अलवर में सैकून खान की हत्या पर मीरवाइज उमर फारूक का दुख, गहन जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने राजस्थान के अलवर जिले में 40 वर्षीय सैकून खान की निर्मम हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए इस घटना को संप्रदाय-विशेष के प्रति नफरत से जोड़ते हुए मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की माँग की है। परिवार का आरोप है कि सैकून को उनकी मुस्लिम पहचान — दाढ़ी और टोपी — के कारण निशाना बनाया गया।
मुख्य घटनाक्रम
24 सितंबर 2026 की सुबह अलवर जिले के बरवास गाँव निवासी सैकून खान अपने बेटे को यह कहकर घर से निकले कि वह मोटरसाइकिल के लिए नया टायर खरीदकर खेत में प्याज की फसल की देखभाल करने लौटेंगे। वह एक अन्य ग्रामीण के साथ उसकी मोटरसाइकिल पर बड़ौदामेव बाज़ार गए थे।
कुछ घंटों बाद, बड़ौदामेव पुलिस स्टेशन के मुख्य द्वार के ठीक सामने एक व्यक्ति ने भारी पत्थर से सैकून के सिर पर वार कर दिया। सैकून मोटरसाइकिल सहित गिर गए और आरोपी ने एक नुकीला पत्थर उठाकर उन पर लगातार प्रहार किए, जिससे उनका सिर कुचल गया। पुलिस ने बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
परिवार के आरोप
सैकून खान के छोटे भाई इरशाद खान ने कहा, 'हमें नहीं पता कि मेरे भाई की हत्या क्यों की गई। उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। उनका एकमात्र गुनाह यह था कि उन्होंने दाढ़ी रखी थी और टोपी पहनी थी। हमें शक है कि उनकी हत्या इसलिए की गई क्योंकि उनके पहनावे से साफ था कि वह मुसलमान थे। पुलिस स्टेशन के बाहर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई और फिर भी एक भी पुलिसकर्मी उन्हें बचाने नहीं आया।'
सैकून खान के पिता नसरू खान ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि जब उनका बेटा बड़ौदामेव पुलिस स्टेशन के गेट के ठीक सामने पहुँचा, तभी अचानक एक व्यक्ति ने पत्थर से उनके सिर पर वार किया। सैकून गिर पड़े और उनके पैर मोटरसाइकिल के नीचे दब गए। इसके बाद हमलावर ने नुकीले पत्थर से लगातार वार करते हुए उनका सिर कुचल दिया।
मीरवाइज उमर फारूक की प्रतिक्रिया
मीरवाइज उमर फारूक ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह घटना 'दिल दहला देने वाली' है और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और मंत्रियों की अल्पसंख्यकों के विरुद्ध भड़काऊ टिप्पणियाँ सांप्रदायिक पूर्वाग्रह को 'सामान्य' बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि जब सार्वजनिक मंचों से बार-बार नफरत को वैधता मिलती है, तो उसके परिणाम सड़कों पर दिखाई देते हैं। मीरवाइज ने इस 'खतरनाक सामान्यीकरण' को तत्काल रोकने की माँग की। गौरतलब है कि उनके ये आरोप सत्तारूढ़ दल के खिलाफ हैं और राजनीतिक रूप से विवादास्पद हैं।
आम जनता पर असर
सैकून खान दो बेटियों और एक बेटे के पिता थे और बरवास गाँव में किसानी करते थे। उनकी मृत्यु से परिवार पर आजीविका का संकट आ खड़ा हुआ है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अल्पसंख्यकों के विरुद्ध कथित नफरती अपराधों को लेकर देशभर में बहस तेज़ है।
क्या होगा आगे
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जाँच जारी है। परिवार ने माँग की है कि हत्या के सांप्रदायिक पहलू की भी निष्पक्ष जाँच हो। मीरवाइज की माँग के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है और अब विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी अपेक्षित है।