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भारत को हाई-वैल्यू फार्मा और एपीआई निर्माण में छलांग लगानी होगी: अर्थशास्त्री वेद जैन

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भारत को हाई-वैल्यू फार्मा और एपीआई निर्माण में छलांग लगानी होगी: अर्थशास्त्री वेद जैन

सारांश

जेनेरिक दवाओं में विश्व नेता भारत के सामने अब अगला बड़ा सवाल है — क्या वह बायोलॉजिक्स, एपीआई और एडवांस्ड थेरेप्यूटिक्स में भी वैश्विक ताकत बन सकता है? नीति आयोग की रिपोर्ट और अर्थशास्त्री वेद जैन की राय यही संकेत देती है कि PLI को और धारदार बनाए बिना यह छलांग संभव नहीं।

मुख्य बातें

अर्थशास्त्री वेद जैन ने 23 जून 2026 को जारी नीति आयोग की फार्मास्युटिकल व्यापार रिपोर्ट के आधार पर उच्च मूल्य वाली दवाओं और एपीआई के लिए मज़बूत PLI योजना की माँग की।
सितंबर 2025 तक फार्मा PLI योजना के तहत ₹3,08,408.60 करोड़ की बिक्री, जिसमें ₹1,98,509.49 करोड़ का निर्यात शामिल।
PLI के तहत कुल निवेश ₹40,294 करोड़ — निर्धारित लक्ष्य ₹17,275 करोड़ से कहीं अधिक।
भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अभी फार्मूलेशन और जेनेरिक दवाओं तक सीमित; बायोलॉजिक्स और एडवांस्ड थेरेप्यूटिक्स में निर्यात उपस्थिति कमज़ोर।
विशेषज्ञों के अनुसार, FTA समझौते और नियामकीय सुधार मिलकर उच्च मूल्य वाले फार्मा निर्यात को गति दे सकते हैं।

भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता और वैक्सीन तथा आवश्यक दवाओं का प्रमुख उत्पादक है। लेकिन अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अब देश को उच्च मूल्य वाली फार्मास्युटिकल दवाओं और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) के निर्माण में बड़ी छलांग लगाने की ज़रूरत है। इसके लिए सुदृढ़ प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजनाओं को और धारदार बनाना अनिवार्य होगा।

नीति आयोग की रिपोर्ट और विशेषज्ञ की राय

नीति आयोग की फार्मास्युटिकल व्यापार रिपोर्ट — जो मंगलवार, 23 जून 2026 को जारी हुई — पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्थशास्त्री वेद जैन ने कहा कि भारत के लिए उच्च मूल्य वाली दवाओं के निर्यात में आगे बढ़ने का यह सबसे उपयुक्त समय है।

उन्होंने कहा, 'हमें मूल दवाओं और उनसे जुड़ी सुविधाओं के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार पर निवेश करना चाहिए। मेरा मानना है कि उच्च मूल्य वाली दवाओं और एपीआई उत्पादों के लिए एक मज़बूत PLI योजना होनी चाहिए।'

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अभी मुख्य रूप से फार्मूलेशन, रिटेल दवाओं और जेनेरिक मेडिसिन में केंद्रित है। अमेरिका और यूरोप जैसे सख्त नियामकीय मानकों वाले बाज़ारों में भी भारत जेनेरिक दवाओं में मज़बूत उपस्थिति बनाए हुए है।

PLI योजना का अब तक का प्रदर्शन

फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए PLI योजना बायोफार्मास्युटिकल्स, जटिल जेनेरिक दवाओं, पेटेंट और ऑफ-पेटेंट दवाओं, दुर्लभ बीमारियों तथा ऑटोइम्यून रोगों की दवाओं जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहित करती है।

आँकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक इस योजना के तहत कुल ₹3,08,408.60 करोड़ की बिक्री दर्ज की गई, जिसमें ₹1,98,509.49 करोड़ का निर्यात शामिल है। इसी अवधि में कुल ₹40,294 करोड़ का निवेश हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य ₹17,275 करोड़ से कहीं अधिक है।

गौरतलब है कि PLI योजना ने बल्क ड्रग्स के आयात पर भारत की निर्भरता घटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नियामकीय बाधाएँ और FTA की भूमिका

वेद जैन ने ज़ोर दिया कि भारत को नियामकीय बाधाओं में और कमी लानी होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी और निर्यात के लिए उच्च मूल्य वाली फार्मास्युटिकल दवाओं का उत्पादन तेज़ करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) इस दिशा में सहायक सिद्ध होंगे, बशर्ते कुछ नियामकीय प्रतिबंधों को दूर किया जाए।

वैश्विक फार्मा उद्योग का रुख और भारत की चुनौती

नीति आयोग की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि वैश्विक फार्मास्युटिकल उद्योग तेज़ी से बायोलॉजिक्स, वैक्सीन, इम्यूनोलॉजिकल्स और एडवांस्ड थेरेप्यूटिक्स जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। हालाँकि, इन क्षेत्रों में भारत की निर्यात उपस्थिति अभी सीमित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इन क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन बढ़ाता है, तो वह वैश्विक फार्मा उद्योग में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर सकता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब चीन-निर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर वैश्विक स्तर पर पुनर्विचार हो रहा है और भारत के पास इस अवसर को भुनाने की क्षमता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ मार्जिन सीमित है। असली सवाल यह है कि बायोलॉजिक्स और एडवांस्ड थेरेप्यूटिक्स में चीन और यूरोप से प्रतिस्पर्धा के लिए क्या भारत के पास नियामकीय ढाँचा, R&D पारिस्थितिकी तंत्र और कुशल जनशक्ति तैयार है? FTA की वकालत सही दिशा में है, किंतु बिना IP संरक्षण सुधारों और क्लिनिकल ट्रायल क्षमता के, उच्च मूल्य वाला फार्मा निर्यात एक घोषणा से आगे नहीं जाएगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत को हाई-वैल्यू फार्मा निर्माण में छलांग लगाने की ज़रूरत क्यों है?
भारत अभी मुख्यतः जेनेरिक दवाओं और फार्मूलेशन में अग्रणी है, जहाँ मुनाफे का मार्जिन सीमित है। बायोलॉजिक्स, एपीआई और एडवांस्ड थेरेप्यूटिक्स जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने से देश की वैश्विक फार्मा स्थिति और राजस्व दोनों मज़बूत होंगे।
नीति आयोग की फार्मास्युटिकल व्यापार रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
23 जून 2026 को जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अभी फार्मूलेशन, रिटेल दवाओं और जेनेरिक मेडिसिन तक सीमित है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि वैश्विक फार्मा उद्योग तेज़ी से बायोलॉजिक्स और एडवांस्ड थेरेप्यूटिक्स की ओर बढ़ रहा है, जहाँ भारत की उपस्थिति अभी कमज़ोर है।
फार्मा PLI योजना ने अब तक क्या हासिल किया है?
सितंबर 2025 तक फार्मा PLI योजना के तहत ₹3,08,408.60 करोड़ की बिक्री हुई, जिसमें ₹1,98,509.49 करोड़ का निर्यात शामिल है। कुल निवेश ₹40,294 करोड़ रहा, जो निर्धारित लक्ष्य ₹17,275 करोड़ से काफी अधिक है। योजना ने बल्क ड्रग्स आयात पर निर्भरता घटाने में भी भूमिका निभाई है।
एपीआई और हाई-वैल्यू फार्मा में PLI योजना कौन-से उत्पादों को कवर करती है?
फार्मा PLI योजना बायोफार्मास्युटिकल्स, जटिल जेनेरिक दवाओं, पेटेंट और ऑफ-पेटेंट दवाओं, दुर्लभ बीमारियों तथा ऑटोइम्यून रोगों की दवाओं जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहित करती है।
क्या FTA समझौते भारत के फार्मा निर्यात को बढ़ाने में मदद करेंगे?
अर्थशास्त्री वेद जैन के अनुसार, भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) उच्च मूल्य वाले फार्मा निर्यात में सहायक होंगे, बशर्ते नियामकीय प्रतिबंधों को दूर किया जाए और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाए।
राष्ट्र प्रेस
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