राज्यसभा में शेड्यूल एच1 दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर चिंता, नियमों की मांग

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राज्यसभा में शेड्यूल एच1 दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर चिंता, नियमों की मांग

सारांश

राज्यसभा में उठी चेतावनी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शेड्यूल एच1 दवाओं की बिक्री पर कार्रवाई की जरूरत। जानें क्या है मामला।

मुख्य बातें

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के नियमों की आवश्यकता।
फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के मामले बढ़ रहे हैं।
ई-फार्मेसी नियमों का शीघ्र लागू होना आवश्यक।
पैराक्वाट के उपयोग से स्वास्थ्य पर खतरा।
ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर कड़ी निगरानी की जरूरत।

नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस) ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट यह स्पष्ट करता है कि किन स्थितियों में और किन व्यक्तियों को दवाइयां बेचने की अनुमति है। फिर भी, कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं जो प्रतिबंधित श्रेणी की दवाइयां, खासकर शेड्यूल एच1 की दवाइयों का खुल्लम-खुल्ला विक्रय कर रहे हैं। यह जानकारी मंगलवार को राज्यसभा में प्रस्तुत की गई।

राज्यसभा सांसद मनोज झा ने सदन को बताया कि यह सूचना उनके अनुभव के आधार पर है। उन्होंने एक प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा की गई जांच का जिक्र किया, जिसमें यह चिंता का विषय सामने आया कि महज 20 सेकंड की टेली-कंसल्टेशन के जरिए एक व्यक्ति ने झूठी जानकारी देकर एंटी-डिप्रेसेंट दवाइयां प्राप्त कर लीं। यह स्पष्ट रूप से एक फर्जी प्रिस्क्रिप्शन का मामला है, जो हमारे नियामक तंत्र की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए, यह उल्लेखनीय है कि ई-फार्मेसी से संबंधित नियम 2018 से लंबित हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि इन नियमों को जल्द से जल्द लागू किया जाए, अन्यथा ये ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऐसी दवाइयों की बिक्री को बढ़ावा देते रहेंगे।

मनोज झा ने कहा कि जिन दवाओं को केवल चिकित्सकीय परामर्श और विशेष परिस्थितियों में ही उपलब्ध कराया जाना चाहिए, उन्हें सामान्य रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि सदन के नेता स्वयं स्वास्थ्य मंत्री भी हैं।

राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कंसल्टेशन की प्रक्रिया को और सुदृढ़ तथा नियंत्रित करने की आवश्यकता है, ताकि इसका दुरुपयोग न हो सके। इसी संदर्भ में एक और गंभीर उदाहरण प्रस्तुत किया गया।

मनोज झा ने कहा कि पैराक्वाट नामक एक अत्यंत खतरनाक शाकनाशी, जिसका उपयोग खरपतवार नियंत्रण में किया जाता है, के कारण तेलंगाना में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसकी मृत्यु दर लगभग 98 प्रतिशत बताई जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

उन्होंने सरकार से पुनः आग्रह किया कि ई-फार्मेसी के नियमों को जल्द लागू किया जाए और उनका सख्ती से पालन किया जाए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एग्रोकेमिकल्स के माध्यम से खतरनाक और प्रतिबंधित दवाइयों की बिक्री पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण लगाया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इससे जुड़े नियमों की अनुपस्थिति भी चिंता का विषय है। राज्यसभा सांसद मनोज झा ने सही मुद्दा उठाया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाइयों की बिक्री में नियंत्रण की आवश्यकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या शेड्यूल एच1 दवाएं ऑनलाइन बेची जा सकती हैं?
नहीं, शेड्यूल एच1 दवाओं की बिक्री केवल चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से होनी चाहिए।
राज्यसभा ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
राज्यसभा सांसद मनोज झा ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शेड्यूल एच1 दवाओं की बिक्री की चिंता जताई।
क्या ऑनलाइन कंसल्टेशन का दुरुपयोग हो रहा है?
हां, 20 सेकंड की टेली-कंसल्टेशन के जरिए दवाइयां प्राप्त करने के मामले सामने आए हैं।
सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए?
सरकार को ई-फार्मेसी के नियमों को शीघ्र लागू करना चाहिए और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
पैराक्वाट का क्या खतरा है?
पैराक्वाट एक अत्यंत खतरनाक शाकनाशी है, जिससे तेलंगाना में गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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