4 नवंबर 2026
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आरजी कर वित्तीय अनियमितता: ईडी ने पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को भेजा समन, साल्टलेक कार्यालय में पूछताछ

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आरजी कर वित्तीय अनियमितता: ईडी ने पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को भेजा समन, साल्टलेक कार्यालय में पूछताछ

सारांश

आरजी कर मेडिकल कॉलेज का वित्तीय अनियमितता मामला एक बार फिर तूल पकड़ रहा है — ईडी ने पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को समन जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के महज कुछ हफ्तों बाद यह पूछताछ, 2024 के उस कांड की परतें और उघाड़ सकती है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 4 नवंबर 2026 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं की जांच में समन जारी किया।
घोष को साल्टलेक, कोलकाता स्थित ईडी कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया गया; एजेंसी ने उन्हें कुछ अतिरिक्त समय दिया है।
सीबीआई ने 24 अगस्त 2024 को मामला दर्ज कर घोष को गिरफ्तार किया था; सर्वोच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर 2026 को जमानत दी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि कथित वित्तीय दुरुपयोग का असर आम लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा।
यह मामला अगस्त 2024 में अस्पताल परिसर में एक जूनियर महिला डॉक्टर की दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद सामने आया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 4 नवंबर 2026 को कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के सिलसिले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है। घोष को कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके साल्टलेक स्थित ईडी कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसी ने उन्हें पेश होने के लिए कुछ अतिरिक्त समय प्रदान किया है।

मामले की पृष्ठभूमि

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अगस्त 2024 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया, जब अस्पताल परिसर में एक जूनियर महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश की लहर पैदा की और व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया। गौरतलब है कि इस त्रासदी ने संस्थान के आंतरिक प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए।

आरोप लगाया गया कि अस्पताल के बैंक खाते से सरकारी धन को अवैध तरीके से संदीप घोष के कथित करीबी प्रभावशाली विक्रेताओं और ठेकेदारों के खातों में स्थानांतरित किया गया। इन आरोपों के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कोलकाता भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने 24 अगस्त 2024 को मामला दर्ज कर पूर्व प्रिंसिपल को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया

सीबीआई ने वर्ष 2024 में संदीप घोष को गिरफ्तार किया, जिसके बाद उन्हें पहले सीबीआई की हिरासत में और फिर न्यायिक हिरासत में रखा गया। जमानत के लिए उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, परंतु न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का सीधा नकारात्मक असर आम नागरिकों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ा है।

न्यायाधीश ने यह आशंका भी जताई थी कि घोष का राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रभाव, रिहाई की स्थिति में साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा पैदा कर सकता है। इसके बाद घोष ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की, जहाँ से उन्हें 15 अक्टूबर 2026 को जमानत प्रदान की गई।

ईडी और सीबीआई की समानांतर जांच

इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई दोनों अलग-अलग कोणों से कर रहे हैं। जहाँ सीबीआई भ्रष्टाचार और आपराधिक पहलुओं की पड़ताल कर रही है, वहीं ईडी संस्थान से जुड़े वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। ईडी के ताज़ा समन के बाद यह मामला एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।

आम जनता पर असर

आरजी कर मेडिकल कॉलेज कोलकाता और पश्चिम बंगाल के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। कथित वित्तीय अनियमितताओं ने सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही के व्यापक प्रश्न खड़े किए हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी कि इन आरोपों का प्रभाव आम लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा, यह रेखांकित करती है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है।

क्या होगा आगे

ईडी की पूछताछ संस्थान से जुड़े वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच का हिस्सा होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या एजेंसी इस पूछताछ के बाद कोई औपचारिक कार्रवाई करती है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत मिलने के बाद यह संदीप घोष की पहली प्रमुख कानूनी चुनौती होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जांच की स्वाभाविक अगली कड़ी है। लेकिन असली सवाल यह है कि दो केंद्रीय एजेंसियाँ — सीबीआई और ईडी — एक ही संस्थान की समानांतर जांच कर रही हैं, फिर भी अब तक वित्तीय अनियमितताओं की जड़ तक पहुँचने का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। आरजी कर कांड केवल एक अस्पताल की प्रशासनिक विफलता नहीं है — यह सरकारी चिकित्सा संस्थानों में व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की उस संस्कृति का आईना है जो जवाबदेही के अभाव में पनपती है। जब तक जांच के नतीजे अदालत में टिकाऊ साबित नहीं होते, तब तक ये समन और गिरफ्तारियाँ महज प्रक्रियागत कदम बनकर रह जाएंगी।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने संदीप घोष को किस मामले में समन जारी किया है?
ईडी ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को समन जारी किया है। एजेंसी संस्थान से जुड़े वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित पहलुओं की पड़ताल करना चाहती है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज का वित्तीय अनियमितता मामला कब और कैसे सामने आया?
यह मामला अगस्त 2024 में अस्पताल परिसर में एक जूनियर महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद सुर्खियों में आया। आरोप लगाया गया कि अस्पताल के बैंक खाते से सरकारी धन अवैध तरीके से संदीप घोष के कथित करीबी विक्रेताओं और ठेकेदारों के खातों में भेजा गया, जिसके बाद सीबीआई ने 24 अगस्त 2024 को मामला दर्ज किया।
संदीप घोष को जमानत कब मिली और किसने दी?
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर 2026 को संदीप घोष को जमानत दी। इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने उनकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनका प्रभाव साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
इस मामले में सीबीआई और ईडी की भूमिका अलग-अलग कैसे है?
सीबीआई भ्रष्टाचार और आपराधिक पहलुओं की जांच कर रही है और उसने ही 2024 में संदीप घोष को गिरफ्तार किया था। वहीं, ईडी वित्तीय लेनदेन और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के कोण से जांच कर रही है — दोनों एजेंसियाँ समानांतर लेकिन स्वतंत्र जांच कर रही हैं।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जमानत खारिज करते हुए क्या टिप्पणी की थी?
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने कहा था कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का सीधा नकारात्मक असर आम नागरिकों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। अदालत ने यह भी आशंका जताई थी कि घोष का राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव रिहाई की स्थिति में साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का जोखिम पैदा कर सकता है।
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