वंदे मातरम विवाद: शिवसेना के संजय निरुपम ने कांग्रेस को बताया 'अंग्रेजों की कतार में'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 22 सितंबर 2026 को कर्नाटक विधानसभा एवं विधान परिषद में 'वंदे मातरम' के पूरे पद गाने को लेकर उठे विवाद पर कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया और कहा कि यह रवैया 'शर्मनाक' है। निरुपम ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय गीत का विरोध करने वालों की ऐतिहासिक कतार में अब कांग्रेस भी आ खड़ी हुई है।
मुख्य आरोप: 'अंग्रेजों जैसी मानसिकता'
निरुपम ने कहा, 'अंग्रेज 'वंदे मातरम' का विरोध करते थे, और देश में कुछ मुस्लिम समूहों ने इसका विरोध किया है। अब कांग्रेस पार्टी भी 'वंदे मातरम' का विरोध करने वालों की कतार में शामिल हो गई है।' उन्होंने कांग्रेस से स्पष्टीकरण की माँग करते हुए कहा कि पार्टी को बताना चाहिए कि उसे राष्ट्रीय गीत से क्या आपत्ति है।
शिवसेना नेता ने यह भी कहा कि 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा है और इसका विरोध भारत की संस्कृति एवं राष्ट्रीय भावना का अपमान है।
संसदीय कानून का हवाला
निरुपम ने कहा कि भारत में कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है और एक बार जब संसद 'वंदे मातरम' के संबंध में कोई कानून बना लेती है, तो देशभर की सभी राज्य सरकारों को उसका पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक दल को इस विषय में अपने अलग नियम बनाने पर जोर नहीं देना चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और विपक्षी दलों के बीच कई मुद्दों पर टकराव चल रहा है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय गीत की अनिवार्यता को लेकर समय-समय पर देशभर में बहस छिड़ती रही है।
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर खड़गे के बयान को बताया निराधार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की चुनाव आयोग की विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर की गई टिप्पणियों को भी निरुपम ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में कुछ भी गलत नहीं है और यह पुरानी मतदाता सूचियों को साफ करने और अपडेट करने का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।
निरुपम ने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में उपराष्ट्रपति, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और एलके आडवाणी सहित प्रमुख हस्तियों के नाम भी मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जब मतदाता सूची में करोड़ों नाम हों, तो ऐसी त्रुटियाँ स्वाभाविक हैं और उन्हें सुधारने की प्रक्रिया जारी है।
कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप
शिवसेना नेता ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी एसआईआर प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से एक 'राक्षसी कार्यक्रम' बताकर भ्रम फैला रही है। निरुपम ने चुनाव आयोग को एक संवैधानिक संस्था करार देते हुए कहा कि उस पर इस तरह के आरोप लोकतंत्र पर हमला है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी हार का दोष चुनाव आयोग पर मढ़ने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए।
आगे क्या
कर्नाटक विधानमंडल में 'वंदे मातरम' विवाद और एसआईआर प्रक्रिया पर छिड़ी बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, खासकर जब राज्य में विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सड़क और सदन दोनों में सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।