा कि भारत-इजरायल साझेदारी छह मूल्यों — सभ्यतागत लचीलापन, आतंकवाद-विरोध, लोकतंत्र, नवाचार, धार्मिक सहिष्णुता और समावेशी विकास — पर आधारित है। उन्होंने यह बात 26 मई को एक्स पर साझा किए गए वीडियो संदेश में कही।
भारत-इजरायल संबंधों में आतंकवाद-विरोध सहयोग कितना पुराना है?
राजदूत अजार के अनुसार दोनों देश दशकों से आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं। यह सहयोग रक्षा तकनीक, खुफिया साझाकरण और सुरक्षा प्रशिक्षण के क्षेत्रों में विस्तृत है।
क्या भारत में यहूदी-विरोध का इतिहास रहा है?
इजरायली राजदूत अजार ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत में कभी यहूदी-विरोधी (एंटी-सेमिटिक) भावना नहीं रही। उन्होंने कहा कि यहूदी समुदाय ने हजारों वर्षों से भारत में सुरक्षित और सम्मानित जीवन जिया है।
भारत-इजरायल साझेदारी में नवाचार की क्या भूमिका है?
अजार ने कहा कि दोनों देश नवाचार के वैश्विक स्रोत रहे हैं और मिलकर एक अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। कृषि तकनीक, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग उल्लेखनीय रहा है।
राजदूत अजार ने साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए क्या जरूरी बताया?
अजार ने कहा कि इन छह मूल्यों को केवल विचार-विमर्श तक सीमित न रखते हुए उनमें ठोस निवेश करना जरूरी है। उनके अनुसार इजरायल ये मूल्य विशेष रूप से भारत के साथ साझा करता है और इस साझेदारी को और गहरा करने की जरूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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