ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन: सेल, जीन थेरेपी और जेनोग्राफ्ट्स अब CLAA के दायरे में
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 2 जुलाई 2025 को ड्रग्स रूल्स, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए एडवांस्ड सेल थेरेपी, जीन थेरेपी उत्पादों और जेनोग्राफ्ट्स को सेंट्रली लाइसेंस अप्रूविंग अथॉरिटी (CLAA) के नियामक दायरे में शामिल कर दिया है। सरकार के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य इन जटिल और तेज़ी से विकसित हो रही चिकित्सा तकनीकों के लिए पूरे देश में एकसमान नियामक मानक सुनिश्चित करना और मरीजों की सुरक्षा को मज़बूत करना है। इस संबंध में विस्तृत राजपत्र (गजट) अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
संशोधन में क्या शामिल है
इस संशोधन के तहत तीन प्रमुख श्रेणियों के उत्पादों को CLAA के अधिकार क्षेत्र में लाया गया है — सेल या स्टेम सेल आधारित उत्पाद, जीन थेरेपी उत्पाद, और जेनोग्राफ्ट्स। इससे पहले ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत वैक्सीन, 100 मिलीलीटर से अधिक मात्रा वाले इंट्रावीनस (IV) सॉल्यूशन और रिकॉम्बिनेंट डीएनए आधारित दवाएं पहले से ही केंद्र-राज्य की संयुक्त लाइसेंसिंग निगरानी में थीं। नया संशोधन इस ढाँचे को आधुनिक जैव-चिकित्सा तकनीकों तक विस्तारित करता है।
इन तकनीकों का उपयोग कहाँ होता है
सेल और स्टेम सेल आधारित उत्पादों का इस्तेमाल रीजेनरेटिव थेरेपी और CAR-T सेल थेरेपी जैसे अत्याधुनिक उपचारों में हो रहा है, विशेष रूप से ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसर के इलाज में। जीन थेरेपी उत्पाद जीन रिप्लेसमेंट और जीन एडिटिंग के ज़रिए आनुवंशिक बीमारियों और कई प्रकार के कैंसर के उपचार में उपयोग किए जा रहे हैं। वहीं, जेनोग्राफ्ट्स — जो जानवरों के ऊतकों से तैयार किए जाते हैं — में हार्ट वॉल्व जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनका उपयोग कार्डियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स में प्रत्यारोपण के लिए किया जाता है।
नियामक व्यवस्था पर असर
सरकार का कहना है कि इन उत्पादों को CLAA के अंतर्गत लाने से केंद्र और राज्य की लाइसेंसिंग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। गौरतलब है कि ये तकनीकें अत्यंत जटिल हैं और इनके उत्पादन, भंडारण व वितरण में एकसमान मानकों का अभाव मरीजों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। यह संशोधन उसी अंतर को पाटने का प्रयास है।
वैश्विक मानकों से तालमेल
सरकार के अनुसार, यह संशोधन भारत के नियामक ढाँचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप मज़बूत करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत स्वास्थ्य और लाइफ साइंसेज क्षेत्र में वैश्विक नवाचार केंद्र बनने की दिशा में काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एकसमान नियामक मानक न केवल मरीजों की सुरक्षा बढ़ाएंगे, बल्कि इस क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहन देंगे।
आगे क्या
गजट अधिसूचना जारी होने के बाद अब इन उत्पादों के निर्माताओं और आयातकों को CLAA से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह कदम भारत में CAR-T सेल थेरेपी जैसी उन्नत चिकित्सा पद्धतियों की सुलभता और सुरक्षा दोनों को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित करेगा।