नवी मुंबई एयरपोर्ट से दवाओं के आयात को मंजूरी, ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन लागू
सारांश
मुख्य बातें
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 8 जुलाई 2026 को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को दवाओं के आयात के लिए अधिकृत प्रवेश बिंदुओं की सूची में शामिल करने की अधिसूचना जारी की। ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 43ए में इस संशोधन से भारत में फार्मास्युटिकल खेपों के लिए उपलब्ध आधिकारिक एंट्री पॉइंट्स की संख्या में वृद्धि हुई है।
संशोधन में क्या बदला
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के प्रावधानों के तहत ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिशों के बाद यह अधिसूचना जारी की गई है। नवी मुंबई एयरपोर्ट को उन हवाई अड्डों की सूची में जोड़ा गया है जहाँ से फार्मास्युटिकल कंसाइनमेंट की कानूनी रूप से आवाजाही हो सकती है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस कदम से 'लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर' मजबूत होगा और आयातकों को एक नया व्यावहारिक विकल्प मिलेगा।
परीक्षण और अनुसंधान के लिए सरल प्रक्रिया
इसी क्रम में मंत्रालय ने जून 2026 में ड्रग्स रूल्स, 1945 में एक और संशोधन का प्रस्ताव रखा था, जिसका उद्देश्य जाँच, परीक्षण या विश्लेषण के लिए दवाओं के आयात की अनुमति प्रक्रिया — जिसे सामान्यतः 'फॉर्म 11' के माध्यम से पूरा किया जाता है — को सरल बनाना था। यह संशोधन एनालिटिकल और नॉन-क्लिनिकल परीक्षण के उद्देश्य से कम मात्रा में सभी श्रेणियों की दवाओं के आयात के लिए एक स्वीकृति-आधारित प्रणाली लागू करता है।
लाइसेंसिंग बाधाएँ होंगी कम
बयान के अनुसार, परीक्षण या अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए कम मात्रा में दवाओं के आयात हेतु लाइसेंसिंग की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। इससे आवेदकों पर नियामक अनुपालन का बोझ उल्लेखनीय रूप से घटने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब सरकार फार्मास्युटिकल क्षेत्र में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को प्राथमिकता दे रही है।
स्टार्ट-अप और उद्योग पर असर
मंत्रालय का कहना है कि इस पहल से फार्मास्युटिकल स्टार्ट-अप और स्थापित उद्योग दोनों को लाभ होगा, क्योंकि वे अब तेज़ी से परीक्षण या विश्लेषण प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। साथ ही, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। यह कदम भारत को वैश्विक फार्मास्युटिकल आपूर्ति श्रृंखला में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक नीतिगत प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या
नवी मुंबई एयरपोर्ट के परिचालन में आने के साथ ही यह नया प्रवेश बिंदु सक्रिय हो जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, नियामक निगरानी पूर्ववत बनी रहेगी ताकि आयातित दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए यह दोहरा संशोधन — एंट्री पॉइंट का विस्तार और परीक्षण आयात की सरल प्रक्रिया — दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है।