2030 तक भारत की केमिकल उद्योग में हिस्सेदारी 5-6 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना
सारांश
Key Takeaways
- भारत की केमिकल उद्योग में हिस्सेदारी 2030 तक बढ़ने की संभावना।
- बायोफार्मा मिशन का महत्व और बजट आवंटन।
- बायोसिमिलर बाजार में हिस्सेदारी से आर्थिक अवसर।
- केमिकल पार्कों के विकास से औद्योगिक सहयोग में वृद्धि।
- सीडीएससीओ की भूमिका में सुधार की आवश्यकता।
नई दिल्ली, 4 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक वैश्विक केमिकल सेक्टर में भारत की हिस्सेदारी 5-6 प्रतिशत के बीच बढ़ सकती है और 2040 तक यह क्षेत्र 1 ट्रिलियन डॉलर के टर्नओवर का लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने यह जानकारी दी कि बायो-फार्मा शक्ति योजना और देश में तीन विशेष केमिकल पार्कों के लिए 13,000 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निवेश है।
बजट के पश्चात एक वेबिनार में उन्होंने बताया कि 2035 तक विश्व की 40 प्रतिशत दवाएं बायोलॉजिक्स श्रेणी में होंगी।
उन्होंने बताया कि 2030 तक लगभग 300 अरब डॉलर के पेटेंट समाप्त हो रहे हैं। ऐसे में बायोलॉजिक्स की दिशा में आगे बढ़ना एक सही समय है, और भारत बायोफार्मा मिशन के जरिए इस चुनौती का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस मिशन के लिए अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।
मंत्री ने कहा कि यदि भारत वैश्विक बायोसिमिलर बाजार में केवल 1 प्रतिशत हिस्सेदारी भी प्राप्त करता है, तो इससे देश को सालाना लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का अवसर मिल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिभा और कौशल विकास के साथ बेहतर तालमेल बनाकर एनआईपीईआर जैसे संस्थानों को मजबूत बनाना आवश्यक है। देशभर में 1,000 क्लीनिकल ट्रायल साइट्स का विकास अनुसंधान क्षमता और नवाचार को बढ़ावा देगा।
जल्द नियामकीय मंजूरी के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए मंत्री ने कहा कि बायोसिमिलर और दवाओं के किण्वन को समर्थन देने के लिए इस संस्था को और सशक्त बनाया जाएगा।
नड्डा ने बताया कि भारत का केमिकल सेक्टर वर्तमान में 19.4 लाख करोड़ रुपए का उत्पादन करता है और डाई व एग्रोकेमिकल जैसे क्षेत्रों में मजबूत स्थिति में है, लेकिन वैश्विक हिस्सेदारी केवल 3 प्रतिशत है।
बुनियादी ढांचे की कमी को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए मंत्री ने कहा कि देश में विश्वस्तरीय सुविधाओं वाले तीन केमिकल पार्क विकसित करने के लिए 3,300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इन पार्कों में प्लग-एंड-प्ले यूटिलिटीज, उन्नत अपशिष्ट उपचार प्रणाली, एकीकृत लॉजिस्टिक्स और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था होगी।
इन केमिकल पार्कों से औद्योगिक सहयोग के जरिए लागत में 20 से 40 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है और डिजाइन स्तर पर ही सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा।