21 जुलाई 2026
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भारत का फार्मा सेक्टर: नवाचार के जरिए वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ता हुआ

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भारत का फार्मा सेक्टर: नवाचार के जरिए वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ता हुआ

सारांश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि भारत बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स में नवाचार के साथ वैश्विक फार्मा क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार है। इस दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की हैं।

मुख्य बातें

भारत बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स में नवाचार को प्राथमिकता दे रहा है।
सरकार ने बायोफार्मा शक्ति पहल के तहत 10,000 करोड़ रुपए का बजट रखा है।
भारत अब सिर्फ जेनेरिक दवाओं का नेता नहीं, बल्कि बायोफार्मा हब बन रहा है।
इंडिया फार्मा 2026 कार्यक्रम में वैश्विक प्रतिनिधियों का एकत्र होना।
2030 तक बायोलॉजिक्स बाजार 75 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना।

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को कहा कि अब देश का ध्यान बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और स्पेशलिटी दवाओं पर केंद्रित है, जिससे भारत वैश्विक फार्मा क्षेत्र में नेतृत्व की स्थिति में आने के लिए तैयार है।

जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार ने हाल ही में 'बायोफार्मा शक्ति पहल' की शुरुआत की है, जिसके लिए 10,000 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है, जिसका उद्देश्य बायोफार्मा नवाचार को प्रोत्साहित करना और अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करना है।

उन्होंने पीआरआईपी स्कीम, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) कार्यक्रम और प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो घरेलू उत्पादन, सस्ती दवाओं की उपलब्धता और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने में सहायक हैं।

उन्होंने कहा कि 'इंडिया फार्मा 2026' कार्यक्रम इस क्षेत्र में संवाद, साझेदारी और भविष्य की रणनीतियों को तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उद्योग को अब नवाचार-आधारित सेगमेंट्स पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि वैश्विक फार्मा बाजार में लगभग 87 प्रतिशत हिस्सेदारी इनोवेटिव दवाओं की है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत अब केवल जेनेरिक दवाओं का नेता नहीं है, बल्कि तेजी से बायोफार्मा नवाचार हब के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है और दुनिया की लगभग 70 प्रतिशत वैक्सीन की मांग को पूरा करता है, जो देश की मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दर्शाता है।

भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है और 2030 तक यह बाजार 75 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

उन्होंने आईआईआटी और एनआईपीईआर जैसे प्रमुख संस्थानों के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

दोनों मंत्रियों ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग (डीओपी) द्वारा एफआईसीसीआई और इंडियन फार्मास्युटिकल एलाएंस के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन 'इंडिया फार्मा 2026' के 9वें संस्करण में भाग लिया।

यह कार्यक्रम वैश्विक फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है, जिसमें नवाचार, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व पर विशेष जोर दिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत फार्मा क्षेत्र में कैसे नेतृत्व कर सकता है?
भारत बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स में नवाचार को बढ़ावा देकर वैश्विक फार्मा क्षेत्र में नेतृत्व कर सकता है।
बायोफार्मा शक्ति पहल का उद्देश्य क्या है?
इस पहल का उद्देश्य बायोफार्मा नवाचार को प्रोत्साहित करना और अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करना है।
भारत जेनेरिक दवाओं में कितना योगदान करता है?
भारत वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है।
इंडिया फार्मा 2026 कार्यक्रम का महत्व क्या है?
यह कार्यक्रम फार्मा क्षेत्र में संवाद और साझेदारी को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
बायोलॉजिक्स की वैश्विक मांग के बारे में क्या जानकारी है?
बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है, और यह 2030 तक 75 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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