13 जुलाई 2026
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बायोफार्मा शक्ति मिशन: ₹10,000 करोड़ से 2047 तक 100 बायोलॉजिक्स का लक्ष्य, अनुप्रिया पटेल का ऐलान

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बायोफार्मा शक्ति मिशन: ₹10,000 करोड़ से 2047 तक 100 बायोलॉजिक्स का लक्ष्य, अनुप्रिया पटेल का ऐलान

सारांश

₹10,000 करोड़ के बायोफार्मा शक्ति मिशन के साथ भारत ने 2047 तक 100 बायोलॉजिक्स विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। जेनेरिक दवाओं के वैश्विक नेता से बायोफार्मा इनोवेटर बनने की यह छलांग भारत की रणनीतिक स्वास्थ्य नीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 11 जून 2026 को एसोचैम फार्मा समिट में भारत को बायोफार्मास्युटिकल नवाचार का अगला वैश्विक नेता बताया।
हाल ही में घोषित ₹10,000 करोड़ के बायोफार्मा शक्ति मिशन का लक्ष्य 2047 तक कम-से-कम 100 बायोलॉजिक्स विकसित करना है।
PLI योजनाओं के ज़रिए API और महत्वपूर्ण दवाओं के घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई, आयात निर्भरता घटी।
फार्मास्युटिकल विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि उद्योग नवाचार और नियामकीय उत्कृष्टता के बल पर विकास के नए चरण में है।
एसोचैम के पूर्व अध्यक्ष अनिल के.
अग्रवाल ने नवाचार और साझेदारी को भारत की वैश्विक नेतृत्व की कुंजी बताया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में एसोचैम फार्मा समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि भारत वैश्विक फार्मास्युटिकल महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और बायोफार्मास्युटिकल नवाचार की अगली लहर का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने ₹10,000 करोड़ के 'बायोफार्मा शक्ति मिशन' की घोषणा का उल्लेख करते हुए इसे सरकार की नवाचार-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

बायोफार्मा शक्ति मिशन: मुख्य लक्ष्य

अनुप्रिया पटेल ने बताया कि बायोफार्मा शक्ति मिशन का प्राथमिक उद्देश्य वर्ष 2047 तक कम-से-कम 100 बायोलॉजिक्स विकसित करना है। इस मिशन के तहत भारत को उन्नत उपचार, नवीन जैविक दवाओं और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक केंद्र बनाने की परिकल्पना है। साथ ही, सस्ती जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ करने का भी लक्ष्य रखा गया है।

PLI योजना और आत्मनिर्भरता की दिशा

मंत्री ने प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजनाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से सक्रिय औषधीय अवयवों (API) और महत्वपूर्ण दवाओं के घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे प्रमुख फार्मा कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता में कमी आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फार्मास्युटिकल और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक नहीं, बल्कि देश की रणनीतिक आवश्यकता भी है।

सहयोग और पारिस्थितिकी तंत्र पर जोर

अनुप्रिया पटेल ने सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप्स, निवेशकों, नियामक संस्थाओं और स्वास्थ्य संगठनों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उनके अनुसार यह बहु-स्तरीय साझेदारी अनुसंधान क्षमता, विनिर्माण, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को और मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, 'फार्मा क्षेत्र का भविष्य उन्हीं देशों का होगा जो नवाचार करेंगे, सहयोग बढ़ाएंगे और पूरी दुनिया के लिए समाधान विकसित करेंगे। भारत इस नेतृत्व के लिए तैयार है।'

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि भारतीय दवा उद्योग नवाचार, गुणवत्ता, नियामकीय उत्कृष्टता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बल पर विकास के नए चरण में प्रवेश कर रहा है। एसोचैम के पूर्व अध्यक्ष अनिल के. अग्रवाल ने कहा कि फार्मास्युटिकल क्षेत्र ऐसे निर्णायक दौर में है, जहाँ नवाचार, बेहतर नियामकीय व्यवस्था और साझेदारी आधारित सहयोग भारत को उन्नत स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक नेता बना सकते हैं।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर दवाओं की माँग तेजी से बढ़ रही है और भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा निर्यातक है। गौरतलब है कि बायोफार्मास्युटिकल क्षेत्र में वैश्विक निवेश के लिए भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करना सरकार की दीर्घकालिक औद्योगिक नीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का बायोफार्मा शक्ति मिशन महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — PLI के पिछले दौर में API उत्पादन बढ़ा, फिर भी चीन पर कच्चे माल की निर्भरता पूरी तरह नहीं टूटी। 2047 तक 100 बायोलॉजिक्स का लक्ष्य तभी यथार्थवादी होगा जब नियामकीय मंजूरी की गति, क्लीनिकल ट्रायल इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्किल्ड बायोटेक मैनपावर में ठोस निवेश हो। मुख्यधारा की कवरेज मंत्री के वक्तव्य तक सीमित रही — यह सवाल कम पूछा गया कि मिशन के लिए सत्यापन और जवाबदेही का ढाँचा क्या होगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बायोफार्मा शक्ति मिशन क्या है?
बायोफार्मा शक्ति मिशन भारत सरकार की ₹10,000 करोड़ की पहल है, जिसका लक्ष्य 2047 तक कम-से-कम 100 बायोलॉजिक्स विकसित करना और भारत को उन्नत जैविक दवाओं व अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक केंद्र बनाना है।
अनुप्रिया पटेल ने एसोचैम फार्मा समिट 2026 में क्या कहा?
केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत वैश्विक फार्मास्युटिकल केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और बायोफार्मास्युटिकल नवाचार की अगली पीढ़ी का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने PLI योजनाओं की सफलता और बायोफार्मा शक्ति मिशन को सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
PLI योजना का फार्मा क्षेत्र पर क्या असर हुआ है?
PLI योजनाओं के माध्यम से सक्रिय औषधीय अवयवों (API) और महत्वपूर्ण दवाओं के घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे प्रमुख फार्मा कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भरता कम हुई है।
भारत का 2047 तक बायोफार्मा में क्या लक्ष्य है?
भारत का लक्ष्य 2047 तक कम-से-कम 100 बायोलॉजिक्स विकसित करना है। इसके साथ ही देश को उन्नत उपचार, नवीन जैविक दवाओं और सस्ती जेनेरिक दवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
फार्मा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत क्यों जरूरी है?
अनुप्रिया पटेल के अनुसार, फार्मास्युटिकल और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक उद्देश्य नहीं, बल्कि देश की रणनीतिक आवश्यकता है। कच्चे माल की आयात निर्भरता कम करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका मजबूत करने के लिए यह अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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