क्या पाकिस्तान में हिंदू युवक की हत्या से अल्पसंख्यक समुदाय का गुस्सा फूटा?
सारांश
Key Takeaways
- कैलाश कोल्ही की हत्या ने अल्पसंख्यक समुदाय में गुस्सा पैदा किया है।
- प्रदर्शनकारी आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
- अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला एक गंभीर मुद्दा है।
- इस घटना ने सामाजिक सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू किसान कैलाश कोल्ही की हत्या की घटना की जानकारी सामने आई है। इस घटना के बाद से देशभर में अल्पसंख्यक समुदाय का गुस्सा उभर आया है। पाकिस्तान में हिंदू कैलाश कोल्ही के हत्यारों को सजा देने की मांग की जा रही है।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में कैलाश कोल्ही नामक किसान को इस सप्ताह की शुरुआत में उसके मकान मालिक ने गोली मारकर हत्या कर दी। आरोपी की पहचान सरफराज निजामानी के तौर पर हुई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी ने कैलाश कोल्ही के सीने में गोली मारी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हालाँकि, हत्या के पीछे का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
कई हिंदू अल्पसंख्यक और मानवाधिकार संगठनों ने सिंध में पाकिस्तान की केंद्रीय और स्थानीय सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया है। वे आरोपी की गिरफ्तारी और उसके खिलाफ हत्या एवं आतंकवाद के आरोपों के तहत मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
इन समूहों ने पीड़ित के परिवार के लिए सुरक्षा की भी मांग की है। प्रदर्शनकारी समूहों ने कहा, "जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे सिंध में आपातकालीन कदम उठाए जाने चाहिए।"
अल्पसंख्यक मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद के चेयरमैन शिवा कच्छी ने इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे एक बर्बर हत्या करार दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, "कैलाश कोल्ही का खून हम सभी से इंसाफ मांगता है। यह केवल एक इंसान की हत्या नहीं है, बल्कि सिंध में इंसानियत, इंसाफ और अल्पसंख्यकों के मूल अधिकारों पर हमला है। हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक दोषियों को कानून के सामने नहीं लाया जाता और इंसाफ नहीं मिलता।"
ज्ञात हो, कि कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने दिल्ली के तुर्कमान गेट क्षेत्र में मस्जिद के पास तोड़फोड़ की कार्रवाई के संदर्भ में बयान दिया था। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 14.2 प्रतिशत मुस्लिम अल्पसंख्यक के अधिकारों पर चर्चा करने वाले पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने 1.61 प्रतिशत पाक के हिंदुओं के अधिकारों को अनदेखा किया।