भारत को हाई-वैल्यू फार्मा और एपीआई निर्माण में छलांग लगानी होगी: अर्थशास्त्री वेद जैन
सारांश
मुख्य बातें
भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता और वैक्सीन तथा आवश्यक दवाओं का प्रमुख उत्पादक है। लेकिन अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अब देश को उच्च मूल्य वाली फार्मास्युटिकल दवाओं और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) के निर्माण में बड़ी छलांग लगाने की ज़रूरत है। इसके लिए सुदृढ़ प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजनाओं को और धारदार बनाना अनिवार्य होगा।
नीति आयोग की रिपोर्ट और विशेषज्ञ की राय
नीति आयोग की फार्मास्युटिकल व्यापार रिपोर्ट — जो मंगलवार, 23 जून 2026 को जारी हुई — पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्थशास्त्री वेद जैन ने कहा कि भारत के लिए उच्च मूल्य वाली दवाओं के निर्यात में आगे बढ़ने का यह सबसे उपयुक्त समय है।
उन्होंने कहा, 'हमें मूल दवाओं और उनसे जुड़ी सुविधाओं के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार पर निवेश करना चाहिए। मेरा मानना है कि उच्च मूल्य वाली दवाओं और एपीआई उत्पादों के लिए एक मज़बूत PLI योजना होनी चाहिए।'
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त अभी मुख्य रूप से फार्मूलेशन, रिटेल दवाओं और जेनेरिक मेडिसिन में केंद्रित है। अमेरिका और यूरोप जैसे सख्त नियामकीय मानकों वाले बाज़ारों में भी भारत जेनेरिक दवाओं में मज़बूत उपस्थिति बनाए हुए है।
PLI योजना का अब तक का प्रदर्शन
फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए PLI योजना बायोफार्मास्युटिकल्स, जटिल जेनेरिक दवाओं, पेटेंट और ऑफ-पेटेंट दवाओं, दुर्लभ बीमारियों तथा ऑटोइम्यून रोगों की दवाओं जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहित करती है।
आँकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक इस योजना के तहत कुल ₹3,08,408.60 करोड़ की बिक्री दर्ज की गई, जिसमें ₹1,98,509.49 करोड़ का निर्यात शामिल है। इसी अवधि में कुल ₹40,294 करोड़ का निवेश हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य ₹17,275 करोड़ से कहीं अधिक है।
गौरतलब है कि PLI योजना ने बल्क ड्रग्स के आयात पर भारत की निर्भरता घटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नियामकीय बाधाएँ और FTA की भूमिका
वेद जैन ने ज़ोर दिया कि भारत को नियामकीय बाधाओं में और कमी लानी होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी और निर्यात के लिए उच्च मूल्य वाली फार्मास्युटिकल दवाओं का उत्पादन तेज़ करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) इस दिशा में सहायक सिद्ध होंगे, बशर्ते कुछ नियामकीय प्रतिबंधों को दूर किया जाए।
वैश्विक फार्मा उद्योग का रुख और भारत की चुनौती
नीति आयोग की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि वैश्विक फार्मास्युटिकल उद्योग तेज़ी से बायोलॉजिक्स, वैक्सीन, इम्यूनोलॉजिकल्स और एडवांस्ड थेरेप्यूटिक्स जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। हालाँकि, इन क्षेत्रों में भारत की निर्यात उपस्थिति अभी सीमित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इन क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन बढ़ाता है, तो वह वैश्विक फार्मा उद्योग में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर सकता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब चीन-निर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर वैश्विक स्तर पर पुनर्विचार हो रहा है और भारत के पास इस अवसर को भुनाने की क्षमता है।