डीआरआई का बड़ा ऑपरेशन: 2 लाख प्रतिबंधित गोलियां जब्त, नाइजीरिया तस्करी नेटवर्क ध्वस्त; 3 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 2 अगस्त 2026 को मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, जिसमें नाइजीरिया भेजी जा रही 2 लाख प्रतिबंधित गोलियां जब्त की गईं और तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह महाराष्ट्र के अंबरनाथ में स्थित एक गुप्त फैक्ट्री से प्रतिबंधित मादक दवाओं का निर्माण कर उन्हें अफ्रीकी देशों में तस्करी कर रहा था।
कैसे हुई कार्रवाई
डीआरआई अधिकारियों को 2 अगस्त 2026 को एक खुफिया सूचना मिली, जिसके आधार पर मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में नाइजीरिया के लिए रवाना होने वाली एक संदिग्ध निर्यात खेप को रोका गया। दस्तावेजों में इस खेप को प्रेगाबालिन 300 मिग्रा कैप्सूल घोषित किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि इसमें वास्तव में 1 लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड 250 मिग्रा टैबलेट (लगभग 25 किलोग्राम) और 1 लाख टैपेंटाडोल 200 मिग्रा टैबलेट (लगभग 20 किलोग्राम) छिपाई गई थीं।
नेटवर्क की कार्यप्रणाली
जांच में सामने आया कि यह एक बहु-स्तरीय संगठित नेटवर्क था। अंबरनाथ स्थित गुप्त फैक्ट्री में ट्रामाडोल की गोलियां तैयार की जाती थीं और पहचान छिपाने के लिए उन्हें साधारण कार्टनों में पैक किया जाता था। इसके बाद इन्हें मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स के पास स्थित एक गोदाम में पहुंचाया जाता था, जहां सफेद बोरियों में दोबारा पैकिंग कर नाइजीरिया भेजने की तैयारी होती थी।
डीआरआई ने इसके बाद निर्यातक, निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परिवहनकर्ता और गोदाम संचालक से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। निर्माण इकाई की तलाशी में टैबलेट निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और बड़ी मात्रा में कच्चा माल बरामद हुआ।
गिरफ्तार आरोपी
डीआरआई ने इस मामले में तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें आईईसी धारक निर्यातक, सप्लायर एवं समन्वयक, और ट्रामाडोल का अवैध निर्माता शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, नेटवर्क में शामिल अन्य कड़ियों की तलाश जारी है।
इन दवाओं पर क्यों है सख्त नियंत्रण
डीआरआई के अनुसार, ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल सिंथेटिक ओपिओइड दर्द निवारक दवाएं हैं, जिनका उपयोग चिकित्सकीय निगरानी में मध्यम से गंभीर दर्द के उपचार के लिए किया जाता है। दुरुपयोग और लत लगने की गंभीर आशंका के कारण इन पर कड़े नियामक नियंत्रण लागू हैं। ट्रामाडोल को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत मन:प्रभावी पदार्थ (साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) घोषित किया गया है। टैपेंटाडोल अभी एनडीपीएस सूची में शामिल नहीं है, किंतु यह औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत सख्त नियंत्रण में है।
आगे की जांच और संभावित खतरा
अधिकारियों ने कहा है कि इन दवाओं का अवैध निर्माण, भंडारण और तस्करी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और ऐसे मामले अक्सर अंतरराष्ट्रीय संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े पाए जाते हैं। डीआरआई का कहना है कि इस कार्रवाई से अवैध निर्माण, भंडारण, छिपाने और विदेश भेजने में शामिल एक बड़े संगठित नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत से अफ्रीकी देशों को नशीली दवाओं की तस्करी के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।