वंदे मातरम विवाद: कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख हरिप्रसाद बोले— देशभक्ति को गाने से न जोड़ें, SC का रुख सही
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में सर्वोच्च न्यायालय के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि 'वंदे मातरम' न गाने पर किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। हरिप्रसाद ने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की पुष्टि करता है।
सर्वोच्च न्यायालय के बयान पर कांग्रेस का रुख
हरिप्रसाद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि अंतरात्मा की आज़ादी हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उनके अनुसार, अदालत का यह दृष्टिकोण लोकतांत्रिक और संवैधानिक सिद्धांतों की मज़बूती का एक और उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की वर्किंग कमेटी और कर्नाटक में पहले ही यह तय किया जा चुका था कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। पार्टी का इस मुद्दे पर रुख पहले से ही स्पष्ट है।
देशभक्ति और संवैधानिक स्वतंत्रता
हरिप्रसाद के अनुसार, देशभक्ति का अर्थ किसी को कोई विशेष गाना गाने के लिए बाध्य करना नहीं है। उनका कहना था कि इसका वास्तविक अर्थ संविधान, देश की विविधता और प्रत्येक नागरिक की अंतरात्मा की आज़ादी का सम्मान करना है।
उन्होंने याद दिलाया कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान राष्ट्रीय नेताओं ने वंदे मातरम पर गहन विमर्श किया था और एक ऐसा रास्ता निकाला था जो भारत की अनेकता का सम्मान करे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस ऐतिहासिक सहमति को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार ने लोगों पर आधिकारिक तौर पर सभी छह पद गाने का नया तंत्र थोप दिया है।
कर्नाटक विधानसभा में हुए विवाद पर निशाना
हरिप्रसाद ने कर्नाटक विधानसभा सत्र के दौरान उठे विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में केवल शुरुआती दो पद गाने के राज्य सरकार के निर्णय के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्यों ने विधानसभा में पूरा वर्जन गाने पर ज़ोर दिया।
जब सत्ताधारी पार्टी के सदस्य शुरुआती दो पदों के बाद रुककर संविधान की प्रस्तावना पढ़ने लगे, तो विपक्षी सदस्य पूरा गाना गाते रहे। हरिप्रसाद ने यह भी कहा कि पूरा वर्जन गाते समय BJP सदस्यों ने प्रिंटेड कॉपी का सहारा लिया, जिससे उनके गीत के बोल की जानकारी पर सवाल उठते हैं।
भाजपा पर राजनीतिक विरोधाभास का आरोप
हरिप्रसाद ने इस पूरे घटनाक्रम को BJP की 'राजनीतिक असंगति' करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने विधानसभा में पूरा 'वंदे मातरम' गाने पर इतना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया, उसके सदस्यों को गीत के बोल तक याद नहीं थे।
उनके शब्दों में, 'किसी गाने को राजनीतिक हथियार बनाना, जबकि खुद उसे ठीक से न गा पाना, शायद सबसे बड़ा राजनीतिक विरोधाभास है।' उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में जोड़ा कि सर्वोच्च न्यायालय के बयान के बाद BJP के वे सदस्य 'राहत की साँस ले सकते हैं' जो वंदे मातरम ठीक से नहीं गा पा रहे थे।
आगे का रुख
हरिप्रसाद ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस वंदे मातरम का विरोध नहीं करती, लेकिन गाने के सम्मान के नाम पर संविधान को दरकिनार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जैसे हर नागरिक को देश से प्यार करने का अधिकार है, वैसे ही हर नागरिक को अपनी अंतरात्मा के अनुसार चलने का भी अधिकार है। यह विवाद आगामी विधानसभा सत्रों में भी गूंजने की संभावना है।