आरजी कर वित्तीय अनियमितता: ईडी ने पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को भेजा समन, साल्टलेक कार्यालय में पूछताछ
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 4 नवंबर 2026 को कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के सिलसिले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है। घोष को कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके साल्टलेक स्थित ईडी कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसी ने उन्हें पेश होने के लिए कुछ अतिरिक्त समय प्रदान किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अगस्त 2024 में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया, जब अस्पताल परिसर में एक जूनियर महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश की लहर पैदा की और व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया। गौरतलब है कि इस त्रासदी ने संस्थान के आंतरिक प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए।
आरोप लगाया गया कि अस्पताल के बैंक खाते से सरकारी धन को अवैध तरीके से संदीप घोष के कथित करीबी प्रभावशाली विक्रेताओं और ठेकेदारों के खातों में स्थानांतरित किया गया। इन आरोपों के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कोलकाता भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने 24 अगस्त 2024 को मामला दर्ज कर पूर्व प्रिंसिपल को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया
सीबीआई ने वर्ष 2024 में संदीप घोष को गिरफ्तार किया, जिसके बाद उन्हें पहले सीबीआई की हिरासत में और फिर न्यायिक हिरासत में रखा गया। जमानत के लिए उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, परंतु न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का सीधा नकारात्मक असर आम नागरिकों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ा है।
न्यायाधीश ने यह आशंका भी जताई थी कि घोष का राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रभाव, रिहाई की स्थिति में साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा पैदा कर सकता है। इसके बाद घोष ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की, जहाँ से उन्हें 15 अक्टूबर 2026 को जमानत प्रदान की गई।
ईडी और सीबीआई की समानांतर जांच
इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई दोनों अलग-अलग कोणों से कर रहे हैं। जहाँ सीबीआई भ्रष्टाचार और आपराधिक पहलुओं की पड़ताल कर रही है, वहीं ईडी संस्थान से जुड़े वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। ईडी के ताज़ा समन के बाद यह मामला एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।
आम जनता पर असर
आरजी कर मेडिकल कॉलेज कोलकाता और पश्चिम बंगाल के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। कथित वित्तीय अनियमितताओं ने सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही के व्यापक प्रश्न खड़े किए हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी कि इन आरोपों का प्रभाव आम लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा, यह रेखांकित करती है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है।
क्या होगा आगे
ईडी की पूछताछ संस्थान से जुड़े वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच का हिस्सा होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या एजेंसी इस पूछताछ के बाद कोई औपचारिक कार्रवाई करती है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत मिलने के बाद यह संदीप घोष की पहली प्रमुख कानूनी चुनौती होगी।