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खांसी की सिरप अब केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से: सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 में किया पांचवां संशोधन

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खांसी की सिरप अब केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से: सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 में किया पांचवां संशोधन

सारांश

सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन कर छोटे गाँवों में खांसी की सिरप की अनियमित बिक्री की दशकों पुरानी छूट खत्म कर दी है। अब केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी और वैध प्रिस्क्रिप्शन के ज़रिए ही यह दवा मिल सकेगी — एक कदम जो नियामकीय सख्ती तो लाता है, लेकिन ग्रामीण पहुँच पर सवाल भी खड़े करता है।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 16 जून 2026 को ड्रग्स रूल्स, 1945 का पांचवां संशोधन अधिसूचित किया।
अनुसूची-के से 'सिरप' शब्द हटाया गया; अब 1,000 से कम आबादी वाले गाँवों में भी खांसी की सिरप को लाइसेंस छूट नहीं मिलेगी।
खांसी की सिरप अब केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से और वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही उपलब्ध होगी।
निर्माताओं, वितरकों और विक्रेताओं को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया।
यह संशोधन सिरप आधारित दवाओं पर नियामकीय निगरानी मज़बूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 16 जून 2026 को अधिसूचना जारी कर ड्रग्स रूल्स, 1945 में पांचवां संशोधन लागू किया, जिसके तहत छोटे गाँवों में खांसी की सिरप की बिक्री पर मिलने वाली नियामकीय छूट को समाप्त कर दिया गया है। अब देश भर में खांसी की सिरप केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी के माध्यम से ही बेची और वितरित की जा सकेगी।

क्या था पुराना प्रावधान

ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-के के तहत कुछ विशेष श्रेणी की दवाओं को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के कुछ प्रावधानों से छूट दी जाती थी। इसी छूट के अंतर्गत 1,000 से कम आबादी वाले गाँवों में खांसी की सिरप को खुदरा बिक्री लाइसेंस की अनिवार्यता के बिना बेचा जा सकता था। यह व्यवस्था दशकों से चली आ रही थी और ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई थी।

संशोधन में क्या बदला

नए संशोधन के ज़रिए अनुसूची-के से 'सिरप' शब्द को हटा दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि खांसी की सिरप को अब अनुसूची-के की छूट का लाभ नहीं मिलेगा। इस बदलाव के बाद ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के सभी लागू प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा — चाहे विक्रेता किसी भी क्षेत्र में हो।

उपभोक्ताओं पर असर

इस नई व्यवस्था के बाद उपभोक्ताओं को खांसी की सिरप खरीदने के लिए पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा जारी वैध प्रिस्क्रिप्शन दिखाना होगा। यह बदलाव विशेष रूप से उन ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को प्रभावित करेगा, जहाँ अब तक बिना लाइसेंस वाले दुकानदारों से सिरप मिल जाती थी। गौरतलब है कि ग्रामीण भारत में लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी की उपलब्धता अभी भी सीमित है, जिससे दवाओं तक पहुँच में व्यावहारिक चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

सरकार का उद्देश्य

मंत्रालय के अनुसार, यह संशोधन सिरप आधारित दवाओं पर नियामकीय निगरानी को मज़बूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप नियमों को अद्यतन करने के उद्देश्य से किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे खांसी की सिरप के जिम्मेदाराना वितरण को बढ़ावा मिलेगा और पूरे देश में एकसमान नियामकीय मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।

उद्योग और वितरकों के लिए निर्देश

मंत्रालय ने खांसी की सिरप बनाने वाली कंपनियों, वितरकों और विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और ड्रग्स रूल्स के तहत सभी लाइसेंस एवं नियामकीय आवश्यकताओं का सख्ती से पालन करें। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश में खांसी की सिरप के दुरुपयोग और अनियमित बिक्री को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी के विस्तार के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन में होगी। भारत के हज़ारों दूरदराज़ गाँवों में लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी की उपलब्धता अभी भी बेहद सीमित है — ऐसे में छूट हटाने से दवा की पहुँच कम हो सकती है, बिना दुरुपयोग रुके। सरकार ने नियामकीय जाल कसा है, परंतु ग्रामीण स्वास्थ्य अवसंरचना को उसी गति से मज़बूत करने की कोई समयबद्ध योजना अभी सामने नहीं आई है। बिना समानांतर फार्मेसी विस्तार के, यह नीति शहरी-ग्रामीण स्वास्थ्य असमानता को और गहरा कर सकती है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्रग्स रूल्स 1945 के पांचवें संशोधन में खांसी की सिरप के लिए क्या बदला?
इस संशोधन के तहत अनुसूची-के से 'सिरप' शब्द हटा दिया गया है, जिससे खांसी की सिरप को मिलने वाली लाइसेंस छूट समाप्त हो गई है। अब 1,000 से कम आबादी वाले गाँवों में भी खांसी की सिरप केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से ही बेची जा सकेगी।
पहले छोटे गाँवों में खांसी की सिरप बिना लाइसेंस के क्यों बेची जा सकती थी?
ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-के के तहत कुछ दवाओं को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के कुछ प्रावधानों से छूट दी गई थी, जिसमें खांसी की सिरप भी शामिल थी। यह प्रावधान ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था।
क्या अब खांसी की सिरप के लिए डॉक्टर का पर्चा ज़रूरी होगा?
हाँ, नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को खांसी की सिरप खरीदने के लिए पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा जारी वैध प्रिस्क्रिप्शन दिखाना होगा। दवा केवल लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही मिलेगी।
यह बदलाव ग्रामीण उपभोक्ताओं को कैसे प्रभावित करेगा?
जिन गाँवों में लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी उपलब्ध नहीं है, वहाँ के निवासियों को खांसी की सिरप के लिए नज़दीकी कस्बे या शहर जाना पड़ सकता है। यह बदलाव दवा की पहुँच को प्रभावित कर सकता है, हालाँकि सरकार का उद्देश्य नियामकीय मानकों को मज़बूत करना और दुरुपयोग रोकना है।
सरकार ने यह संशोधन क्यों किया?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह संशोधन सिरप आधारित दवाओं पर नियामकीय निगरानी को मज़बूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप नियमों को अद्यतन करने के लिए किया गया है। इससे देश भर में एकसमान नियामकीय मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।
राष्ट्र प्रेस
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