भारत-इजरायल एफटीए बन सकता है आर्थिक गेमचेंजर, फ्रेंडशिप डे पर इजरायली दूतावास ने मनाई 34 साल की दोस्ती
सारांश
मुख्य बातें
भारत में इजरायली दूतावास ने 2 अगस्त 2025 को फ्रेंडशिप डे के अवसर पर दोनों देशों के बीच 34 वर्षों की मैत्री का जश्न मनाया। इसी बीच, भारत में इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि भारत-इजरायल मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए 'गेमचेंजर' साबित हो सकता है — और यह रिश्ता अब महज रणनीतिक सहयोग की सीमाएँ पार कर चुका है।
दूतावास का संदेश और साझा यादें
इजरायली दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा, 'हैप्पी फ्रेंडशिप डे, भारत! सबसे मजबूत दोस्ती भरोसे और हर मौसम में एक-दूसरे का साथ देने पर बनती है। आज, हम दोस्ती के 34 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं जिसने हमारे लोगों और देशों को एक-दूसरे के करीब ला दिया है। साथ में और भी कई पल बिताने के लिए शुभकामनाएं।'
दूतावास ने इस पोस्ट के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात की तस्वीरें भी साझा कीं, जो दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और कूटनीतिक निकटता को रेखांकित करती हैं।
एफटीए वार्ता में तेज़ी, दूसरा दौर पूरा
नवंबर 2025 में हस्ताक्षरित टर्म्स ऑफ रेफरेंस के तहत दोनों देशों के बीच 20 से 23 जुलाई तक नई दिल्ली में एफटीए वार्ता का दूसरा दौर आयोजित हुआ। इस वार्ता में भारत के वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भादू और इजरायल के विदेश व्यापार प्रशासन में वरिष्ठ निदेशक यिफत अलोन पेरेल ने नेतृत्व किया।
दोनों पक्षों ने एक संतुलित और परस्पर लाभकारी समझौते के प्रति साझा प्रतिबद्धता दर्शाई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वार्ता हाल के वर्षों में दोनों देशों के आपसी संबंधों में सबसे महत्त्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक है।
तीन दशकों की साझेदारी: रणनीति से आगे
पिछले तीन दशकों में भारत और इजरायल ने एक ऐसा रिश्ता बनाया है जो मुख्य रूप से रणनीतिक भरोसे पर टिका है। रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी अभियान, खुफिया सूचना साझाकरण और कृषि नवाचार इस परिपक्व साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक और सुरक्षा संबंध तो प्रगाढ़ हुए हैं, लेकिन आर्थिक संबंध अपनी पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुँच पाए हैं। राजदूत अजार के अनुसार, एफटीए इस अंतर को पाटने का सबसे ठोस अवसर है।
आगे की राह
एफटीए वार्ता के अगले चरण और इसके क्रियान्वयन की समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है। गौरतलब है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो यह भारत के बढ़ते वैश्विक व्यापार नेटवर्क में एक नया अध्याय जोड़ेगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक आदान-प्रदान को नई ऊँचाई देगा।