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सीईसी ज्ञानेश कुमार पर ₹2 करोड़ रिश्वत मामले में केरल सरकार ने दी जांच की मंजूरी

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सीईसी ज्ञानेश कुमार पर ₹2 करोड़ रिश्वत मामले में केरल सरकार ने दी जांच की मंजूरी

सारांश

केरल सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2006 के ₹2 करोड़ रिश्वत मामले में VACB जांच को मंजूरी दे दी है। PWD सचिव के रूप में उनके पुराने कार्यकाल से जुड़ा यह मामला अब संवैधानिक पद की सुरक्षा और राज्य जांच-अधिकार के बीच की सीमा को परखेगा।

मुख्य बातें

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने 4 नवंबर 2026 को सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ VACB जांच को मंजूरी दी।
आरोप है कि 2006 में PWD सचिव रहते हुए ज्ञानेश कुमार ने ठेके के बिल पास करने के बदले ₹2 करोड़ की रिश्वत माँगी थी।
जांच की मंजूरी प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17(A) के तहत मुख्यमंत्री वी.डी.
सतीशन से विचार-विमर्श के बाद दी गई।
साजन के अनुसार, कथित माँग के दबाव में आकर मलेशियाई इंजीनियर ली सी बिन ने आत्महत्या की थी।
चेन्निथला ने कहा कि सीईसी का वर्तमान पद उन्हें PWD सचिव कार्यकाल से जुड़े आरोपों की जांच से नहीं बचाता ।

केरल सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2006 के एक पुराने भ्रष्टाचार मामले में जांच को हरी झंडी दे दी है। आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने केरल के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के सचिव रहते हुए सरकारी ठेके के बिल जारी करने के बदले ₹2 करोड़ की रिश्वत माँगी थी। 4 नवंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इसकी घोषणा की।

जांच की मंजूरी और कानूनी आधार

गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन से विचार-विमर्श के बाद प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17(A) के अंतर्गत जांच की स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा, 'मैंने मुख्यमंत्री से बात की और धारा 17(A) के तहत जांच की मंजूरी दे दी है। विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) कानून के तहत जांच कर सकता है, और मैंने ज़रूरी मंजूरी दे दी है।' अब विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) यह तय करेगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ाई जाए।

आरोपों की पृष्ठभूमि

यह मामला ठेकेदार वी.ओ. साजन की शिकायत पर आधारित है। साजन उस कंपनी के लिए सामग्री आपूर्ति करने वाले उप-ठेकेदार थे, जिसका पीडब्ल्यूडी के साथ अनुबंध था। उनके अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने पीडब्ल्यूडी सचिव के रूप में कार्यरत रहते हुए 'पाथिबेल' के बिल रोक लिए थे और उनकी क्लियरेंस के लिए मलेशियाई इंजीनियर ली सी बिन से ₹2 करोड़ की माँग रखी थी।

साजन ने दावा किया कि ली सी बिन लंबित भुगतान को लेकर अत्यधिक मानसिक तनाव में थे और उन्होंने साजन से इस कथित माँग के बारे में बात की थी। बाद में ली सी बिन ने आत्महत्या कर ली थी। यह खुलासा और साजन की शिकायत इस जांच की प्रत्यक्ष वजह बनी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

चेन्निथला ने स्पष्ट किया कि सीईसी के वर्तमान पद का संरक्षण उन्हें उनके पूर्व कार्यकाल — PWD सचिव — से जुड़े आरोपों की जांच से नहीं बचाता। उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ है कि जांच पर कोई रोक नहीं है। संरक्षण मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय से जुड़ा है, न कि उनके पीडब्ल्यूडी सचिव के रूप में किए गए कार्यों से।'

राजनीतिक संदर्भ और विवाद

यह कदम ऐसे समय में आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संवैधानिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ इस तरह की जांच राजनीतिक प्रेरणा से जुड़ी हो सकती है। वहीं, केरल सरकार का तर्क है कि यह जांच पीडब्ल्यूडी सचिव के रूप में उनकी पुरानी भूमिका से संबंधित है और पूरी तरह कानूनसम्मत है। गौरतलब है कि यह मामला करीब दो दशक पुराना है और इसका पुनर्जीवन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

आगे क्या होगा

VACB को अब यह तय करना है कि जांच की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ाई जाए। यह देखना होगा कि क्या ज्ञानेश कुमार इस जांच को उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देते हैं। संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त की संस्थागत स्वायत्तता और राज्य सरकारों की जांच-शक्ति के बीच की सीमा-रेखा को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी नज़ीर स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि चुनाव आयोग और राज्य सरकारों के बीच पहले से तनाव का इतिहास रहा है। असली परीक्षा यह है कि VACB की जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ती है या नहीं — और क्या ज्ञानेश कुमार इसे न्यायालय में चुनौती देते हैं। संवैधानिक दृष्टि से, यह मामला एक महत्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है कि राज्य सरकारें केंद्रीय संवैधानिक पदाधिकारियों के पूर्व-कार्यकाल की जांच किस हद तक कर सकती हैं।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल सरकार ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किस मामले में जांच मंजूर की है?
केरल सरकार ने 2006 के उस मामले में VACB जांच को मंजूरी दी है जिसमें आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने PWD सचिव रहते हुए सरकारी ठेके के बिल पास करने के बदले ₹2 करोड़ की रिश्वत माँगी थी। यह मंजूरी प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17(A) के तहत दी गई है।
VACB जांच की मंजूरी किसने और कैसे दी?
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन से परामर्श के बाद 4 नवंबर 2026 को धारा 17(A) के तहत यह मंजूरी दी। अब VACB तय करेगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ाई जाए।
क्या मुख्य चुनाव आयुक्त का पद इस जांच से उन्हें बचाता है?
नहीं। गृह मंत्री चेन्निथला ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सीईसी के पद का संरक्षण उनके वर्तमान कार्यालय से जुड़ा है, न कि PWD सचिव के रूप में पहले के कार्यकाल से जुड़े आरोपों से।
शिकायतकर्ता वी.ओ. साजन ने क्या आरोप लगाए हैं?
साजन ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने पाथिबेल के बिल रोककर मलेशियाई इंजीनियर ली सी बिन से ₹2 करोड़ की माँग की थी। उनके अनुसार इस कथित दबाव के कारण ली सी बिन मानसिक तनाव में आ गए और बाद में उन्होंने आत्महत्या कर ली।
इस मामले का राष्ट्रीय महत्व क्या है?
यह पहली बार हो सकता है जब किसी राज्य सरकार ने बैठे हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के पूर्व-कार्यकाल से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में जांच मंजूर की हो। यह मामला संवैधानिक पदाधिकारियों की जवाबदेही और राज्य जांच-अधिकार की सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण कानूनी नज़ीर स्थापित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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