वंदे मातरम विवाद: संजय निरुपम का कांग्रेस पर हमला — 'स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 18 अगस्त को मुंबई में वंदे मातरम विवाद, महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता कानून और भारत निर्वाचन आयोग पर कांग्रेस को घेरते हुए तीखा प्रहार किया। निरुपम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस न केवल राष्ट्रगीत का, बल्कि उन स्वतंत्रता सेनानियों का भी अपमान कर रही है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया था। उन्होंने माँग की कि कांग्रेस इस मुद्दे पर देश से सार्वजनिक माफी माँगे।
वंदे मातरम विवाद और शिवसेना का रुख
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उस बयान का समर्थन करते हुए — जिसमें उन्होंने सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत वंदे मातरम से करने की बात कही थी — निरुपम ने स्पष्ट किया कि शिवसेना एक राष्ट्रवादी संगठन है। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत के पूर्ण गायन के साथ होगी, और यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम पूरा गाने से इनकार करता है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निरुपम ने गोवा में कांग्रेस के एक कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए, जहाँ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उपस्थिति में वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाए गए। उनका कहना था कि वंदे मातरम को कानूनी दर्जा प्राप्त है और इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सेनानियों का सबसे प्रमुख उद्घोष था।
महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता कानून पर निरुपम का पक्ष
महाराष्ट्र के धार्मिक स्वतंत्रता कानून के बारे में निरुपम ने कहा कि इसका उद्देश्य जबरदस्ती, दबाव या लालच के ज़रिए धर्म परिवर्तन कराने की गतिविधियों पर रोक लगाना है। उन्होंने बताया कि यह कानून आगामी रक्षाबंधन के दिन लागू होने जा रहा है।
निरुपम ने कानून के उस प्रावधान पर विशेष ज़ोर दिया जो कथित 'लव जिहाद' से जुड़े मामलों और महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित है। उनके अनुसार, कुछ मामलों में विवाह के नाम पर महिलाओं को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है और बाद में उन्हें छोड़ दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कानून में विवाह से जन्मे बच्चों के धर्म से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं और महाराष्ट्र की बेटियों की सुरक्षा के लिए यह कानूनी व्यवस्था ज़रूरी थी।
ट्रंप की टिप्पणी और निर्वाचन आयोग का बचाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत की चुनावी व्यवस्था और मतदाता पहचान को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए निरुपम ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से प्रेरणा ले रहे हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग को एक मज़बूत और सक्षम संवैधानिक संस्था बताया।
निरुपम ने उन विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधा जो चुनाव में हार के बाद निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं। उनका कहना था कि चुनाव आयोग पर आरोप लगाना केवल एक संस्था की आलोचना नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संस्था के सम्मान से जुड़ा विषय है।
आगे क्या
वंदे मातरम विवाद और महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता कानून दोनों मुद्दे राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में गर्म रहने की संभावना है। कांग्रेस की ओर से अभी तक निरुपम के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और यह देखना होगा कि पार्टी इस सियासी दबाव को किस तरह संभालती है।