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ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन: सेल, जीन थेरेपी और जेनोग्राफ्ट्स अब CLAA के दायरे में

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ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन: सेल, जीन थेरेपी और जेनोग्राफ्ट्स अब CLAA के दायरे में

सारांश

केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन कर सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और जेनोग्राफ्ट्स को CLAA के दायरे में लाया। यह कदम CAR-T और जीन एडिटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के लिए देशभर में एकसमान नियामक मानक सुनिश्चित करेगा और भारत के नियामक ढाँचे को वैश्विक स्तर पर मज़बूत करेगा।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 2 जुलाई 2025 को ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए गजट अधिसूचना जारी की।
सेल/स्टेम सेल उत्पाद , जीन थेरेपी उत्पाद और जेनोग्राफ्ट्स अब CLAA के नियामक दायरे में शामिल।
CAR-T सेल थेरेपी का उपयोग ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज में; जीन थेरेपी आनुवंशिक बीमारियों में।
जेनोग्राफ्ट्स में हार्ट वॉल्व जैसे उत्पाद शामिल, जो कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स में प्रत्यारोपण के लिए उपयोगी।
संशोधन का उद्देश्य भारत के नियामक ढाँचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

केंद्र सरकार ने 2 जुलाई 2025 को ड्रग्स रूल्स, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए एडवांस्ड सेल थेरेपी, जीन थेरेपी उत्पादों और जेनोग्राफ्ट्स को सेंट्रली लाइसेंस अप्रूविंग अथॉरिटी (CLAA) के नियामक दायरे में शामिल कर दिया है। सरकार के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य इन जटिल और तेज़ी से विकसित हो रही चिकित्सा तकनीकों के लिए पूरे देश में एकसमान नियामक मानक सुनिश्चित करना और मरीजों की सुरक्षा को मज़बूत करना है। इस संबंध में विस्तृत राजपत्र (गजट) अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

संशोधन में क्या शामिल है

इस संशोधन के तहत तीन प्रमुख श्रेणियों के उत्पादों को CLAA के अधिकार क्षेत्र में लाया गया है — सेल या स्टेम सेल आधारित उत्पाद, जीन थेरेपी उत्पाद, और जेनोग्राफ्ट्स। इससे पहले ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत वैक्सीन, 100 मिलीलीटर से अधिक मात्रा वाले इंट्रावीनस (IV) सॉल्यूशन और रिकॉम्बिनेंट डीएनए आधारित दवाएं पहले से ही केंद्र-राज्य की संयुक्त लाइसेंसिंग निगरानी में थीं। नया संशोधन इस ढाँचे को आधुनिक जैव-चिकित्सा तकनीकों तक विस्तारित करता है।

इन तकनीकों का उपयोग कहाँ होता है

सेल और स्टेम सेल आधारित उत्पादों का इस्तेमाल रीजेनरेटिव थेरेपी और CAR-T सेल थेरेपी जैसे अत्याधुनिक उपचारों में हो रहा है, विशेष रूप से ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज में। जीन थेरेपी उत्पाद जीन रिप्लेसमेंट और जीन एडिटिंग के ज़रिए आनुवंशिक बीमारियों और कई प्रकार के कैंसर के उपचार में उपयोग किए जा रहे हैं। वहीं, जेनोग्राफ्ट्स — जो जानवरों के ऊतकों से तैयार किए जाते हैं — में हार्ट वॉल्व जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनका उपयोग कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स में प्रत्यारोपण के लिए किया जाता है।

नियामक व्यवस्था पर असर

सरकार का कहना है कि इन उत्पादों को CLAA के अंतर्गत लाने से केंद्र और राज्य की लाइसेंसिंग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। गौरतलब है कि ये तकनीकें अत्यंत जटिल हैं और इनके उत्पादन, भंडारण व वितरण में एकसमान मानकों का अभाव मरीजों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। यह संशोधन उसी अंतर को पाटने का प्रयास है।

वैश्विक मानकों से तालमेल

सरकार के अनुसार, यह संशोधन भारत के नियामक ढाँचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप मज़बूत करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत स्वास्थ्य और लाइफ साइंसेज क्षेत्र में वैश्विक नवाचार केंद्र बनने की दिशा में काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एकसमान नियामक मानक न केवल मरीजों की सुरक्षा बढ़ाएंगे, बल्कि इस क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहन देंगे।

आगे क्या

गजट अधिसूचना जारी होने के बाद अब इन उत्पादों के निर्माताओं और आयातकों को CLAA से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह कदम भारत में CAR-T सेल थेरेपी जैसी उन्नत चिकित्सा पद्धतियों की सुलभता और सुरक्षा दोनों को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। भारत में CAR-T थेरेपी पहले से ही अत्यधिक महंगी है और CLAA के दायरे में आने से लाइसेंसिंग प्रक्रिया लंबी होने का जोखिम भी है — जो नवाचार की गति को धीमा कर सकता है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका की FDA और यूरोप की EMA इन तकनीकों के लिए तेज़ 'ब्रेकथ्रू' मार्ग देती हैं; भारत को नियामक कठोरता और पहुँच के बीच संतुलन साधना होगा। बिना स्पष्ट समयसीमा और पारदर्शी मंज़ूरी प्रक्रिया के, यह संशोधन मरीजों तक पहुँच बढ़ाने की बजाय बाधा बन सकता है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्रग्स रूल्स 1945 में हाल के संशोधन में क्या बदला है?
केंद्र सरकार ने 2 जुलाई 2025 को ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन कर सेल/स्टेम सेल उत्पादों, जीन थेरेपी उत्पादों और जेनोग्राफ्ट्स को सेंट्रली लाइसेंस अप्रूविंग अथॉरिटी (CLAA) के दायरे में शामिल किया है। इससे इन उत्पादों के लिए पूरे देश में एकसमान नियामक मानक लागू होंगे।
CLAA क्या है और इसकी भूमिका क्या होगी?
सेंट्रली लाइसेंस अप्रूविंग अथॉरिटी (CLAA) वह केंद्रीय नियामक संस्था है जो कुछ विशेष दवाओं और जैविक उत्पादों — जैसे वैक्सीन और रिकॉम्बिनेंट डीएनए दवाएं — की लाइसेंसिंग निगरानी करती है। अब इसके दायरे में एडवांस्ड सेल थेरेपी और जीन थेरेपी उत्पाद भी आ गए हैं, जिससे केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा।
CAR-T सेल थेरेपी क्या है और इसका उपयोग किसके लिए होता है?
CAR-T सेल थेरेपी एक अत्याधुनिक कैंसर उपचार पद्धति है जिसमें मरीज़ की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को आनुवंशिक रूप से संशोधित कर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए तैयार किया जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज में किया जाता है।
जेनोग्राफ्ट्स क्या होते हैं और ये किस काम आते हैं?
जेनोग्राफ्ट्स वे चिकित्सा उत्पाद हैं जो जानवरों के ऊतकों से तैयार किए जाते हैं। इनमें हार्ट वॉल्व प्रमुख उदाहरण है, जिनका उपयोग कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स में प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है।
इस संशोधन से मरीजों और स्वास्थ्य क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
सरकार के अनुसार, यह संशोधन मरीजों की सुरक्षा को मज़बूत करेगा और भारत के नियामक ढाँचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाएगा। साथ ही, स्वास्थ्य और लाइफ साइंसेज क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलने और इन आधुनिक उपचारों को सुरक्षित तरीके से अपनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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