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आरजी कर रेप-मर्डर केस: विसरा सैंपल से छेड़छाड़ का दावा, पीड़िता के परिवार ने सियालदह कोर्ट में याचिका दायर की

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आरजी कर रेप-मर्डर केस: विसरा सैंपल से छेड़छाड़ का दावा, पीड़िता के परिवार ने सियालदह कोर्ट में याचिका दायर की

सारांश

आरजी कर हत्याकांड में अब फोरेंसिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल। पीड़िता के परिवार को मिले एक익명 पत्र में बेलगछिया फोरेंसिक लैब के तीन अधिकारियों पर विसरा सैंपल बदलने का आरोप। परिवार ने मई में सीबीआई को सूचित किया, कार्रवाई न होने पर अब सियालदह कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मुख्य बातें

पीड़िता के परिवार को 16 मई और 23 मई को दो पत्र मिले, जिनमें बेलगछिया राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में विसरा सैंपल से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है।
पत्र में तीन अधिकारियों पर सीबीआई और सीएफएसएल को नमूने भेजने से पहले उन्हें बदलने का आरोप है।
पत्र लिखने वाले ने खुद को बेलगछिया फोरेंसिक लैब का पूर्व कर्मचारी बताया; पहचान सार्वजनिक नहीं।
पत्र में कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निर्देश पर कार्रवाई का दावा; आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं।
परिवार ने सियालदह कोर्ट से पत्र की सत्यता जांच और आरोपों की जांच के आदेश देने की माँग की।
मूल मामले में 9 अगस्त 2024 को शव बरामद हुआ था; सीबीआई जांच कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर सौंपी गई थी।

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या मामले में 2 जुलाई 2026 को एक गंभीर नया आयाम सामने आया है। पीड़िता के परिजनों ने सियालदह कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उन्हें एक익명 पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें उनकी बेटी के विसरा सैंपल (आंतरिक अंगों के नमूने) के साथ फोरेंसिक जांच से पहले छेड़छाड़ किए जाने का दावा किया गया है। परिवार ने अदालत से इस पत्र की सत्यता की जांच कराने और संबंधित आरोपों की स्वतंत्र जांच के आदेश देने की मांग की है।

पत्र में क्या आरोप लगाए गए हैं

पीड़िता के परिवार को मिले पत्र में कथित तौर पर आरोप लगाया गया है कि कोलकाता के बेलगछिया स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में विसरा सैंपल को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) को भेजे जाने से पहले बदल दिया गया था। पत्र में प्रयोगशाला के तीन अधिकारियों का नाम लेकर उन पर यह कृत्य करने का आरोप लगाया गया है, हालाँकि मीडिया में उन नामों को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

पत्र लिखने वाले ने खुद को बेलगछिया फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी का पूर्व कर्मचारी बताया है। पीड़िता के परिवार ने पत्र भेजने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। पत्र में यह भी कथित तौर पर दावा किया गया है कि यह कार्रवाई तत्कालीन मुख्यमंत्री या तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निर्देश पर की गई थी — हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

परिवार को कब और कैसे मिला पत्र

पीड़िता के परिवार ने सियालदह कोर्ट को बताया कि उन्हें एक जैसे दो पत्र अलग-अलग समय पर मिले — पहला 16 मई को और दूसरा 23 मई को। परिवार के अनुसार, पहला पत्र मिलने के तुरंत बाद उन्होंने सीबीआई को इसकी सूचना दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़िता के पिता ने कहा, 'हमें मई में एक पत्र मिला था। हमने तुरंत इसकी जानकारी सीबीआई को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सात दिन बाद वही पत्र फिर आया। उसमें लिखा है कि विसरा रिपोर्ट में हेरफेर किया गया है। किसने किया और किसके आदेश पर किया, सब कुछ उसमें लिखा है। अब हमने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। हमें उम्मीद है कि सीबीआई आवश्यक कार्रवाई करेगी।'

व्यापक आरोप और अन्य दावे

पत्र में केवल इस मामले तक सीमित आरोप नहीं हैं। कथित तौर पर यह भी दावा किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और माकपा कार्यकर्ताओं से जुड़े सैकड़ों विसरा सैंपल भी बदले गए थे। इसके अलावा फोरेंसिक जांच में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री के उपयोग का भी आरोप लगाया गया है। पत्र भेजने वाले ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग की है।

पीड़िता के पिता ने यह सवाल भी उठाया कि राज्य में सरकार बदलने के बाद भी स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम अपने पद पर क्यों बने हुए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से महिला डॉक्टर का शव बरामद हुआ था। अगले दिन कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। यह मामला देशभर में चिकित्सा संस्थानों में महिला सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बड़े आंदोलन की वजह बना था।

आगे क्या होगा

अब सियालदह कोर्ट के समक्ष यह तय करना होगा कि पत्र की सत्यता जांचने और आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए कोई आदेश दिया जाए या नहीं। यदि अदालत जांच का आदेश देती है, तो यह सीबीआई की अब तक की जांच की दिशा और फोरेंसिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि फोरेंसिक साक्ष्य ही किसी बलात्कार-हत्या मामले की रीढ़ होते हैं। यह भी विचारणीय है कि परिवार ने मई में ही सीबीआई को सूचित किया, फिर भी कोई दृश्यमान कार्रवाई नहीं हुई — यह केंद्रीय एजेंसी की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। पत्र익명 है और आरोप एकतरफा हैं, इसलिए इन्हें सत्यापित तथ्य नहीं माना जा सकता; लेकिन अदालत का दरवाजा खटखटाना यह सुनिश्चित करता है कि इन्हें नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरजी कर केस में विसरा सैंपल से छेड़छाड़ का दावा क्या है?
पीड़िता के परिवार को मिले एक익명 पत्र में दावा किया गया है कि बेलगछिया स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में विसरा सैंपल को सीबीआई और सीएफएसएल को भेजने से पहले बदल दिया गया था। पत्र में तीन अधिकारियों पर यह कृत्य करने का आरोप लगाया गया है, हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पीड़िता के परिवार ने सियालदह कोर्ट में क्या माँग की है?
परिवार ने सियालदह कोर्ट से पत्र की सत्यता की जांच कराने और उसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के आदेश देने की माँग की है। परिवार का कहना है कि सीबीआई को पहले ही सूचित किया जा चुका था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज हत्याकांड की जांच कहाँ तक पहुँची है?
9 अगस्त 2024 को शव बरामद होने के बाद कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, जो अभी जारी है।
पत्र में तृणमूल कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
पत्र में कथित तौर पर दावा किया गया है कि विसरा सैंपल बदलने की यह कार्रवाई तत्कालीन मुख्यमंत्री या तृणमूल कांग्रेस के निर्देश पर की गई थी। यह आरोप पत्र में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम पर परिवार ने सवाल क्यों उठाए?
पीड़िता के पिता ने सवाल उठाया कि राज्य में सरकार बदलने के बाद भी स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम अपने पद पर बने हुए हैं। परिवार का यह सवाल प्रशासनिक जवाबदेही और मामले की निष्पक्ष जांच से जुड़ी चिंताओं को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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