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आयातित दवाओं की शेल्फ लाइफ नियम बदलेगा: स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया

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आयातित दवाओं की शेल्फ लाइफ नियम बदलेगा: स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया

सारांश

स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयातित दवाओं की शेल्फ लाइफ शर्त बदलने का मसौदा जारी किया है — अब 60% की जगह सिर्फ 12 महीने की न्यूनतम शेष वैधता पर्याप्त होगी। बायोलॉजिकल और रेडियोफार्मास्यूटिकल दवाओं पर पुराने नियम बने रहेंगे। जनता से सुझाव आमंत्रित हैं।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 22 जून 2025 को ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 31 में संशोधन का मसौदा गजट अधिसूचना के जरिए जारी किया।
प्रस्ताव के अनुसार आयातित दवाओं के लिए 60% शेष शेल्फ लाइफ की अनिवार्यता हटाकर न्यूनतम 12 महीने की शेष वैधता का मानक लागू किया जाएगा।
बायोलॉजिकल उत्पादों और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स पर मौजूदा 60% की शर्त यथावत बनी रहेगी।
संशोधन का उद्देश्य दवा बर्बादी कम करना, सप्लाई चेन मजबूत करना और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देना है।
दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े सभी मानक ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत अपरिवर्तित रहेंगे।
सभी हितधारक निर्धारित अवधि के भीतर आधिकारिक ई-मेल पर अपने सुझाव और आपत्तियाँ भेज सकते हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 22 जून 2025 को गजट अधिसूचना के माध्यम से ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 31 में संशोधन का मसौदा जारी किया है, जिसमें आयातित दवाओं की शेष शेल्फ लाइफ की अनिवार्यता को बदलने का प्रस्ताव रखा गया है। मंत्रालय ने आम जनता और सभी संबंधित पक्षों से निर्धारित अवधि के भीतर सुझाव और आपत्तियाँ आमंत्रित की हैं। इस प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य दवा क्षेत्र में 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देना और मरीजों तक गुणवत्तापूर्ण दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

मुख्य प्रस्ताव: क्या बदलेगा

वर्तमान नियमों के अनुसार, आयातित दवाओं के लिए आयात के समय 60 प्रतिशत से अधिक शेष शेल्फ लाइफ होना अनिवार्य है। प्रस्तावित संशोधन के तहत इस शर्त को बदलकर यह निर्धारित किया जाएगा कि आयात के समय दवा की कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ होना पर्याप्त माना जाएगा। उल्लेखनीय है कि दवाओं की शेल्फ लाइफ वह समयावधि होती है जिसके दौरान कोई दवा सुरक्षित और पूर्ण रूप से प्रभावी रहती है — यह अवधि निर्माण की तारीख से शुरू होकर एक्सपायरी डेट तक होती है।

किन दवाओं पर लागू नहीं होगा बदलाव

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बायोलॉजिकल उत्पादों और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स पर यह संशोधन लागू नहीं होगा। इन विशेष श्रेणियों की दवाओं के लिए 60 प्रतिशत से अधिक शेष शेल्फ लाइफ की मौजूदा अनिवार्यता यथावत बनी रहेगी। मंत्रालय के अनुसार इन दवाओं की विशेष प्रकृति और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी संवेदनशीलता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

आपूर्ति श्रृंखला और मरीजों पर असर

मंत्रालय का मानना है कि इस संशोधन से फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन अधिक प्रभावी बनेगी। आयात के समय 12 महीने की न्यूनतम शेष वैधता से दवाओं को बाज़ार तक पहुँचाने और मरीजों को उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इसके साथ ही सरकार का यह भी कहना है कि मौजूदा सख्त नियमों के कारण भंडारण और वितरण में होने वाली दवाओं की अनावश्यक बर्बादी में कमी आएगी, जिससे सप्लाई मैनेजमेंट बेहतर होगा, लागत घटेगी और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुदृढ़ होगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया के प्रमुख दवा आयातक देशों में से एक है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनिश्चितता बनी हुई है।

गुणवत्ता मानक अपरिवर्तित रहेंगे

मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया है कि यह प्रस्ताव केवल आयात के समय लागू होने वाली शेष शेल्फ लाइफ की शर्त से संबंधित है। दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े अन्य सभी नियम ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत पहले की भाँति लागू रहेंगे। गौरतलब है कि इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य यह आश्वस्त करना है कि नियमों में ढील का अर्थ गुणवत्ता मानकों में कोई कमी नहीं है।

हितधारकों से सुझाव आमंत्रित

मंत्रालय ने सभी हितधारकों — दवा उद्योग, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम नागरिकों — से इस मसौदे पर अपने सुझाव और आपत्तियाँ निर्धारित अवधि के भीतर आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से भेजने का आग्रह किया है। इस परामर्श प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अंतिम संशोधन अधिसूचित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह बदलाव उस समय आया है जब वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। असली चिंता यह है कि 'पर्याप्त शेल्फ लाइफ' और 'उपयोग योग्य शेल्फ लाइफ' के बीच का अंतर मरीज के स्तर पर कितना महसूस होगा — खासकर जब वितरण और भंडारण की खामियाँ पहले से मौजूद हैं। बायोलॉजिकल दवाओं को छूट देना सही कदम है, लेकिन यह भी देखना होगा कि क्या नई सीमा के तहत आने वाली दवाएँ दूरदराज के इलाकों तक पहुँचने से पहले ही एक्सपायरी के करीब पहुँच जाती हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्रग्स रूल्स 1945 के नियम 31 में क्या बदलाव प्रस्तावित है?
प्रस्तावित संशोधन के तहत आयातित दवाओं के लिए 60% से अधिक शेष शेल्फ लाइफ की मौजूदा अनिवार्यता को हटाकर न्यूनतम 12 महीने की शेष वैधता का मानक लागू किया जाएगा। यह बदलाव फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन को अधिक लचीला और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
क्या यह बदलाव सभी आयातित दवाओं पर लागू होगा?
नहीं, बायोलॉजिकल उत्पादों और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स पर यह संशोधन लागू नहीं होगा। इन श्रेणियों के लिए 60% से अधिक शेष शेल्फ लाइफ की पुरानी शर्त यथावत बनी रहेगी, क्योंकि इन दवाओं की प्रकृति और सार्वजनिक स्वास्थ्य संवेदनशीलता अलग होती है।
इस बदलाव से मरीजों को क्या फायदा होगा?
मंत्रालय के अनुसार, 12 महीने की न्यूनतम शेष वैधता से दवाओं को बाज़ार और मरीजों तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे दवाओं की बर्बादी कम होगी, आपूर्ति बेहतर होगी और गुणवत्तापूर्ण दवाएँ अधिक सुलभ होंगी।
क्या इस बदलाव से दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी?
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधन केवल आयात के समय शेष शेल्फ लाइफ की शर्त से संबंधित है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के सभी मानक पहले की तरह लागू रहेंगे।
इस मसौदे पर सुझाव कैसे और कब तक दे सकते हैं?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी हितधारकों — उद्योग, विशेषज्ञों और आम नागरिकों — से निर्धारित अवधि के भीतर आधिकारिक ई-मेल के माध्यम से सुझाव और आपत्तियाँ भेजने का आग्रह किया है। मसौदा 22 जून 2025 को गजट अधिसूचना के जरिए जारी किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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