10 जुलाई 2026
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उच्च अल्कोहल युक्त दवाओं पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: लाइसेंस और पर्चा अनिवार्य, दुरुपयोग पर लगेगी लगाम

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उच्च अल्कोहल युक्त दवाओं पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: लाइसेंस और पर्चा अनिवार्य, दुरुपयोग पर लगेगी लगाम

सारांश

केंद्र सरकार ने 80-90% तक अल्कोहल युक्त टिंचर और अर्क जैसी दवाओं के दुरुपयोग पर लगाम कसी — 12% से अधिक इथेनॉल और 30 मिली से बड़ी पैकिंग वाली दवाएँ अब अनुसूची-एच1 के तहत आएंगी, जहाँ डॉक्टर का पर्चा और लाइसेंस दोनों अनिवार्य हैं।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 10 जुलाई 2026 को गजट अधिसूचना के जरिए उच्च अल्कोहल युक्त दवाओं के नियमन में संशोधन किया।
12% से अधिक एथाइल अल्कोहल और 30 मिलीलीटर से बड़ी पैकिंग वाली औषधीय तैयारियाँ अब अनुसूची-के की छूट से बाहर होंगी।
ये दवाएँ अनुसूची-एच1 में शामिल की गई हैं — बिक्री के लिए पंजीकृत चिकित्सक का पर्चा और विस्तृत बिक्री रिकॉर्ड अनिवार्य होगा।
इलायची, अदरक जैसी सुगंधित टिंचर में 80 से 90% तक अल्कोहल होने के कारण नशे के रूप में दुरुपयोग की आशंका थी।
कई राज्य सरकारों की शिकायतों और सुझावों के बाद केंद्र ने यह कदम उठाया।

केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2026 को उच्च मात्रा में एथिल अल्कोहल (इथेनॉल) युक्त औषधीय फॉर्मूलेशनों के नियमन को कड़ा करते हुए इनकी बिक्री के लिए लाइसेंस और पंजीकृत चिकित्सक का पर्चा अनिवार्य कर दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र (गजट) अधिसूचना के माध्यम से लागू इस संशोधन का उद्देश्य इन दवाओं के नशे के लिए दुरुपयोग पर रोक लगाना और वास्तविक चिकित्सीय जरूरतमंद मरीजों के लिए इनकी उपलब्धता बनाए रखना है।

क्या बदला है नियमों में

अब तक इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित औषधीय फॉर्मूलेशन की टिंचर (अर्क) जैसी कई तैयारियाँ अनुसूची-के (Schedule K) के तहत लाइसेंस संबंधी आवश्यकताओं से मुक्त थीं। सरकार के अनुसार, इनमें से कुछ उत्पादों में 80 से 90 प्रतिशत तक एथाइल अल्कोहल होता है, जिससे इनके नशे के उद्देश्य से दुरुपयोग की गंभीर आशंका बनी रहती थी।

संशोधित नियमों के तहत 12 प्रतिशत से अधिक एथाइल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से अधिक की पैकिंग में उपलब्ध सभी औषधीय तैयारियाँ अब अनुसूची-के के तहत मिलने वाली छूट की पात्र नहीं रहेंगी। इसके परिणामस्वरूप ऐसे उत्पादों के निर्माताओं और विक्रेताओं को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करना होगा।

अनुसूची-एच1 में शामिल: क्या होगा असर

इन औषधीय तैयारियों को ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-एच1 (Schedule H1) में भी शामिल किया गया है, जो देश की सबसे कड़ी नियामकीय श्रेणियों में से एक है। अनुसूची-एच1 में शामिल दवाएँ केवल पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर के पर्चे पर ही बेची जा सकती हैं और विक्रेताओं को इनके विक्रय का विस्तृत रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य होगा। गौरतलब है कि अनुसूची-एच1 में पहले से ही नशीली और संवेदनशील दवाएँ शामिल हैं।

राज्यों की चिंता से उठा मुद्दा

मंत्रालय ने बताया कि कई राज्य सरकारों ने इन उत्पादों के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताते हुए केंद्र को सुझाव और संदर्भ भेजे थे। यह ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में सस्ती और आसानी से उपलब्ध अल्कोहल युक्त दवाओं के नशे के रूप में इस्तेमाल की खबरें सामने आती रही हैं।

जनस्वास्थ्य पर असर और आगे की राह

मंत्रालय के अनुसार, संशोधित व्यवस्था से अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पादों की निगरानी और नियंत्रण मजबूत होगा तथा इनकी आपूर्ति केवल विनियमित दवा वितरण प्रणाली के माध्यम से ही सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे दुरुपयोग और गलत इस्तेमाल की आशंका में उल्लेखनीय कमी आएगी, जबकि वास्तविक चिकित्सीय जरूरत वाले मरीजों को इन दवाओं की उपलब्धता बाधित नहीं होगी। यह संशोधन देश की दवा नियामक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और जनस्वास्थ्य सुरक्षा के व्यापक सरकारी प्रयासों का हिस्सा बताया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है। देश में लाखों छोटे दवा विक्रेता हैं जहाँ अनुसूची-एच1 के नियमों का पालन अभी भी कमज़ोर है — नई श्रेणी जोड़ने से तब तक फर्क नहीं पड़ेगा जब तक निरीक्षण तंत्र मजबूत न हो। यह भी विचारणीय है कि जिन राज्यों ने दुरुपयोग की शिकायत की, वहाँ पहले से मौजूद नशा-नियंत्रण कानूनों का प्रवर्तन क्यों अपर्याप्त रहा। केंद्रीय नियमन जरूरी है, पर बिना राज्य-स्तरीय फार्मेसी निरीक्षण को मजबूत किए यह अधिसूचना केवल कागज़ी सख्ती बनकर रह सकती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने अल्कोहल युक्त दवाओं पर क्या नया नियम लागू किया है?
सरकार ने 12% से अधिक एथाइल अल्कोहल और 30 मिलीलीटर से बड़ी पैकिंग वाली सभी औषधीय तैयारियों की बिक्री के लिए लाइसेंस और पंजीकृत चिकित्सक का पर्चा अनिवार्य कर दिया है। इन्हें ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-एच1 में शामिल किया गया है।
अनुसूची-एच1 में शामिल होने का क्या मतलब है?
अनुसूची-एच1 भारत की सबसे कड़ी दवा नियामक श्रेणियों में से एक है। इसमें शामिल दवाएँ केवल पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनर के लिखित पर्चे पर बेची जा सकती हैं और दुकानदार को बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होता है।
यह बदलाव क्यों जरूरी था?
इलायची, अदरक जैसी सुगंधित टिंचर दवाओं में 80 से 90 प्रतिशत तक एथाइल अल्कोहल होता है, जिससे इन्हें नशे के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका थी। कई राज्य सरकारों ने दुरुपयोग की शिकायतें और सुझाव केंद्र को भेजे थे, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
क्या इससे मरीजों को इन दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होगी?
मंत्रालय के अनुसार, वास्तविक चिकित्सीय जरूरत वाले मरीजों के लिए इन दवाओं की उपलब्धता बाधित नहीं होगी। डॉक्टर के पर्चे पर ये दवाएँ पहले की तरह मिलती रहेंगी, बस अब इनकी आपूर्ति विनियमित दवा वितरण प्रणाली के माध्यम से होगी।
यह संशोधन कैसे लागू किया गया है?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसे राजपत्र (गजट) अधिसूचना के माध्यम से अधिसूचित किया है। निर्माताओं और विक्रेताओं को अब औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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