भारत की फार्मा और मेडटेक क्षमता: जीडीपी में योगदान को बढ़ावा देने की दिशा में कदम

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भारत की फार्मा और मेडटेक क्षमता: जीडीपी में योगदान को बढ़ावा देने की दिशा में कदम

सारांश

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत एक सशक्त फार्मा अर्थव्यवस्था बन रहा है, जो देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उनकी बातों से स्पष्ट होता है कि मेडटेक और फार्मास्युटिकल सेक्टर में नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

Key Takeaways

  • भारत तेजी से एक सशक्त फार्मा अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहा है।
  • मेडटेक और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नवाचार पर जोर दिया जा रहा है।
  • भारत अब उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरण का उत्पादन कर रहा है।
  • कोविड-19 के दौरान भारत ने विश्व को वैक्सीन प्रदान किया।
  • सरकार ने रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए पीआरआईपी योजना शुरू की है।

नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत तेज़ी से एक मजबूत फार्मा अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है, जो देश की कुल जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'हेल्थकेयर समिट' में अपने भाषण के दौरान मंत्री ने बताया कि भारत का फार्मास्युटिकल, मेडटेक और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम देश को एक बड़ा वैश्विक निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है, विशेषकर सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में।

उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में चर्चा के दो मुख्य मुद्दे रहे—'मेड इन इंडिया' और 'क्वालिटी'। यह क्षेत्र अब तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें वैश्विक गुणवत्ता मानकों, स्वदेशी नवाचार और रिसर्च को उद्योग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है। पहले देश बहुत हद तक आयात पर निर्भर था, लेकिन अब यह स्वदेशी क्षमताओं के आधार पर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने याद दिलाया कि पहले आवश्यक मेडिकल उपकरण, प्रत्यारोपण और यहां तक कि उन्नत दवाएं भी बड़े पैमाने पर विदेशों से मंगाई जाती थीं, जिससे इलाज महंगा हो जाता था।

अब भारत स्वयं एंटीबायोटिक, वैक्सीन और उन्नत इलाज तकनीक विकसित कर रहा है, जिससे आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा बदलाव आया है।

कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने न केवल अपने वैक्सीन विकसित किए, बल्कि उन्हें विश्वभर में सप्लाई भी किया, जिससे देश की छवि एक भरोसेमंद हेल्थकेयर पार्टनर के रूप में मजबूत हुई।

गुणवत्ता के मामले में भी भारत ने प्रगति की है। अब देश में बने मेडिकल उपकरण जैसे स्टेंट, वेंटिलेटर और जांच से जुड़े उपकरण वैश्विक मानकों के बराबर हैं और ये सुरक्षित, प्रभावी और किफायती हैं।

मंत्री ने बताया कि सरकार ने 'फार्मा-मेडटेक में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा' देने के लिए पीआरआईपी योजना शुरू की है, जिसके लिए 5,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य भारत को कम लागत वाले उत्पादन से आगे बढ़ाकर उच्च मूल्य वाले नवाचार की ओर ले जाना है।

उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में वैश्विक मेडिकल डिवाइस बाजार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 1.5 प्रतिशत है, लेकिन सरकार 'नेशनल मेडिकल डिवाइस पॉलिसी 2023' के तहत इसे तेजी से बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है।

Point of View

बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार करेगा।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत की फार्मा क्षेत्र में कौन से महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं?
भारत की फार्मा क्षेत्र में नवाचार, आत्मनिर्भरता और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।
क्या भारत अब भी मेडिकल उपकरणों के लिए आयात पर निर्भर है?
नहीं, भारत अब स्वदेशी क्षमताओं के आधार पर मेडिकल उपकरणों का निर्माण कर रहा है।
भारत ने कोविड-19 के दौरान क्या उपलब्धियां हासिल कीं?
भारत ने अपने वैक्सीन विकसित किए और उन्हें विश्वभर में सप्लाई किया, जिससे उसकी छवि एक भरोसेमंद हेल्थकेयर पार्टनर के रूप में मजबूत हुई।
सरकार ने रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए कौन सी योजना बनाई है?
सरकार ने 'पीआरआईपी योजना' शुरू की है, जिसमें 5,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
भारत की वैश्विक मेडिकल डिवाइस बाजार में हिस्सेदारी कितनी है?
वर्तमान में भारत की वैश्विक मेडिकल डिवाइस बाजार में हिस्सेदारी लगभग 1.5 प्रतिशत है।
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