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कर्नाटक लोकायुक्त के बेंगलुरु, धारवाड़, शिवमोग्गा और रायचूर में एक साथ छापे, आय से अधिक संपत्ति की जांच

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कर्नाटक लोकायुक्त के बेंगलुरु, धारवाड़, शिवमोग्गा और रायचूर में एक साथ छापे, आय से अधिक संपत्ति की जांच

सारांश

कर्नाटक लोकायुक्त ने एक ही दिन में चार शहरों — बेंगलुरु, धारवाड़, शिवमोग्गा और रायचूर — में सरकारी अधिकारियों के दर्जनों ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के आरोपों पर है और मंगलवार की सात-ठिकाने वाली तलाशी के ठीक अगले दिन हुई, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़ते अभियान का संकेत है।

मुख्य बातें

कर्नाटक लोकायुक्त ने 8 जुलाई 2026 को बेंगलुरु, धारवाड़, शिवमोग्गा और रायचूर में एक साथ छापेमारी की।
छापे आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति (डीए) अर्जित करने के आरोपों की जांच के तहत किए गए।
कुंबलगोडु के पंचायत विकास अधिकारी , शिवमोग्गा के एसीएफ और रायचूर के केबीजेएनएल कार्यकारी अभियंता के ठिकाने निशाने पर रहे।
एक दिन पहले 7 जुलाई को भी बेंगलुरु में तीन अधिकारियों के सात ठिकानों पर तलाशी ली गई थी।
पिछले मामले में एयरपोर्ट रोड के पास 13 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि के कथित गलत आवंटन का आरोप है।
मामला दर्ज करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत राज्य सरकार से अनुमति ली गई।

कर्नाटक लोकायुक्त ने 8 जुलाई 2026 (बुधवार) की सुबह बेंगलुरु, धारवाड़, शिवमोग्गा और रायचूर में सरकारी अधिकारियों से जुड़े दर्जनों ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति (डीए) अर्जित करने के आरोपों की जांच के तहत की गई। चारों शहरों में एक साथ चलाए गए इस अभियान को राज्य के भ्रष्टाचार-विरोधी तंत्र की हालिया बड़ी कार्रवाइयों में गिना जा रहा है।

बेंगलुरु में कार्रवाई

बेंगलुरु दक्षिण जिले में लोकायुक्त अधिकारियों ने कुंबलगोडु के पंचायत विकास अधिकारी से जुड़े आवास, कार्यालय और अन्य संपत्तियों की तलाशी ली। इस अभियान का नेतृत्व बेंगलुरु दक्षिण जिले की लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक स्नेहा ने किया।

मगड़ी तालुक के बेलागावाड़ी गांव में तीन स्थानों — संबंधित अधिकारी का फार्महाउस, उनके भाई का घर और उनके भतीजे का घर — पर तलाशी ली गई। इसके अतिरिक्त, बेंगलुरु में चार अन्य परिसरों पर भी छापेमारी की गई, जहाँ दस्तावेजों और अभिलेखों की विस्तृत जांच की गई।

शिवमोग्गा और धारवाड़ में एसीएफ के ठिकानों पर तलाशी

लोकायुक्त ने शिवमोग्गा के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) से जुड़ी संपत्तियों पर भी छापा मारा। अधिकारियों ने शिवमोग्गा स्थित उनके कार्यालय और धारवाड़ स्थित उनके आवास की तलाशी ली। धारवाड़ के डोड्डानायकानाकोप्पा इलाके में स्थित उनके मकान को भी खंगाला गया।

बताया जा रहा है कि एसीएफ का अलनावर रोड पर एक फार्महाउस और औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री भी है। इन दोनों परिसरों के अलावा उनके जीजा के घर की भी तलाशी ली गई। इस कार्रवाई का नेतृत्व शिवमोग्गा लोकायुक्त इंस्पेक्टर वीरबसप्पा कुशलापुरा और धारवाड़ लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धलिंगप्पा ने किया।

रायचूर में केबीजेएनएल अभियंता के ठिकाने निशाने पर

रायचूर जिले में लोकायुक्त अधिकारियों ने केबीजेएनएल (KBJNL) के कार्यकारी अभियंता (ईई) से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। उनके कार्यालय, देवदुर्गा तालुक के चिक्काहोनाकुनी गांव स्थित आवास और उनके रिश्तेदारों के घरों पर तलाशी जारी रही।

मंगलवार की कार्रवाई का संदर्भ

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले, 7 जुलाई 2026 (मंगलवार) को भी लोकायुक्त पुलिस ने बेंगलुरु में तीन सरकारी अधिकारियों से जुड़े सात ठिकानों पर तलाशी ली थी। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार के दो मामलों की जांच के सिलसिले में की गई थी।

न्यायालय के वारंट के आधार पर की गई उन तलाशियों में बेंगलुरु के स्पेशल डिप्टी कमिश्नर एम.के. जगदीश, तहसीलदार बी.आर. मंजूनाथ और शिरस्तेदार रजनीकांत के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, इन अधिकारियों ने कथित तौर पर एयरपोर्ट रोड के पास हुनासमरनहल्ली में 13 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि का निजी व्यक्तियों के पक्ष में गलत तरीके से आवंटन किया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचा। मामला दर्ज करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत राज्य सरकार से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई थी।

आगे की स्थिति

चिन्हित सभी संपत्तियों पर तलाशी अभियान जारी है और विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है। लगातार दो दिनों में की गई इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि कर्नाटक लोकायुक्त ने सरकारी अधिकारियों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुनियोजित और समन्वित अभियान की रणनीति अपनाई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में भ्रष्टाचार के आरोप राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं। हालांकि, असली कसौटी यह होगी कि इन तलाशियों के बाद कितने मामलों में अभियोजन तक पहुँचा जाता है — क्योंकि अतीत में कई बड़ी छापेमारियाँ अदालत में कमज़ोर साबित हुई हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेना प्रक्रियागत सावधानी तो दर्शाता है, लेकिन यह भी सवाल उठता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना ऐसी अनुमतियाँ कितनी निष्पक्ष रहती हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक लोकायुक्त ने 8 जुलाई को किन शहरों में छापेमारी की?
कर्नाटक लोकायुक्त ने 8 जुलाई 2026 को बेंगलुरु, धारवाड़, शिवमोग्गा और रायचूर में एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच के तहत की गई।
आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामला क्या होता है?
जब कोई सरकारी अधिकारी अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करता है, तो उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत डीए (Disproportionate Assets) का मामला दर्ज किया जाता है। लोकायुक्त ऐसे मामलों की जांच करती है और संपत्तियों की तलाशी लेती है।
बेंगलुरु में किन अधिकारियों के ठिकानों पर तलाशी ली गई?
8 जुलाई को बेंगलुरु दक्षिण जिले के कुंबलगोडु के पंचायत विकास अधिकारी के ठिकानों पर तलाशी ली गई। इससे एक दिन पहले 7 जुलाई को स्पेशल डिप्टी कमिश्नर एम.के. जगदीश, तहसीलदार बी.आर. मंजूनाथ और शिरस्तेदार रजनीकांत के सात ठिकानों पर भी तलाशी ली गई थी।
हुनासमरनहल्ली भूमि आवंटन मामले में क्या आरोप हैं?
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, अधिकारियों ने कथित तौर पर एयरपोर्ट रोड के पास हुनासमरनहल्ली में 13 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि का निजी व्यक्तियों के पक्ष में गलत तरीके से आवंटन किया। इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचा और मामला दर्ज करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत राज्य सरकार से अनुमति ली गई।
शिवमोग्गा और धारवाड़ में किस अधिकारी के ठिकानों पर छापे पड़े?
शिवमोग्गा के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) के कार्यालय, धारवाड़ स्थित आवास, फार्महाउस, औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री और उनके जीजा के घर पर तलाशी ली गई। इस कार्रवाई का नेतृत्व शिवमोग्गा लोकायुक्त इंस्पेक्टर वीरबसप्पा कुशलापुरा और धारवाड़ लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धलिंगप्पा ने किया।
राष्ट्र प्रेस
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