केरल आबकारी आयुक्त की रिपोर्ट में दो वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, विजिलेंस जांच की सिफारिश
सारांश
मुख्य बातें
केरल के पूर्व आबकारी आयुक्त एस. सांबाशिव राव ने अपने पद से स्थानांतरित किए जाने से ठीक पहले राज्य सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में आबकारी विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत विजिलेंस जांच की सिफारिश की गई है। 7 नवंबर 2026 को सामने आई यह रिपोर्ट तिरुवनंतपुरम में राजनीतिक हलचल का केंद्र बन गई है।
आरोपी अधिकारी और आरोपों का विवरण
रिपोर्ट में संयुक्त आबकारी आयुक्त एस. विनोद और उप आयुक्त अजय का नाम लिया गया है। इन दोनों पर बार मालिकों और शराब की दुकान के लाइसेंसधारियों से पैसे वसूलने, आधिकारिक कार्यों के लिए रिश्वत लेने, आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने और बेनामी लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, विनोद ने मुवत्तुपुझा के एक बार के मालिकों से करीबी संबंध बनाए और लाइसेंस से जुड़े मामलों में बिचौलिए की भूमिका निभाई। कथित तौर पर उन्होंने एक अनुमोदन के लिए बार मालिकों से ₹50,000 वसूले। आयुक्त ने विनोद के एक मित्र की स्वीकारोक्ति का भी हवाला दिया है, जिसके अनुसार अलप्पुझा में निरीक्षण यात्राओं के दौरान बार मालिकों ने उन्हें ₹30,000 दिए।
उप आयुक्त अजय पर कायमकुलम के कट्टाचिरा में एक बार के प्रबंधन से निरीक्षण यात्राओं और लाइसेंस नवीनीकरण के एवज में धनराशि वसूलने का आरोप है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अजय ने कोट्टायम में कार्यरत रहते हुए एक रिश्तेदार के नाम का उपयोग करके बार पट्टे पर लिए और खरीदे। उन पर बेनामी संपत्तियाँ रखने और परमिट वाली ताड़ी की बिक्री संचालित करने के आरोप भी हैं।
आबकारी मंत्री पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में आबकारी मंत्री एम. लिजू के कायमकुलम के एक बार मालिक से कथित करीबी संबंधों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि उस बार मालिक से सीधी पूछताछ की जाए तो वह भुगतान संबंधी जानकारी दे सकता है। यह आरोप राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील है, क्योंकि यह सरकार में एक मंत्री से सीधे जुड़ा है।
बार मालिकों पर दबाव और डर का माहौल
रिपोर्ट में बताया गया है कि बार मालिकों को अक्सर अपना व्यवसाय खोने के भय से अधिकारियों की माँगें मानने पर मजबूर किया जाता था। जो मालिक निरीक्षण में सहयोग करते थे, उन्हें प्रतिशोध का सामना करना पड़ा, जिससे अन्य लोग आगे आने से हतोत्साहित हुए। यह स्थिति व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
ट्रांसफर में अनियमितताएँ और सुधार की सिफारिशें
रिपोर्ट में स्थानांतरण प्रक्रिया में भी गड़बड़ी उजागर की गई है। आरोप है कि आयुक्त की मंजूरी के बिना 32 पोस्टिंग एकतरफा बदल दी गईं। सांबाशिव राव ने पारदर्शी ऑनलाइन ट्रांसफर प्रणाली लागू करने और संवेदनशील पदों पर नियुक्ति से पहले बैकग्राउंड चेक अनिवार्य करने की सिफारिश की है। उन्होंने दोनों आरोपी अधिकारियों को तत्काल फील्ड असाइनमेंट से हटाने और उनकी संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन तथा आधिकारिक पदों के कथित दुरुपयोग की विस्तृत जांच कराने की माँग की है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और व्यापक संदर्भ
यह रिपोर्ट सांबाशिव राव को आबकारी आयुक्त पद से हटाए जाने के एक दिन बाद सामने आई है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह केएसईबी अध्यक्ष और वरिष्ठ IAS अधिकारी राजमाणिकम को भी स्थानांतरित किया गया था। राज्य भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] सचिव एम.वी. गोविंदन ने कहा कि स्थानांतरण लागू होने के बाद अब चीजें बहुत स्पष्ट हो गई हैं। विपक्ष समर्थन जुटा रहा है और आरोप लगा रहा है कि सतीशन सरकार ईमानदार अधिकारियों को हटा रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केरल में प्रशासनिक पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।