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क्या केंद्रीय बजट 2026-27 से हेल्थ सेक्टर को बड़ी उम्मीदें हैं?

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क्या केंद्रीय बजट 2026-27 से हेल्थ सेक्टर को बड़ी उम्मीदें हैं?

सारांश

केंद्रीय बजट 2026-27 से हेल्थ सेक्टर को बड़ी उम्मीदें हैं। विशेषज्ञ अधिक खर्च, जीएसटी में सुधार और डिजिटल स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने की मांग कर रहे हैं। क्या यह बजट भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा देगा? जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर जानकारी।

मुख्य बातें

सरकारी खर्च को जीडीपी के 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ाना आवश्यक है।
जीएसटी में सुधार की आवश्यकता है।
डिजिटल हेल्थ का महत्व बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना चाहिए।
'बाय इंडिया' पहल को बढ़ावा देना चाहिए।

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर देश का हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल सेक्टर बेहद उम्मीदों से भरा हुआ है। बजट पेश होने में ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सरकार से ज्यादा सार्वजनिक खर्च, जीएसटी ढांचे में सुधार और डिजिटल हेल्थरिसर्च को मजबूत करने की मांग की है। उद्योग जगत का मानना है कि बजट 2026 भारत के हेल्थ सिस्टम को एक नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

हेल्थ सेक्टर के जानकारों का कहना है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच सुधारने के लिए सरकारी खर्च को जीडीपी के 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए। वर्तमान में यह खर्च सीमित है, जबकि गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का बोझ लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 65 फीसदी मौतें एनसीडी के कारण होती हैं, जिससे हेल्थ सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है।

एक विशेषज्ञ ने कहा कि भारत इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां नीतियों के सही क्रियान्वयन की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने सरकार से सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च को कम से कम 2.5 फीसदी से ऊपर ले जाने की मांग की है, ताकि भविष्य के लिए एक मजबूत और टिकाऊ हेल्थ इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 में मेडिकल डिवाइसेज और डायग्नोस्टिक किट्स पर जीएसटी घटाकर 5 फीसदी करना एक बड़ा कदम था, लेकिन अब इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करना आवश्यक हो गया है। उदाहरण के तौर पर, रेडिएशन प्रोटेक्शन से जुड़े उपकरणों पर 18 फीसदी जीएसटी लग रहा है, जिसे घटाकर 5 फीसदी किया जाना चाहिए। इससे घरेलू निर्माताओं को राहत मिलेगी और इलाज की लागत भी कम होगी।

हेल्थ सेक्टर में भारत की लगभग 80 फीसदी निर्भरता आयातित मेडिकल डिवाइसेज पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में 'बाय इंडिया' पहल को मजबूत किया जाना चाहिए। इसके लिए रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देने वाली योजनाओं, जैसे पीआरआईपी स्कीम, को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। इससे देश में उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरणों का निर्माण संभव होगा।

बजट 2026 में टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में डायग्नोस्टिक हब और आई हॉस्पिटल्स की स्थापना के लिए प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (पीएसएल) और गैप वायबिलिटी फंडिंग (वीजीएफ) जैसे प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए, ताकि सस्ती और गुणवत्तापूर्ण हेल्थकेयर हर व्यक्ति तक पहुंच सके।

डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आईओटी आधारित मॉनिटरिंग को लेकर भी बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बीमारियों की पहचान पहले ही की जा सकती है, जिससे इलाज ज्यादा प्रभावी और किफायती हो जाएगा। इससे हेल्थकेयर सिस्टम रिएक्टिव की जगह प्रिवेंटिव मॉडल की ओर बढ़ सकेगा।

एक और एक्सपर्ट ने कहा कि आने वाला बजट हेल्थकेयर इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम है। डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मेसी, डायग्नोस्टिक्स और होम केयर सेवाओं के एकीकरण से आखिरी व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। साथ ही, हेल्थटेक इनोवेशन को प्रोत्साहन देने से मरीजों के इलाज की गुणवत्ता और अनुभव दोनों में सुधार होगा।

कुल मिलाकर, हेल्थ सेक्टर चाहता है कि बजट 2026-27 में सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने वाले फैसले लिए जाएं। ज्यादा खर्च, बेहतर नीतियां, डिजिटल तकनीक और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग के सहारे भारत एक मजबूत, सुलभ और भविष्य के लिए तैयार हेल्थकेयर सिस्टम की ओर तेजी से बढ़ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए क्या खास योजनाएं हो सकती हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में सरकारी खर्च को बढ़ाने, जीएसटी में सुधार और डिजिटल हेल्थ को प्रोत्साहित करने की योजनाएं हो सकती हैं।
क्या स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार संभव है?
हां, यदि बजट में सरकारी खर्च को बढ़ाया जाता है और प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जाता है।
डिजिटल हेल्थ का क्या महत्व है?
डिजिटल हेल्थ से बीमारियों की पहचान जल्दी हो सकती है, जिससे इलाज अधिक प्रभावी और किफायती होगा।
क्या भारत को मेडिकल डिवाइस में आत्मनिर्भर होना चाहिए?
जी हां, 'बाय इंडिया' पहल को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरणों का निर्माण किया जा सके।
बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए क्या प्रावधान हो सकते हैं?
ग्रामीण क्षेत्रों में डायग्नोस्टिक हब और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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