शेड्यूल एम में बड़ा बदलाव: स्वास्थ्य मंत्रालय ने WHO मानकों के अनुरूप GMP नियम संशोधन का प्रस्ताव दिया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 28 अक्टूबर 2026 को जी.एस.आर. नंबर 953(ई) के माध्यम से ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल एम में संशोधन का आधिकारिक प्रस्ताव जारी किया है। यह प्रस्ताव स्टेराइल फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्माण में ग्रेड ए स्वच्छ क्षेत्रों में माइक्रोबियल कंटैमिनेशन की अनुमत सीमाओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप बनाने के लिए लाया गया है।
प्रस्तावित संशोधन का मूल उद्देश्य
मंत्रालय के अनुसार, यह संशोधन WHO टेक्निकल रिपोर्ट सीरीज (TRS) नंबर 1044, अनेक्सर 2 में निर्धारित गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) दिशा-निर्देशों पर आधारित है। वर्तमान में शेड्यूल एम के तहत निर्धारित माइक्रोबियल कंटैमिनेशन सीमाएँ और WHO की ग्रेड ए एरिया संबंधी आवश्यकताओं के बीच एक अंतर बना हुआ है, जिसे यह प्रस्ताव दूर करने का प्रयास करता है।
प्रस्तावित नियम के अंतर्गत ग्रेड ए एरिया में किसी भी माइक्रोबियल वृद्धि को WHO दिशानिर्देशों के अनुसार जाँच का आधार (ट्रिगर) माना जाएगा — जो पिछली व्यवस्था से एक महत्त्वपूर्ण बदलाव है।
ग्रेड ए एरिया क्यों है इतना अहम
स्टेराइल फार्मास्युटिकल निर्माण में ग्रेड ए क्षेत्र सबसे संवेदनशील और नियंत्रित वातावरण होता है। इन क्षेत्रों में उजागर उत्पाद, कंटेनर तथा स्टेराइल किए गए घटकों को संभाला जाता है। गौरतलब है कि इन क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवी नियंत्रण की कोई भी ढिलाई सीधे दवा की गुणवत्ता और रोगी की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग वैश्विक निर्यात बाज़ारों में अपनी साख मज़बूत करने में जुटा है और अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्थाओं की जाँच का सामना कर रहा है।
नियामक ढाँचे पर असर
प्रस्तावित संशोधन रिवाइज्ड शेड्यूल एम को WHO की गाइडलाइंस के साथ एकीकृत करेगा और देश में स्टेराइल फार्मास्युटिकल निर्माण को नियंत्रित करने वाले नियामक ढाँचे को और सुदृढ़ बनाएगा। यह फार्मास्युटिकल उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी प्रतिबिंबित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय दवा निर्माताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों — विशेष रूप से यूरोपीय और अमेरिकी नियामकों — की अपेक्षाओं को पूरा करना आसान बनाएगा।
हितधारकों से आपत्तियाँ और सुझाव आमंत्रित
मंत्रालय ने हितधारकों और आम जनता से इस प्रस्तावित संशोधन पर आपत्तियाँ और सुझाव आमंत्रित किए हैं। अवर सचिव (ड्रग्स रेगुलेशन), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को ईमेल के माध्यम से इनपुट भेजे जा सकते हैं। यह सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि उद्योग और नागरिक दोनों अपनी राय दर्ज करा सकें।
आने वाले हफ्तों में प्राप्त फीडबैक के आधार पर अंतिम संशोधन अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है, जो भारतीय फार्मास्युटिकल GMP मानकों को वैश्विक बेंचमार्क के निकट ले जाएगा।